00:00दोस्तों, कहते हैं कि इंसान से गल्ती हो सकती है, लेकिन कुछ गल्तियां ऐसी होती हैं, जिनका बोज पूरी जिन्दगी
00:05दिल पर रहता है।
00:19आज की कहानी भी एक ऐसी ही बेटी की है, जिसने एक फैसला तो अपनी मर्जी से लिया, मगर उसकी
00:24कीमत 15 साल तक चुकानी पड़ी।
00:26करीब 15 साल पहले उसने अपने माता पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर घर छोड़ दिया और अपनी पसंद से
00:31शादी कर ली।
00:32उस समय उसे लगा कि यहीं उसकी खुशियों का रास्ता है, लेकिन वक्त के साथ उसे एहसास हुआ कि माँ
00:37बाप की दुआओं के बिना सुकून अधूरा होता है।
00:40दिन बीटते गए, साल गुजरते गए, उसके अपने बच्चे भी हो गए, लेकिन दिल में एक ही दर्द था, काश
00:46एक बार अपने अब्बा से माफी मांग पाती।
00:48आखिर एक दिन उसने हिम्मत जुटाई और अपने बच्चों को साथ लेकर अपने पुराने गाओं पहुँची।
00:53जैसे ही वह गली में दाखिल हुई, उसकी नजर एक कमजोर और सफेद बालो वाले बुजर्ग पर पड़ी।
00:58वह कोई और नहीं, उसके अपने पिता थे। बेटी ने उन्हें पहली ही नजर में पहचान लिया।
01:03लेकिन इतने सालों बाद पिता अपनी बेटी को पहचान ना सके।
01:06जब उसने भर्राई हुई आवाज में कहा बाबा, तो वह बुजर्ग ठिठक गए। आवाज जानी पहचानी लगी।
01:12बेटी दोड़कर उनके पास पहुंची। रोते हुए उनके कदमों में गिर गई और बार-बार माफी मांगने लगी।
01:17जब पिता को समझ आया कि यह उनकी वही बेटी है, तो उनका दिल भी भराया। उन्होंने अपनी बेटी को
01:23उठाया और सीने से लगा लिया। वहां मौझूद हर व्यक्ति की आँखे नम हो गई।
01:27इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि जिन्दगी का कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले अपने मां,
01:33बाप की सला और उनकी रजामंदी को जरूर एहमियत दें। उनकी दुआ दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है। अगर आपको
01:40यह कहानी दिल को छूग गई हो तो इसे
01:41ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जरूर पहुचाईए।
Comments