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  • 2 days ago
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00:00इसलाम मलक से जरूर महबब सिखाता है और ये नुपे बाक सालूलाहु आलाही वासल Such अए, उरे कि तरीके से
00:06पता चलता है, जो कि भी जाइज है, और हम भी करते हैं।
00:10तो मुल्क से मुहब्ब, बतन से मुहब्ब, ये इसलामी तरीके से होना चाहिए, ना कि किसी गएर तरीके से, गएर
00:17जुमलों से.
00:47मुसल्मान क्या कर सकता है?
00:48तो मुक्क और वतन से ये फित्री महब्बत जाइज है
00:52मदिना की तरफ हिजरत के मौके पर
00:54रसुल्लाई ने मक्का की तरफ मुखातब होकर ये फरमाया था
01:00एए मक्का तू कितना पाकिजा है और मेरा महबूब है
01:04अगर मक्का वाले मुझे ना निकालते
01:07तो में तुझे चोड़कर कहीं और नहीं रहता
01:10मदिना में हिजरत के बाद
01:13रसुल्लाई ने ये दौा फरमाई
01:25एक रिवायत में है
01:27कि जब रसुल्लाई ने किसी सफर से मदिना की तरफ वापस आते
01:32तो जब मदिना के रास्ते और मकानात नजर आते
01:36तो मदिना की महबत में आप अपनी सवारी को तेजी से दोड़ा दे
01:40एक रिवायत में है
01:42कि जब हज़रत खदीजा रदियल्लाहु अन्हा
01:44अजरिपाक स्वल्लाई ने को लेकर वर्का इबन नौफल के पास पहुचा
01:49वर्का इबन नौफल ने कहा
01:51कि आपकी कौम आपको जुटलाएगी आपको अजियत देगी और आपको इस शहर से निकाल देगी
01:58तो इस पर रसुललाह ऩलाह नी ने मक्कह से जलावत्नी मक्का से निकल देने �材ली बात पर ज्याद़र दुक्क वर
02:06परशानी का इज़ार किया
02:08कि बाकी मुश्किलाद तो सहले जाएंगी
02:10और एपने शहर से निकाल देना इस तकलीफ को सहना बहुत ही मुश्किल होगा
02:28वतन से महब्बत करना जाइज है
02:30और अपनी महब्बत का इजहार के लिए
02:32किसी खास तराना और गाना गाने की जरूरत नहीं
02:36महब्बत तो दिल से होती है
02:38और वो भी ऐसे तराना जो किस सरसर इसलाम के खिलाफ है
02:42इसलामी अगाइद और तालीम के खिलाफ है
02:45इस तरह के अलफास गहना इस तरह के तराना गाना जो बिलकुल इसलाम के खिलाफ हो शरीयत के खिलाफ हो
02:53नाजाइज़ और हराम हो
02:55इस पर अगर हमें मजबूर भी किया जाए तो हमें गवारा नहीं
02:58अल्ला हम सब को सही समझ बूज अता फर्माए और सही रास्ते पर सही अमल करने की तोफिक अता फर्माए
03:05आमीन
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