00:00आँखों के लिए आप एक युवा पुरुश हैं, आँखों के लिए सामने कोई स्तरी बैठी हुई है, पर अहंकार के
00:08लिए कहानी यहां खत्म नहीं होती, शुरू होती है, अहंकार कहता है वो स्तरी है, फिर मुझे मिलेगी, फिर मैं
00:15घर बसाऊंगा, फिर मेरे लिए चाय ब
00:29कराऊंगा, यह क्या है, यह आशा है, और इन सब में वो बिल्कुल मुख्द हुआ जा रहा है, अब दो
00:42खाएगा, क्योंकि तुमने जो कल्पना करी है, उसको वो कभी पूरा नहीं कर सकती, ठीक वैसे जैसे बंदर को मुबाइल
00:50काम नहीं आ सकता, पर उचुरा के बैठ गय
00:59और वो तुम बैठा रहे, कहानी लेकर बैठा रहे, लेकिन अब वो जाने मन है, देलो जान है, जाने ता
01:06मनना है, पता नहीं क्या क्या है, और कभीर साव भठकते भठकते पहुंच जाएं, और बोल दें कि यह सब
01:12जो तुमने चोरी करी है, तेरे काम नहीं आईगी, छोड�
01:29उने बताने का जो दूसरा तरीका उठाया, वो वही तरीका है, जो उपने शदों में रिशियों ने उठाया, क्या?
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