00:00मिया साल आने के करीब होता है
00:02मुस्लमानों का भी माने जश्न आ जाता है
00:05इसलाम ने इसके बारे में क्या हुक्म दिया है
00:08मिया साल आने पर फशी का इजहार करना ये बेवकूफी है
00:12मुझे घड़ियाल ये देता है मुनादी
00:15गुदों ने घरी उमर की और घटा दी
00:18नहीं साल की आमद पर सहबाए किराम दियाल्लाव माने हम एक दूसरे को ये दूआ दे दे दे थे
00:24इस दूआ के साथ साथ हमें दो काम करना ज़रूरी है
00:28एक माज़िका इहक्तिसाब और दूसरा आइंदा का लाइहाई आमल
00:33अमीद है आप सब खेलियत से होंगे
00:44आज हम एक बहुत ही अहम मुद्दे पर बात करेंगे
00:49हम देखते हैं कि जब जब नया साल आने के करीब होता है
00:54तो गएर मुस्लिमों के साथ साथ मुस्लमानों का भी मानो जश्न आ जाता है
01:00और नये साल और नयू एर को बहुत ही अहम जश्न मान कर उसे सिल्बेट किया जाता है
01:08आला कि ये कोई इसलामिक तहवार तो नहीं ये कोई मुस्लमानों का जश्न तो नहीं
01:16लेकिन फिर भी मुस्लमान के नौजवान इसको बड़ी धोन धाम से मनाते हैं
01:22और नयू एर या नया साल के नाम से हजारों खुराफाद और हराम कामों में मश्कूल हो जाते हैं
01:30ज़रा ये नहीं सोचते कि हमारे इसलाम ने इसके बारे में क्या हुक्म दिया है
01:36अल्ला और इसके रसूल इस पर माराज होंगे या खुशी हमें इससे कोई लेना देना नहीं है
01:43क्योंकि हम अपने दीन को छोड़ रखा है
01:46इसलिए गईरुक का दीन गईरुक का तरीका हमें फसंद आता है
01:51आलांकि इस जिस से तहवार सरासर हराम और नाजाइस होता है
01:57आप इसका जाइजा लेकर देखिए
02:00कि इसमें कोई भी ऐसा काम शरीयत के मुआफिक नहीं मिले
02:05इसमें हराम और नाजाइस काम जरूर हो
02:16लेकिन हम माने तबना
02:18ये तहवार गेरों का तहवार है
02:22और गेरों की मुशाबहत अख्यार करना
02:24उनके तरीकों पर चलना
02:26उन जैसाब बनने की कोशिश करना
02:29ये सरासर नाजाइस और अहराम है
02:32उनके रसुलिए अकरम ﷺ ने इर्शाद फर्माया
02:36जो कोई शक्स इसे घर कौम की मुशाबहत अख्यार करे
02:44तो वो उनहीं में से होगा
02:46यानि अगर कोई मुस्लिमान इसे घर मुस्लिम का तरीका अपनाने की कोशिश करे
02:52उनके तरीकों को अपना ले
02:55उनके तरीकों पर चले
02:57और उन जैसाब बनने की कोशिश करे
02:59तो वो उन्हीं जैसा होगा
03:01और कियामत में भी उन्हीं के साथ गोठाया जाएगा
03:05और उन्हीं जैसा इसका हश्र होगा
03:08ल्ला हम सब को हिफाज़त परमाए आमी
03:11दोस्तो नया साल आने पर फशी का इजहार करना
03:16ये अकलमंदी नहीं ये बेवफूफी है
03:20क्योंके जरा सोचिए कि साल आने पर हमारे उमर घटी है
03:25हमारे जिन्दगी छोटी होती चली जाती है
03:28और हमने पिछले जिन्दगी में क्या किया है
03:32कितना नुकसाम किया है
03:34हमारे जिद्दी भी उमर है
03:36उमें से एक साल कम हो गया
03:39और हमें इस पर कोई अफसोस भी नहीं होता
03:42किसी शायर ने क्या है फूब कहा है
03:45गाफिल तुझे घड़ियाल ये देता है मुनादी
03:49ये दोने घड़ी उमर की और घटा दी
03:53मतलब ये है कि तू गफलत में पड़ा है
03:57और वक्त चला जा रहा है
03:59घड़ी चलती रहती है
04:00और ये आवाज देती है
04:02कि तेरा वक्त गज़र रहा है
04:04हालां कि तू गफलत में पड़ा है
04:07और तेरा वक्त घड़ते जा रहा है
04:10जिन्दगी घड़ती जा रही है
04:12तो दोस्तो नए साल की आमद पर
04:15मसल्मानों के लिए खुशिया मनाना
04:18जश्न मनाना
04:19और तहवार की तरह मनाना
04:21ये सब नाजाइस और हराम है
04:23हमें इससे बचना चाही
04:25हमारी ये कमजूरी है
04:27कि हमको अपने मजभ पर आमल करना
04:29हमें पसंद नहीं
04:31भोस्तों के तरीका हमें पसंद आता है
04:33अगर इसे नौजवान भाई से
04:36ये पूछ लिया जाए
04:37कि बताओ बारा अरबी महिने
04:40का नाम क्या क्या है
04:41अभी फिलहाल कौन सा महीना चल रहा है
04:44कौन सी तारीख है
04:46लेकिन बता नहीं पाए
04:48हमारी तो जल्मेदारी थी
04:50कि हम अरबी महीने को
04:52अपना महीना मानी
04:53और इसकी तारीख का हमें
04:55ख़दर हो
04:56लेकिन हमें इसमें कोई दिल्चस्प नहीं है
04:59जो भी हो
05:00हमें इंखुराफात और हराम
05:02नाजाइस कामों से बचना चाहिए
05:04इस जैसे तहवार
05:06बहुत से नाजाइस
05:08और हराम कामों की वज़ा से
05:10जैसा जशन भी हराम हो जाता है
05:13जैसे गाना बजाना
05:15नाचना
05:16और बेपर्दा लड़की और अरदों से मेल जूल रखना
05:20इसे मदाब करना
05:22शराब गेना
05:23और भेफुजूर खर्च करना
05:25और गाना बजा कर लेजे बजा कर
05:28मूने को तरेशान करना
05:30और उनको तक्लीफ देना ये भी बहुत बड़ा गुणा है
05:33आला हम सब को इन से हिवाज़त फरमाए
05:36लेकिन फिर भी एक सवाल रहता है
05:39इस जेसे मुंखे पर मुस्लमानों को क्या करना चाहिए
05:43मुस्लमानों को क्या रवेया अख्तियार करना चाहिए
05:46तो याद रखियागा कि नए साल की आमद पर पुरान और हदीस के रोशने में कोई जशन और गारा तो नहीं है
05:54लेकि एक बात जरूर मिलती है
05:56तो नए साल की आमद पर सहाब एक्राम अजमाई एक दूसरे को यह दूआ देते थे
06:04लौहूमा अदुखिल हुआ अलईना बिलाम्नि वलाईमान वस्सलामाई वर्जवानि मिल्रुह्माई वाजिवाजि मिन श्शेयतान
06:15ए आल्ला इस नहीं साल को हमारे उपर अम उमान और सलामती और अपने वज़ामन और श्यतान से तणाह विसाब दाखिए फर्मा
06:27हम ये दूआ पढ़ सकते हैं
06:30जिसमें कोई हरच की बात नहीं है
06:32बाकी जो खुराफात होती हैं
06:35उन सबसे हमें बचना जरूरी है
06:37इस दूआ के साथ साथ
06:38हमें दो काम करना जरूरी है
06:41एक माज़ी का इहतिसाब
06:44और दूसरा आइंदा का लाइहाई अमल
06:47माज़ी का इहतिसाब
06:49नहीं गुजरे गए जमाने में
06:52माज़ी में हमने क्या किया
06:53हमारी इतने जिन्दगी गुजर गई
06:56हमारी इतने अमर गुजर गई
06:58इतना वक्त गुजर गया
06:59तो हमने क्या किया
07:01हमारी जिन्दगी
07:03शरीयत के खिलाब गुजरी
07:05हमें कितने अबादत ने की
07:07हमें अपना वक्त सही काम पर लगाया
07:10ये खलत काम पर
07:12हमें कितना हराम और हलाल के दर्में फर्क किया
07:16मौत फिबाद के जिन्दगी के लिए
07:19हमें कितनी तैयारी की है
07:21इसका मुहासबा लेना चाहिए
07:23हिसाब लेना चाहिए
07:25रसुल आप अन्फुसकों गुबला अन्तु हैसबू
07:32कि तुम इतनी जन्दवी का हिसाब लो
07:35इस से पहले कि तुम्हारा हिसाब लिया जाए
07:38नहीं मौत से पहले हमें अपना हिसाब लेना चाहिए
07:42अपना मुहासबा करना चाहिए
07:44मौत का वक्त आ जाने पर इसी का कोई बहाना नहीं चले
07:49जरासा भी वक्त उसको ज्यादा नहीं दिया जाए
07:53उस वक्त अबसोस के अलावा हम कुछ कर भी नहीं सकेंगे
07:57इसमें जब तक हमारे जन्दगी है
07:59जब तक हम दुन्या में हैं
08:02उसी वक्त को अच्छे कामों में सक्ट करना जरूरी है
08:06यह हमारे लिए ही फायदा मत है
08:08खुद इहतिसाबी के बाद दूसरा काम जो हमें करना है
08:13तो है लाईहाय अमल
08:15यहनि अमल को सही करने की तोयारी
08:18और उस पर मिहनत करने की कोशश करना
08:21दोस्व की गलती को देखने के बजाए
08:24अगर अपनी गलती को देखकर उसको सुधारने की कोशश करे
08:28उसको बदलने की कोशश करे
08:30तो यह अपने ही लिए पाइदा मन्द होगा
08:33रसुलिल्ला सुल्लाव अलिह वसलम में इस शाद फर्माया
08:37अबतनिं खंसन कबल खंसन
08:40शबाबका कबल हरम
08:42वसिहतका कबल सक्र
08:45वविनाका कबल फक्र
08:47वफराबका कबल शुबल
08:50वख्यातका कबल मौत
08:53अपने जवानी को गरीमत समझो
08:55प्रहापे आने से पहले
08:59अपने सिहत को प्रहापे आने से पहले
09:04अपने माल को गनीमत समझो
09:07अक रुफाका आने से पहले
09:09वरीबी आने से पहले
09:11अपने वक्त को गनीमत समझो
09:14मुश्बूलियत आने से पहले
09:16अपने जिन्देगी को गनीमत समझो
09:19मौत आने से पहले
09:21उल्मा का कहना है
09:23कि अगर कोई इस हदीश पर अमल कर ली
09:25तो कामयाब हो जाए
09:27तो आए ये दोस्तु
09:28हम गार मुस्मों कह त्रिका
09:31एक्टियार करने के बजाए
09:33अपने त्रिके पर चले
09:34अपने मिबी suppressionों
09:37अपना आएं
09:39सुन्म्म्स को अपनाएं
09:41और मुसल मुहर मत परें
09:42और अपनी मोत के बाद के जिरें
09:45में पसंवारने की कोशिश करें
09:47लुदा तबारकों ताला हम सब को
09:49सही रास्ते पर चलने की पुफिक अदा फरमाएं
09:53आमें
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