00:00रोटी है पेट है रोटी पेट का विशय है पर अहंकार ने पूरे शरीर पर कबजा कर रखा है तो
00:10उसने पेट पर भी कबजा कर रखा है तो पेट की और जो रोटी की आपूरती जा रही होती है
00:17सप्लाई जा रही होती है वो उसका अभरण कर लेता है उसका अभरण कर लेता ह
00:25अब वो रोटी पेट की रोटी नहीं है, वो रोटी किसकी है?
00:29अँकार की रोटी है.
00:32इसलिए पेट ने अगर दो रोटी माँगी थी,
00:35तो आप पाते हो गिए आपने पाँच खाई है, बागी तीन कहा गहीं?
00:40बागी तीन किसने खाई?
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