00:00भारत में इनसान की जान को हम बहुत महपतो देते हैं
00:13यह हमारे इहाँ पर इनसान की जान की कीमत है
00:17हमें फर्क क्यों नहीं पड़ता किसी जान के जाने से
00:21भारत में हमें फर्क इसलिए नहीं पड़ता क्योंकि हम
00:24क्वांटिटी को बहुत महपतो देते हैं
00:26इतने लोग हैं कि उसमें से अगर कुछ लोग नहीं भी रहते तो वो बहुत बड़ा मुद्दा बनता नहीं है
00:32चोटा सा कोई देश होता है वहाँ पर अगर कुछ ऐसा हो जाता है जिसमें एक, दो या चार लोग
00:38भी चोट पा गए या हताहत हो गए तो बहुत बड़ा मद्दा बन जाता है
00:43सरकारें भी गिर जाती हैं
00:45इंसान होने का मतलब होता है कि हम मनुष्य हैं और एक-एक मनुष्य की जान की बहुत कीमत है,
00:50अनंत कीमत है, हम किसी भी हालत में उस पर कोई समझाता कॉंप्रमाइज नहीं कर सकते हैं, वो एटिचूड भारत
00:57में नहीं है, भारत में इंसान की जान की कीमत सच मुछ नहीं है,
01:01हमें भीतर कुछ बहुत जबरदस्त बदलावों की जरूरत है और बदलाव आते दिख नहीं रहे है
01:07जो हमारा कल्चरल डीने ही है ना उसको बदलने की बड़ी सक्त जरूरत है और नहीं बदल रहा है
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