00:00हमारे समाज में पुरुषों के लेकर एक छवी बन गई कि मर्द को दर्थ नहीं होता वैसे करके समाज जैसा
00:05क्यों छवी बनाया रखने जाते हैं
00:10उसको कोमलांगिनी कैसे बनाया जाएगा और जब कठोर कोमल से मिलता है तभी चंगारियां उड़ती है इस्तरी को तो बना
00:20दिया कि भावनाओं का पुतला है और पट से रोपड़ती है उसके बुद्धी तो ही नहीं बस भावना है पुरुष
00:25बहुत दुलार के साथ बोलते ह
00:28क्या करे इस्तरी का भावक्चित या ऐसे क्या करे इस्तरी की बुद्धी बुद्धी तो होती नहीं या होती भी है
00:36तो बुद्धी से तो काम करती नहीं इस्तरी है ना भावना पे चलती है तो इस्तरी को बना दो कि
00:42उसके बुद्धी है नहीं या बुद्धी तो काम नहीं क
01:03स्थ्रियान भी बना दिया लेकिन लोक संस्कृति ने उनको एक अलग स्पीशीज और उनको जितना उस अति पर रखना
01:18पुरुष को फिर उतना ही विपरीत अति पर रखना पड़ेगा तो एक स्क्रिप्ट रची गई है जिसके आधार में ही
01:25अंधेरा है
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