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  • 1 week ago
New Year / Naya Saal | Islam Kya Kehta Hai?
नया साल / नववर्ष: इस्लाम क्या कहता है?
Muslims vs New Year | New Year Celebration in Islam | Is It Allowed?
نیا سال: اسلام کیا کہتا ہے؟ | New Year Celebration in Islam
নববর্ষ / নিউ ইয়ার: ইসলাম কী বলে? | New Year in Islam
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🔴 DESCRIPTION
📌 Description
In this video, we explain New Year in Islam, New Year celebration in Islam, and whether New Year Eve, January 1, 31 December night, New Year party, countdown and fireworks are allowed or not.
Many Muslims ask:
Is New Year allowed in Islam? Is New Year halal or haram?
This video clearly explains the Islamic ruling on New Year celebration and Muslims vs New Year celebrations in the light of Islamic teachings.
📌 Description
इस वीडियो में बताया गया है कि नया साल / नववर्ष मनाना इस्लाम में जायज़ है या नहीं।
क्या मुसलमानों को New Year, नया साल, नववर्ष, 31 दिसंबर, New Year Eve, पार्टी और आतिशबाज़ी मनानी चाहिए?
नया साल इस्लाम में, New Year celebration halal या haram, और इस्लाम क्या कहता है नए साल के बारे में — सब कुछ आसान भाषा में समझाया गया है।
📌 Description
اس ویڈیو میں وضاحت کی گئی ہے کہ نیا سال / جشنِ نیا سال اسلام میں جائز ہے یا نہیں۔
کیا مسلمانوں کو New Year، نیا سال، 31 دسمبر، New Year Eve، پارٹی اور آتش بازی منانی چاہیے؟
New Year in Islam, Is New Year halal or haram, اور اسلامی نقطۂ نظر سے نیا سال اس ویڈیو میں بیان کیا گیا ہے۔
📌 Description
এই ভিডিওতে ব্যাখ্যা করা হয়েছে নববর্ষ / নতুন বছর / নিউ ইয়ার উদযাপন ইসলামে জায়েজ কি না।
মুসলমানদের কি New Year, নববর্ষ, New Year Eve, 31 December, party, fireworks পালন করা উচিত?
New Year in Islam, নববর্ষ ইসলামে, এবং নতুন বছর সম্পর্কে ইসলামের দৃষ্টিভঙ্গি এখানে সহজভাবে তুলে ধরা হয়েছে।
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Transcript
00:00मिया साल आने के करीब होता है
00:02मुस्लमानों का भी माने जश्न आ जाता है
00:05इसलाम ने इसके बारे में क्या हुक्म दिया है
00:08मिया साल आने पर फशी का इजहार करना ये बेवकूफी है
00:12मुझे घड़ियाल ये देता है मुनादी
00:15गुदों ने घरी उमर की और घटा दी
00:18नहीं साल की आमद पर सहबाए किराम दियाल्लाव माने हम एक दूसरे को ये दूआ दे दे दे थे
00:24इस दूआ के साथ साथ हमें दो काम करना ज़रूरी है
00:28एक माज़िका इहक्तिसाब और दूसरा आइंदा का लाइहाई आमल
00:33अमीद है आप सब खेलियत से होंगे
00:44आज हम एक बहुत ही अहम मुद्दे पर बात करेंगे
00:49हम देखते हैं कि जब जब नया साल आने के करीब होता है
00:54तो गएर मुस्लिमों के साथ साथ मुस्लमानों का भी मानो जश्न आ जाता है
01:00और नये साल और नयू एर को बहुत ही अहम जश्न मान कर उसे सिल्बेट किया जाता है
01:08आला कि ये कोई इसलामिक तहवार तो नहीं ये कोई मुस्लमानों का जश्न तो नहीं
01:16लेकिन फिर भी मुस्लमान के नौजवान इसको बड़ी धोन धाम से मनाते हैं
01:22और नयू एर या नया साल के नाम से हजारों खुराफाद और हराम कामों में मश्कूल हो जाते हैं
01:30ज़रा ये नहीं सोचते कि हमारे इसलाम ने इसके बारे में क्या हुक्म दिया है
01:36अल्ला और इसके रसूल इस पर माराज होंगे या खुशी हमें इससे कोई लेना देना नहीं है
01:43क्योंकि हम अपने दीन को छोड़ रखा है
01:46इसलिए गईरुक का दीन गईरुक का तरीका हमें फसंद आता है
01:51आलांकि इस जिस से तहवार सरासर हराम और नाजाइस होता है
01:57आप इसका जाइजा लेकर देखिए
02:00कि इसमें कोई भी ऐसा काम शरीयत के मुआफिक नहीं मिले
02:05इसमें हराम और नाजाइस काम जरूर हो
02:16लेकिन हम माने तबना
02:18ये तहवार गेरों का तहवार है
02:22और गेरों की मुशाबहत अख्यार करना
02:24उनके तरीकों पर चलना
02:26उन जैसाब बनने की कोशिश करना
02:29ये सरासर नाजाइस और अहराम है
02:32उनके रसुलिए अकरम ﷺ ने इर्शाद फर्माया
02:36जो कोई शक्स इसे घर कौम की मुशाबहत अख्यार करे
02:44तो वो उनहीं में से होगा
02:46यानि अगर कोई मुस्लिमान इसे घर मुस्लिम का तरीका अपनाने की कोशिश करे
02:52उनके तरीकों को अपना ले
02:55उनके तरीकों पर चले
02:57और उन जैसाब बनने की कोशिश करे
02:59तो वो उन्हीं जैसा होगा
03:01और कियामत में भी उन्हीं के साथ गोठाया जाएगा
03:05और उन्हीं जैसा इसका हश्र होगा
03:08ल्ला हम सब को हिफाज़त परमाए आमी
03:11दोस्तो नया साल आने पर फशी का इजहार करना
03:16ये अकलमंदी नहीं ये बेवफूफी है
03:20क्योंके जरा सोचिए कि साल आने पर हमारे उमर घटी है
03:25हमारे जिन्दगी छोटी होती चली जाती है
03:28और हमने पिछले जिन्दगी में क्या किया है
03:32कितना नुकसाम किया है
03:34हमारे जिद्दी भी उमर है
03:36उमें से एक साल कम हो गया
03:39और हमें इस पर कोई अफसोस भी नहीं होता
03:42किसी शायर ने क्या है फूब कहा है
03:45गाफिल तुझे घड़ियाल ये देता है मुनादी
03:49ये दोने घड़ी उमर की और घटा दी
03:53मतलब ये है कि तू गफलत में पड़ा है
03:57और वक्त चला जा रहा है
03:59घड़ी चलती रहती है
04:00और ये आवाज देती है
04:02कि तेरा वक्त गज़र रहा है
04:04हालां कि तू गफलत में पड़ा है
04:07और तेरा वक्त घड़ते जा रहा है
04:10जिन्दगी घड़ती जा रही है
04:12तो दोस्तो नए साल की आमद पर
04:15मसल्मानों के लिए खुशिया मनाना
04:18जश्न मनाना
04:19और तहवार की तरह मनाना
04:21ये सब नाजाइस और हराम है
04:23हमें इससे बचना चाही
04:25हमारी ये कमजूरी है
04:27कि हमको अपने मजभ पर आमल करना
04:29हमें पसंद नहीं
04:31भोस्तों के तरीका हमें पसंद आता है
04:33अगर इसे नौजवान भाई से
04:36ये पूछ लिया जाए
04:37कि बताओ बारा अरबी महिने
04:40का नाम क्या क्या है
04:41अभी फिलहाल कौन सा महीना चल रहा है
04:44कौन सी तारीख है
04:46लेकिन बता नहीं पाए
04:48हमारी तो जल्मेदारी थी
04:50कि हम अरबी महीने को
04:52अपना महीना मानी
04:53और इसकी तारीख का हमें
04:55ख़दर हो
04:56लेकिन हमें इसमें कोई दिल्चस्प नहीं है
04:59जो भी हो
05:00हमें इंखुराफात और हराम
05:02नाजाइस कामों से बचना चाहिए
05:04इस जैसे तहवार
05:06बहुत से नाजाइस
05:08और हराम कामों की वज़ा से
05:10जैसा जशन भी हराम हो जाता है
05:13जैसे गाना बजाना
05:15नाचना
05:16और बेपर्दा लड़की और अरदों से मेल जूल रखना
05:20इसे मदाब करना
05:22शराब गेना
05:23और भेफुजूर खर्च करना
05:25और गाना बजा कर लेजे बजा कर
05:28मूने को तरेशान करना
05:30और उनको तक्लीफ देना ये भी बहुत बड़ा गुणा है
05:33आला हम सब को इन से हिवाज़त फरमाए
05:36लेकिन फिर भी एक सवाल रहता है
05:39इस जेसे मुंखे पर मुस्लमानों को क्या करना चाहिए
05:43मुस्लमानों को क्या रवेया अख्तियार करना चाहिए
05:46तो याद रखियागा कि नए साल की आमद पर पुरान और हदीस के रोशने में कोई जशन और गारा तो नहीं है
05:54लेकि एक बात जरूर मिलती है
05:56तो नए साल की आमद पर सहाब एक्राम अजमाई एक दूसरे को यह दूआ देते थे
06:04लौहूमा अदुखिल हुआ अलईना बिलाम्नि वलाईमान वस्सलामाई वर्जवानि मिल्रुह्माई वाजिवाजि मिन श्शेयतान
06:15ए आल्ला इस नहीं साल को हमारे उपर अम उमान और सलामती और अपने वज़ामन और श्यतान से तणाह विसाब दाखिए फर्मा
06:27हम ये दूआ पढ़ सकते हैं
06:30जिसमें कोई हरच की बात नहीं है
06:32बाकी जो खुराफात होती हैं
06:35उन सबसे हमें बचना जरूरी है
06:37इस दूआ के साथ साथ
06:38हमें दो काम करना जरूरी है
06:41एक माज़ी का इहतिसाब
06:44और दूसरा आइंदा का लाइहाई अमल
06:47माज़ी का इहतिसाब
06:49नहीं गुजरे गए जमाने में
06:52माज़ी में हमने क्या किया
06:53हमारी इतने जिन्दगी गुजर गई
06:56हमारी इतने अमर गुजर गई
06:58इतना वक्त गुजर गया
06:59तो हमने क्या किया
07:01हमारी जिन्दगी
07:03शरीयत के खिलाब गुजरी
07:05हमें कितने अबादत ने की
07:07हमें अपना वक्त सही काम पर लगाया
07:10ये खलत काम पर
07:12हमें कितना हराम और हलाल के दर्में फर्क किया
07:16मौत फिबाद के जिन्दगी के लिए
07:19हमें कितनी तैयारी की है
07:21इसका मुहासबा लेना चाहिए
07:23हिसाब लेना चाहिए
07:25रसुल आप अन्फुसकों गुबला अन्तु हैसबू
07:32कि तुम इतनी जन्दवी का हिसाब लो
07:35इस से पहले कि तुम्हारा हिसाब लिया जाए
07:38नहीं मौत से पहले हमें अपना हिसाब लेना चाहिए
07:42अपना मुहासबा करना चाहिए
07:44मौत का वक्त आ जाने पर इसी का कोई बहाना नहीं चले
07:49जरासा भी वक्त उसको ज्यादा नहीं दिया जाए
07:53उस वक्त अबसोस के अलावा हम कुछ कर भी नहीं सकेंगे
07:57इसमें जब तक हमारे जन्दगी है
07:59जब तक हम दुन्या में हैं
08:02उसी वक्त को अच्छे कामों में सक्ट करना जरूरी है
08:06यह हमारे लिए ही फायदा मत है
08:08खुद इहतिसाबी के बाद दूसरा काम जो हमें करना है
08:13तो है लाईहाय अमल
08:15यहनि अमल को सही करने की तोयारी
08:18और उस पर मिहनत करने की कोशश करना
08:21दोस्व की गलती को देखने के बजाए
08:24अगर अपनी गलती को देखकर उसको सुधारने की कोशश करे
08:28उसको बदलने की कोशश करे
08:30तो यह अपने ही लिए पाइदा मन्द होगा
08:33रसुलिल्ला सुल्लाव अलिह वसलम में इस शाद फर्माया
08:37अबतनिं खंसन कबल खंसन
08:40शबाबका कबल हरम
08:42वसिहतका कबल सक्र
08:45वविनाका कबल फक्र
08:47वफराबका कबल शुबल
08:50वख्यातका कबल मौत
08:53अपने जवानी को गरीमत समझो
08:55प्रहापे आने से पहले
08:59अपने सिहत को प्रहापे आने से पहले
09:04अपने माल को गनीमत समझो
09:07अक रुफाका आने से पहले
09:09वरीबी आने से पहले
09:11अपने वक्त को गनीमत समझो
09:14मुश्बूलियत आने से पहले
09:16अपने जिन्देगी को गनीमत समझो
09:19मौत आने से पहले
09:21उल्मा का कहना है
09:23कि अगर कोई इस हदीश पर अमल कर ली
09:25तो कामयाब हो जाए
09:27तो आए ये दोस्तु
09:28हम गार मुस्मों कह त्रिका
09:31एक्टियार करने के बजाए
09:33अपने त्रिके पर चले
09:34अपने मिबी suppressionों
09:37अपना आएं
09:39सुन्म्म्स को अपनाएं
09:41और मुसल मुहर मत परें
09:42और अपनी मोत के बाद के जिरें
09:45में पसंवारने की कोशिश करें
09:47लुदा तबारकों ताला हम सब को
09:49सही रास्ते पर चलने की पुफिक अदा फरमाएं
09:53आमें
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