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  • 8 months ago
Maulana Saad Kandhlawi Bayan for Ulama |Biswa Ijtema, Puinan Hooghly 2026
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00:00आप साहिसें निकलकर शाहत को लगयाया, फिर हिलाया, फिर हिलाया, फिर हिलाया, फिर में भी उज़िखें नगाया तकर पुछीशते हूं नगाया,
00:30बिलके रिवयत के नखल करने में, पूरा अमली तोर पर द्रख की टहिंए हिला कर साहभी ने बात अनु को बतलाई कि देखो, आप साहिज इस तरह किया था मैं भी साहगी कर रहा हूं।
00:38मुस्तफ़ी पैदा करो।
00:40मुस्तफ़ी तियार करो।
00:43माद जिबल लदी अल्हाओ टाला
00:44स्जिद अल्मा है
00:46और बाज़ार में गष्टर रहे
00:49इजलिस बिनान उमिन साथ
00:51यहां इमाम भुखारी ने
00:54उनका मज़दे के इमान में ज्यादती होती है
00:55इमाम भुखारी का यजित अनुकुस की बहस को पढ़ते हैं
00:58माशाला तुब पढ़ते भी हैं पढ़ते भी हैं मज़सों में
01:00और यहां यजित अनुकुस की बहस को
01:02सिर्भ इस पर लाका अटफर देते हैं
01:03यहां इनके दलाइल इमान की ज्यादत के हैं
01:06इनके दलाइल इमान के अपज़ाने के हैं
01:08यहां आकर बहस खतम हो जाती है
01:10हैंनके इसका अगला हिस्सा यह जरूरी यह था
01:12कि इमाम मुखारी अले इमान के इज़्दियाद को साबित कर रहे है
01:15मौाज बिन जबल रदियालाहु तो उनके घष्ट से
01:17और फर्मारें के देखो हमारा मुस्द्दलिया है इमान के जियाती में
01:20कि इमाम इजबल रदियालाहु तो लोगों से मुलाकात करके कहते हैं
01:23इज्रिस बिना नुमिन साहतन आख हमारे साब बेशा बेशाब अपर अपर इमान ले आए
01:26इमाम उखारी ने इस से साबित किया ये बात कि इस गर्ष्ट और इमलाकातों से इमान में जियाती होती है
01:32इसे एक करना जाता हूं कि इमाम इल्मा है रईसल मुट्यान है
01:38मादियालाहु तो और गश्ट करके लोगों को खुशामत करकर किला रहे हैं मस्जिद में
01:42इमाम उखारी अभुष्ट अभुष्ट कर रहे हैं लोगों से कह रहे हैं कि किसने इतना आजिद कर दिया कि तुम यहां बादार में हो और वहां तालीम हो रहे हैं
01:53मैं आप से साह को बार्स करना हूँ मेरे नजग तबलीग में सिन-फजाइल की ताالीम यह कोई इत्मिनान की बात मैं है
02:03ना हमें इसके पर एक नात में योज़ा है लोगों का,iblesो ते तबкий ओड रोगों के लिग्र फप्जाइल के वी तो उण है ओभी का इसocyकर ख्चाहिए , वीज़ा जाता है .
02:18कि रखबत प्यज़ा हो गई है अमेरे जिए तरीका मालूम नहीं हुआ तो यह आमल मर्दूद हो जाएगा बावजुद फजाएल और इसके असाब के
02:23पिससी नहीं है कि हमारे मुझक तालिम होतе है हुम कहते हैं कि जो आहएगर अधिम में फजाएल की तालिम कि ए खुदा की तानि माल्का की तौन लेहा कह अधम हुआतेrim की अध़ीम कहने कि चाहते III
02:53और मुल्क उनुलमा के फतावा से इस्तिफादा भी करता है और मसाइमें से रुजू भी करता है
03:01अज़ा जजाए खेड़ दे हमारे मुफ्ती शपीर साब शाही के एक बहुत अहम मफशरा चल रहा था
03:12किसी मसले पर पहस हो रही थी वो से मशगूल और वहीं सदर और वहीं अहम प्रुकिन थे मशरे के और मुतमर के
03:20इतने में एक प्रुक्त पहने वे आदमी बाल बिख रहे हुए अंदर दाखिल हो गया
03:26कि जी मुझे मसला पूछना है उसकी साफ फोरण उठे सब छोड़कर आहाम अमूर पर बाह चल रही थी और दलाइल का जो है
03:40मुझा हो रहा है और हरे कभी जरी पेशकर रहा है और यह खड़े होए फोरण उसके पास गए और उसकी बास सुनी उसका मसला काने लागी
03:47मैं समझता हूं मैं समझता हूं कि किसी आलिम का किसी आलिम का अवान की जरूरत से के मकाबले में उसके अंदर जो है किसे असरों तरफ़ प्यदा हो जाना आपको बरहने लगए आप श्यक्रुब्रादीस है आप श्यक्रु तफसियर है आप मु�fti आजम है आप किस भी है
04:17के इस्तिफ़ता या एक आदमी के सवाल ने आपको अपने काम उनकी वज़े से उसको मसला बताने में आपके अंदर तरफों पेदा हो जाना इस चीज नबुवत में बहुत मजबूम हैं मैं बहुत आहम बातर्स करना हूँ
04:32यस उसकी करता हैं मुझ्य इसकी कोई गुझायश नहीं मिलती कि ये काम आपके करने का नहीं है ये काम इंके करने का है यकाम बहुत कीची आप बहुत कीज़र्शिए सक्लिव कर
04:55और आगे की चीज़े बियान की जा रही है जिसको हम जवायत कह सकते हैं
04:59जिसको हम जवायत कह सकते हैं कि आगे की चीज़े बताई जा रही है
05:01इस दर्मियान में एक शल बसी के दर्माज़े पर आकर कहता है
05:05और में आपने लिए दिने या रसुल लाह। मुझे लिए दीन सीखला है।
05:08आप सिल्वाइस से लिए खौड़ के निम्बर से उत्रे।
05:10से लिए आप उसके पास गए।
05:12कि अपके लिए पुर्स लाए गए जिसके पाए लोहे के थे आप उस पर बेटे।
05:16बेटे, और बेटकर उस एक दिहाती को आपनी इसलम के फराइज सिखलाएं, आपने क्यों किया रही है, क्या मुस्त था आपनी से, आप अपनी किसी साहभी के हमाले सो करते हैं, भाई फ़लानी तुम ज़रा उसको सिखला लो, उसमें स्यदों कुलाई बेटे हुए हैं, अब �
05:46कि इन आवाम को नजर अंदाज मत कर देना, इस पर मुझे इमाम माली की बात याद आ रही है, जो उसको परे गई थी, इमाम माली ने ये कहा था, खजीबा से, खजीबा ने ये कहा थे, कि आपने पास से, मैं मैं आउंगा, बेटूंगा हलके में, और मैं पढ़ूंगा कित
06:16सही, आपके हलके में, मगर मैं जब पढ़ूं तो पर आपके जो आवाम बेटी हुए, इनको अलग कर दीजा हलके से, मैं अगर के नहीं, हमारे आवाम विल्मा के हलकों सा अलग नहीं होते, तो मैं ने अर्श किया कि आप से इसकी तालिम दिये, ने इसकी आसा मिशाल पेश
06:46साथी का दिश्रक पर हादसा हो गया है, और सिरंट पर फतनाक हो आए, वो आगया है, एमर्जनसी कैसे, दाक्तर से मरीज कहता है, आप जाई जाई जाई उससे देखिए, मेरा को यह बसना नहीं है, मैं तो बादिन कर लोगा, दाक्तर मरीज से कहता है, कि देखे जी मैं आ�
07:16है भी जिसको कलमे के अथष़ आख भालू है, जैसे नमाज के साफ़ी जीखबर नहीं है,। कि तो साल की जाईन नहीं आगे बताया, कि मंस्जित में 40 निकाह पड़ायी के निकाह बगए इसमुन के बखर रिखायाँ कर देखिए, अम तो इसमाराadem कर रहा है, आक सउमरानी
07:46यह तो खामकर किसी ने शोचे छोड़ दिया
07:49कि अवाम को सिकलाओ दीन, खुलामा को क्या निकालना
07:51अफसोचि हाँ, मेरे नज्दीक
07:52उलेमा का खुरूज आवाम से ज्यादा जरूरी है
07:54यह आवा कर जाते में निकलें
07:58और नफर करें
07:59और नफर करके अवान के जहल का खुद मुशायदा करें
08:02कुरान हदीस में वाज़ है
08:06कुरान हदीस में वाज़ है
08:09कि अलमा जब तक खुछ जाकर
08:11अवान के जहल का मौाइना नहीं करेंगे
08:13उस वड़ तक वो गम और कैफियत
08:14और वो गुसा नहीं बेदा होगा
08:17जो इनकिलाब ला सके
08:19कुरान है कि अवान जब तक खुछ जाएंगे
08:26कि अलमा की जमाद में से एक खुछ जाहिए
08:31यह नफर पिताल के लिए नहीं है
08:34इस नफर के साथ खुछ तालिम का और तफको का लव जड़ जड़ा हुआ है
08:38इस तर ज़गोर करें
08:41और यह मज़धार बात है
08:43कि राजय तफिर यह है
08:45है अलमा मैं तुसको नफर करके लिखा है नीचे आशे में
08:48कि राजय तफिर यह है
08:49कि अलमा नफर करें
08:50और अवान के जहल के खुछ मुशायदा करें
08:52मैं कहता हूँ तुझे घर बेठे
08:54अगर मालू हो जाए कि पंजाब इत्राद आगया
09:13जबके आपको माली होना चाहिए
09:15सईर वायद मिश्काशिव कि रहा है
09:17अल्लाए ताएला मुसा अल्ही सलम को खुद फर्मा रहे हैं
09:20जो बिला रहें बिला शक कुश्रुबा
09:22कलाम था अल्लाए ता और रखी है
09:24कि मुसा तुमारी कौम तुमारी पीछे गुमरा हो गई है
09:26और बश्रुद की पुजाबर जमा हो गई है
09:32आप फर्मा रहें सहाबा से
09:34कि मुसा अल्ही सलम में जो गमर गुस्वा प्यदा हुआ
09:36वो अल्लाए ताएला के खबर देने से भी नहीं हुआ
09:39सुनिए ना आप
09:41जो वापस गए और जाकर कौम के यहाल देखा
09:43तब मुसा अल्ही सलम को गुस्वा प्यदा हुआ
09:47मैं समझता हूं कि अफसोस और गजब
09:49और कैफित जो प्यदा होई है
09:51वो कौम के इर्तिदाद के मुशाहिदे से होई है
09:53हैला के एल्लाइप शवात पर इसाल ना कौम की रवायते ने लिए लिया उल्लाइप के रवायते आप ने बात शुनुआ है
10:07वी आपके आपको आपके यहाल पर दचाएगा के विजदा ङए को और अश्वार की शुनुआ है
10:22अभी लोगे समझते हुब बारम कुछ निकाला जाकek। या कुछ निकाला जाक Juliet, परहा हुआं है। एक आदमी जकाथ का माघ लेकर पिरे कि मुस्तोय तलाश करें। उसका इनानिया Zकाथ, कुरान कहता है क्या ही ऐ अच्छा थरीखा है।
10:38कुरान गयता है क्या ही अच्छा तरीखा है इंत दूसरे वादिफ नाइमा आई क्या मतलब इसा आम माल लेकर फिर रहे हैं मुस्ताइकिन को तलाश करके उन्हीं घरों में जगात कोंचा रहे हैं
10:49क्या है में बर्ण इसकी इस अमल की ताहरीफ कर रहा है तो बताइए तो सहीं
10:52अगर आदम आदि यूर्म को लेकर भिरे और जोह लाको और मुटत्वीम को तर्श करे तो बताइए तो सहीं
10:58जब वो माज जिसा अल्हा को नफ्रत है जब उसके फुकरा में तख्सीम करने से उसमें ज्याती होती है
11:04जो जो इनम अल्वा की जार्स है निकर आया है और उम्मत की वह उख्रणी जरूरत है
11:08बताईए कि इस मुए तक पहुंचाने से इस इस इल्मे क्या इजाफा क्या कमाल हाना चाहिए
11:11अलागी तरफ से कितने आमदनी होगी इस इल्मक को मत्रफ किया जाए
11:15हम यह रिज्ट आना चाहते हैं
11:18ले हुलमा की नफर वार्काद पर्राण ने इस नफर को तालीम के साथ जिसका गहर एःषा जोड़ा धो
11:25लेलमा सब एक्साद नहिंक लेगा जो करा यह
11:28कर ले Billah
11:30जञाध जर निकले ये निकले ये ये रगी निकले, क्यूूं?
11:34इसलिए कि इुझाद की जिवह ए, रद्रीस है, तालीम है, जिश्थाँ है, ड़ावट है, जमार है, इमाामध है
11:42बहुत सारे काम इुझाद की जिवह ए.
11:43अगर एक बार्गी निकल गए तो अवान के इनकी तालर इनकी आए हुए हैं इनकी तालिप नुखसान होगा उनकी तालिप नुखसान होगा उनकी तालिप नुखसान होगा उनकी तालिप नुखसान होगा उनकी तालिप नुखसान होगा उनकी तालिप नुखसान होगा उनक
12:13आप सभाए आप रुछार रुखाए मुषरी की कोशिश में थे तालिम आया, तलो देंक आलिमनी यह रिसमें आरिमा कि अल्ला में लेगा है, अब्सुर्भी का अब्सृय उस्छव आप को तन्भीः को यह आप की तरफ से आप सा नाजिल होई, यह जो तल्ब लेकर आ रहा ह
12:43कर रहा है, कि तालीम अवदल है या तबलिग अवदल है, महा रिजिए उसका जगा हूं, सबाजी ही मुहमद है, मुहमद सवाल है, जो लोग तफजील के विटे में पढ़ गएंगे, तचाहर उससे बस ने सकेंगे, इसे पढ़ गए, मेरी बात तफित सुना मेर्जमा तवज
13:13तत्रीस में, तालीफ में, तसानीफ में, मुश्गूल हैं, मैं कहता हूँ, उनका उम्मत पर रहसान है, आप ये कहें, ये कोई काम है, नोदो बिल्ला है, वो पदा नहीं कितने किताबों के मुदाले के बाद एक किताब मुरत्ब रहते हैं, हमारे तो कभी वहनुगाब भी ख
13:43का मजमुआ होता है, हम उस सब को नहीं देख सकते हैं, वो हमें एक खुलासा करके हमें पेश कर रहे हैं, जिस अम्मत के मुसनिफीन का तो उम्मत पर रहसान है, इस जमाने के सबसे बड़े मुद्विन, सबसे बड़े मुद्वन है इन हाधिस के, जिस कोई का नाम लेकर, �
14:13खुले हैं उम्मत के लिए, ये अम्मत पर रहसान हैं, और हमें ऐसे अलमा की तसानिफ की जरूरत, और उनकी चादरदानी की हमें जरूरत है, क्या किसी के एक कि एक और लिए इस काम की जिमधारियों में हम इलम और रुलमा से कई मुस्वनी नहीं है, तो मैंनंदी के सबा�
14:43दोनों के जमा करना है यह अफ़ल है यह अफ़ल है यह मुम्मन सवाल है
14:49दोनों के जमा करना है तो कि दोनों के जमा करने का मतलब यह है
14:52कि जो सिखने के लिए आ गए है उनको सिखलाना भी तालीम है
14:55जो नहीं आरे सिर्गर को जारे सिर्गर करना भी ताली में आपना भाम भी ताली में आपना भी ताली में
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