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  • 7 months ago
Agar God Hai To Dikhao? | Mufti Shamail Nadwi vs Javed Akhtar Debate

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Transcript
00:00हम और आप एक isolated island पर हैं ऐसा island जहां पर हमसे पहले कोई कभी नहीं गया चलते चलते आपके सामने अचानक आपने देखा एक pink color की ball पड़ी हुई है
00:11सबसे पहला सवाल आपके जहन में क्या आएगा कि ये ball यहां क्यों आई है कैसे आई है ये pink color की ही क्यों है कोई और color भी हो सकता था ये इसी shape में क्यों है कोई और shape भी हो सकता था
00:23naturally आप इस तरफ पहुचेंगे कोई ना कोई है जिसने इन specific properties के साथ इस ball को बनाया है और यहां पे रखा है
00:32चुँके आप जानते हैं कि ये जो ball है इसका exist करना जरूरी नहीं है ये exist कर भी सकती थी नहीं भी कर सकती थी
00:41और exist करना ही था तो किसी और form में करती किसी और color में करती
00:45अब आप इस ball को expand करते चले जाएं expand करते चले जाएं expand करते चले जाएं
00:50यहां तक कि ये ball universe के size की हो जाए बताईए कि क्या size के बढ़ जाने से सवाल बदल जाएगा हरगिस नहीं बदलेगा
00:57अभी भी सवाल रहेगा ये universe कहां से आया इन specific properties के साथ कहां से आया क्यों आया किस ने बनाया ये सवाल उस वक्ट भी valid रहेगा
01:08लेकिन ये सवाल अगर हम जनाब जावेद अख्तर साहब से करें तो चूँके इनका world view एथिस्टिक है और सिर्फ इनका नहीं मतलब जितने भी एथिस्ट हैं और एथिस्टिक world view को रखने वाले से अगर आप ये सवाल करें
01:21कि ये यूनिवर्स कहां से आया तो इनका जवाब या तो argument from ignorance होगा या dogmatic होगा या तो ये कहेंगे कि मुझे नहीं पता कि ये कहां से आया लेहाज़ा God does not exist ये argument from ignorance है
01:37या ये कहेंगे कि ये यूनिवर्स खुदबाखुद बन गया इसका मतलब ये है कि उस बॉल को भी खुदबाखुद बन जाना चाहिए लेकिन बॉल के तालुख से ये explanation accept नहीं की जाएगी कि ये खुदबाखुद बन गयी लेकिन यूनिवर्स के तालुख से कर दिया जा�
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