00:00ने जाने कब किसने ये कहा था पर जिन्होंने भी ये कह दिया उन्होंने कुछ ऐसा काम कर दिया कि
00:06यहां वैशे बैठे हों उधर शूद्र बैठे हों इधर महिलाएं बैठी हों वो आज भी उनके कथन का दंश भुगत
00:16रहे हैं अब बोलो उस कथन से लड़ू की नहीं लड�
00:29थी पर उस बात ने आज भी भारत के दसियों करोड लोगों को जकड रखा है कितनी उसमें ताकत है
00:39और उससे लड़ना कितना जरूरी है उस पेड़ पे चड़ो उस नदी में कुदो फलाने दिन इस तरह कि यात्रा
00:47निकाल दो ऐसा तिलक लगाओ ऐसे सिंदूर पहनो ये व
00:59दही में गन्य का अरस मिला के इमली के पत्ते पर रखके जामुन का तड़का लगा के पता नहीं और
01:09क्या करते हूं बताओ ना जैसे आप इस खतरना के आत्रा पर निकले थे मेरी और आने के लिए कल
01:16या आज तो घरवालों ने आपको क्या-क्या गंडे ताभीश बांद के �
01:19भीजे कि सीधे जा रहे हो तुम राक्षस के पास मौत के मूँ में मेरा पिया सही सलामत घर वापस
01:30आ जाए वो दुराचार कहीं कोई टोना ना कर दे इसके उपर पक्का पता अधी सबकी जेब जाड़ी जाए तो
01:42दो चार के तो नीबू मिर्च गिरेगी गिरेगी
01:47निकलते हुए अम्मा ने पीछे से डाल दी थी ऐसा ऐसा करना ही तो धर्म है बाबाजी के बारे में
01:55ऐसी बाते नहीं सोचते ये भी कर्मकांड का हिस्सा है क्योंकि विचार भी तो कर्म होता है ना विचार भी
02:02तो कर्म होता है नहीं नहीं नहीं ऐसे मत वरे धर्म गुरु �
02:06तो देधा होता है, उसके बारे में ऐसे सवाल नहीं करतें।
02:08और ऐसा सवाल तुमने किया तो अभी सवाल तुम्हारी आत्मा से चिपक जाएगा,
02:13तब तक चिपक रहेगा इतनी लाख यूनिया हैं,
02:17तब तक चिपका रहेगा जब तक तुम पूर्ण प्राइश्चित नहीं कर लेते
02:21और पूर्ण प्राइश्चित कैसे करोगे
02:24सोने की एक बिल्ली बनवाओ
02:27और पंडे जी को दान कर दो
02:30इससे तुम्हारी कर्म शुद्धी हो जाएगी
02:33किस-किस ने करा इस तरह का दान हो गयरा
02:36इल्दी हाथ खड़ा करो अच्छे से
02:40कर दो
02:43फोटो लो और फोन करने डोनेशन के लिए सब को
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