00:00लहर के सारे कर्म किस से आ रहे हैं?
00:03सागर से आ रहे हैं
00:04क्या लहर को कोई अपना अलग व्यक्तिगत अहंकार चाहिए अपना कोई भी कर्म करने के लिए?
00:13लहर को जो कुछ भी करना है उससे कौन करवा लेगा?
00:17सागर करवा ही लेगा भाई तूसे
00:19क्यों टेंशन ले रही है?
00:21आंकार एक टेंशन है बस
00:24मेरा काम कैसे होगा?
00:25जब तेरी हस्ती नहीं है तो तेरा काम कैसा?
00:30तुझसे जितने काम होने हैं
00:31सागर खुदी करवा लेगा
00:33इसी लिए लहर को क्या बोलते हैं?
00:35मौज
00:36तू किसलिए है? तू तो मौज कर
00:49वो अपने आपको करता कह रहे है さगर को
00:52तो फिर भी ठnya है अपने आपको करता कहने का
00:55लेहर को
00:56तो बस मौज करनी है
00:58तुमें क्या करनी है?
01:00ऐसे बोल रहा आच आरे जभी थोड़े दो लोगे काम करो
01:04वही तो मौज है
01:05तो लेहर को
01:07अगर लगने लगा
01:12हैं तो अब मौज नहीं रहेगी वो अब उसको आप मौज नहीं बोल जब
01:21हैं तबित ही तक है जब तक लहर का कोई व्यक्तिगत अस्तित। नहीं है
01:30जब तक वो सागर की लहर है तब तक मौज है और जैसे ही वो बन गई गितिगत लहर तो
01:39अब मौज चली गई या बाकी वो जो बन गई हो
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