Skip to playerSkip to main content
🧔🏻‍♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें:
https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita-course?cmId=m00021

📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं?
फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021
➖➖➖➖➖➖
यह वीडियो 18.07.2026 को आयोजित "बोध प्रत्यूषा" सत्र से लिया गया है।

वीडियो जानकारी : 18.07.2026, "बोध प्रत्यूषा" सत्र

➖➖➖➖➖➖
#acharyaprashant #आचार्यप्रशांत #LifeTruth #PurposeOfLife #TimePass #SelfAwareness #BhagavadGita #GitaWisdom #Vedanta #Spirituality #MeaningOfLife #WakeUp #LifeLessons #HindiShorts #SpiritualShorts

Category

📚
Learning
Transcript
00:00किस किस ने कई बार ऐसा हुआ है कि रात में कहा है कि आज दिन पूरा चला कहां गया
00:05थकान तो पूरी है पर दिन गया कहां ये तो पता ही नहीं ये कितनी खौफनाग बात है ये कितनी
00:12खौफनाग बात है और उसके बाद भी कई लोग कहते हैं चल टाइम पास करते हैं तुमार
00:29तो जितनी ज़्यादा होगी, आसो इधा उतनी ज़्यादा है, कि लिखिए, बताइए, क्या उखाड़ा जिन्दगी में, इसलिए उतनी शद बोलते
00:40हैं, कृता मसमर, कि या क्या आए जिन्दगी में, कुछ नहीं मिलेगा, जिनकी उम्र हो गई, कहते हैं, अब तो
00:46उम्र हो ग
01:00अचारे जी, all leading to nothing, बहुत कुछ, बहुत कुछ, जिसका कोई अर्थ नहीं, कोई अर्थ नहीं, जो लोग गणित
01:08की तरफ से हैं, कभी हुआ है कि सामने एक जटिल सी समस्या है, और पांच या आठ या दस
01:15पन्ने आप कलम घिस रहे हैं, एक equation, दूसरी equation, आठ equations निकाल दी, और �
01:21उससे अंत में क्या निकला, कुछ भी नहीं, किसके साथ हुआ है, यही जिन्दगी है हमारी, जो लोग खाना बनाना
01:29सीखते हैं, नया नया, किसके साथ हुआ है, कि पांसाद घंटे लगा करके, और अठारा बीस प्रकार के उसमें तत्व
01:37डाल कर, नगाने क्या-क्या उबाल
01:41पकाया, जमाया, मिलाया और बना उसमें से कुछ किसके साथ हुआ है, वो जिन्दगी है, चले इतना पहुँचे कहीं नहीं,
01:54उम्र का कुल सार क्या है, एक ठकी हुई ठकान, एक सार्थक ठकान भी होती है, वो नीद देती है,
02:03ऐसा चले थे कि मन्जिल पर पहुँच गए, ब
02:09खकी हुई ठकान, जिसमें जितना ठकते हो, नीद उतनी उड़ती जाती है, क्योंकि पता है, अब सिर्फ ठक रहे हो,
02:16कहीं पहुच नहीं हो, किस-किस को अनभव हुआ है, ठकान इतनी ज्यादा भी हो जाती है, कि ठकान के
02:22कारण ही नीद नहीं आ रही, वो जिन्दगी है, व
Comments

Recommended