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Today, we remember the legendary Alam Chana on his 28th death anniversary. Known as Pakistan's tallest man, Alam Chana became a symbol of pride and inspiration for millions. His extraordinary height and remarkable personality made him famous not only in Pakistan but around the world. In this tribute, we honor his life, achievements, and lasting legacy. Watch this special remembrance and share your thoughts about this iconic personality.

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00:28खुश्याम देद
00:31जिहां हाजी मुहम्मद आलम चन्ना ने 1982 से लेकर 1998 तक दुनिया के सबसे तवील उलकामत जिन्दा इनसान का गिनिस
00:40वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम रखा।
00:42साथ फुट आठ हिंच का कदना किसी भी आम इनसानी तसवर से वाकई बहुत बहुत बढ़ा है।
00:49हिस्सा पहला सिंद का अजीम शख्स और सहवान की गल्यों में उनकी आम सी शुरूआ है।
00:54तो कहानी शुरू होती है 1953 के आसपास सहवान के एक इंतहाई गरीब सिंधी घराने से।
01:00माली हालात इतने सख्त थे कि वो बच्पन में कोई बाकाइदा तालीम ही हासल नहीं कर पाए।
01:06और जानते हैं उन्होंने अपनी अमली जिंदगी कहां से शुरू की किसी बड़ी नौकरी से नहीं बलके साड़े छेसु साल
01:11पुराने सूफी बुजर्ग हजरत लाल शहबाज गलंदर के मजार पर वहां वो एक खादिम और खाक रूप के तौर पर
01:18काम करते थे।
01:19यही वो जगा थी जहां उन्हें सुकून मिलता था और यह मजार उनकी अपनी सकाफ़त और अकीदे से गहरी वाबस्तगी
01:25को जाहर करता है।
01:49उनकी वजा क्या थी? तिब भी माहरीन बताते हैं कि उनके पिट्यूट्री ग्लैंड में एक ट्यूमर बन गया था जिसने
01:54उनकी जिस्मानी साख़त को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया।
01:57हिस्सा दूसरा मजर से सरकस तक का सफर और वो माशी मजबूरी जिसने उन्हें रोशनियों की तरफ ढखेला।
02:05अब साल आता है 1978 ये उनकी जिन्दगी का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट था। एक टोरिंग सरकस के मालिक की
02:13नजर उन पर पड़ी जब वो मजार पर सफाई कर रहे थे। और उसने एक ऐसी पेशकश की जिसने रातो
02:20रात उनकी दुन्या ही बदल दी।
02:22इसे ऐसे समझ ये मजार पर उन्हें हफ़ते के सिफ पंदरा रुपे मिलते थे जो उस वक तकरीबन डेड़ डॉलर
02:28बनता था। और सरकस में वहां उन्हें महाना 160 रुपे की पेशकश हुई। एक गरीब और माशी तंगदस्ती के शिकार
02:35इनसान के लिए ये आमदनी एक ब
02:51करते और अपने कंदों पर बिठा लेते थे। बस इस सादा से मजाहिया एक्ट ने पूरे सिंध के दिलों में
02:57ऐसी जगा बनाई कि वो देखते ही देखते एक मकामी सिलेबरिटी बन गए। लेकिन शोहरत सिर्फ सिंध तक महदूत थोड़ी
03:04रही। 1981 में किसी फैन ने उनकी
03:07तस्वीर गिनिस वर्ल्ड रेकर्ड्स वालों को भेज दी। फिर क्या था गिनिस की ओफिशल्स ने खुद सहवान आकर उनका कद
03:13नापा और अलम चन्ना दुन्या भर में मशूर हो गए। इस फेम की वज़ा से उन्होंने गलोबल टूर्स किये जरा
03:20सोचे लंडन की डबल �
03:21पर बसों को आराम से उपर से चुना और टोकियो में उनका शानदार इस्तक्बाल ये सब उनकी आलमी मकबूलियत का
03:28बिलकुल वाज़ सुबूत था।
03:51और जानते हैं उन्होंने क्या किया उन्होंने वो अच्छे पैसों वाली सरकस की नौकरी छोड़ने का इंतहाई हिम्मत भरा फैसला
03:58कर लिया। अवामी नजरों से बचने और अपना सुकून वापस पाने के लिए वो चुप चाप दुबारा उसी मजार पर
04:04अपनी वोही कम
04:05आमदनी वाली सफाई की नौकरी पर वापस आ गए। ये थी उनकी असली सादगी।
04:10हिस्सा चौथा एक अजीम सकाफती अलामत जब किसी का कद एक इस्तारा यानि मेटफर बन जाए। अब हम आते हैं
04:181985 की रिपब्लिक डे परेड पर। उस वक्त के मिलिटरी डिक्टेटर जेनरल जिया उलहक को अलम चन्ना को एक खुसूसी
04:26अवोर्ड देना था और तमगा प
04:40अब भी जिया को छोटा समझता है। हम यहां किसी सियासी बहस में नहीं पढ़ रहे हैं लेकिन ये देखना
04:45जरूरी है कि किस तरहां प्रेस ने अलम चन्ना की लंबी जिस्मानी साखत को उनकी अपनी मर्जी के बगेर ही
04:51सियासी मकासिद के लिए इस्तिमाल कर लिया। हिस्स
05:07के साथ उनके तिबी मसायल मसलसल बढ़ते गए। उसी पिटियोटरी ग्लैंट के ट्यूमर ने मजीद परेशानिया खड़ी कर दी। उन्हें
05:15बलड प्रेशर का शदीद आर्जा लाहक हो गया और आखिरकार उनके गुर्दे मुकमल तोर पर काम करना चोड़ गए। नाइ�
05:29और इनी हालात में एक बहुत ही तल्ख हकीकत सामने आई। इतनी आलमी शोहरत के बावजूद मकामी एस्पतालों में उनके
05:38बारे गद के मताबिक बन्यादी आलात यहां तक के ऑपरेशन टेबल्स भी मौजूद नहीं थे। एपी आर्काइफ की फुटिज में
05:45एक डॉक्�
05:49यानि सिर्फ पचास से साट एमेल का हो चुका था और बदकिस्मती से अस्पताल में इतने बड़े कद के शख्स
05:55की सरजरी के लिए मुनासिब सर्जिकल एक्विप्मेंट ही दस्तियाब नहीं थे। यह मशूर होने के बावजूद बेबसी की एक इंतहाई
06:03बड़ी मिसाल थ
06:17लेकिन जैसा हमने बताया 1998 में सिहत मुकमल तौर पर गिर गई। हुकूमत ने आखरकार उनके इलाज के लिए उन्हें
06:27अमेरिका भेजा। मगर बदकिस्मती से 2 जुलाई 1998 को सिर्फ 45 साल की छोटी उमर में न्यू यॉक के एक
06:36अस्पताल में कोमा के हालत में वो इस दुनिय
06:43का इख्तिताम इस सबसे एहम सवाल पर होता है जब कोई शक्स सिर्फ एक आम और सादा जिन्दगी गुजारना चाहता
06:49हो तो ऐसी गैर मामूली शोहरत की असली कीमत आखिर क्या होती है।
07:13अब इस बारे में जरूर सोचेगा।
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