00:00अगाज करते हैं आज के इस बेहद दिल्चस्प जाइजे का।
00:03अगर हम आज के पॉप कल्चर पर नज़र डालें तो जुनूबी एशिया की लोकमोसिकी का असर हर तरफ चाया हुआ
00:08है।
00:08पुरानी धुने, नए अंदाज, ये सब हम रोज सुनते हैं।
00:11लेकिन इन मशूर धुनों के पीछे एक ऐसी जबरदस कहानी चुपी है, जिसे शाजुनादिर ही पूरी तरह बयान किया जाता
00:18है।
00:18तो आईए इस अजीम और तारीखी सफर पर निकलते हैं।
00:21जरा इस नंबर पर एक नज़र डालते हैं।
00:24एक सो दस मिलियन यानि पूरे ग्यारा करोड और हरानी के बात ये है कि ये महस कोक स्टूडियो में
00:30गाई गई जुगनी के सिर्फ एक जदीद वर्जिन के व्यूज हैं।
00:33जब आरिफ लोहार और मीशा शफी ने मिलकर इस क्लासिक गीत को एक नए मौडन अंदाज में पेश किया, तो
00:39इसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया।
00:41यूट्यूबर ये मकबूल तरीन पंजाबी वीडियोस की लिस्ट में सबसे उपर आ गया।
00:45इससे एक बात तो बिलकुल साफ जाहिर होती है कि ये महज एक गीत नहीं रहा, बलके एक बहुत बड़ा
00:51आलमी रुजहान बन चुका है।
00:53लेकिन यहां एक बहुत ही दिल्चस्प सवाल जहन में आता है कि आखिर ये मशूरे जमाना सकाफती रुजहान दरसल शुरू
00:59कहां से हुआ? इसका आगाज कैसे हुआ? ये जानकर वाकई हैरत होती है कि इस वाइरल ट्रैक की जड़ें कोई
01:06आज की नहीं, बलके 1930 की दहाई क
01:16अगे बढ़ने से पहले जुरा आज के एहम नुकात पर एक सरसरी सी नजर डाल लेते हैं. हम, नमबर एक,
01:22जदीद जुगनी के रुजहान से बात शुरू करेंगे, फिर नमबर दो में देखेंगे कि एक लोहार कैसे फोक सुपरस्टार बना,
01:28नमबर तीन, चिम्टे से मौस
01:30आने वाला इंकलाब, नमबर चार, जुगनी की असल रोहानी हकीकत, और आखिर में नमबर पांच, उनका अलमनाक अंजाम और एक
01:38लाजवाल विरसा. तो चलते हैं, पहले हिसे की तरफ, जदीद जुगनी का रुजहान. दिखते हैं कि ये गीत आखिर पुरानी
01:45रिवायात �
01:46और आज के मॉडरन हिट्स के दर्मियान एक पुल का किरदार कैसे अदा कर रहा है? सची बात तो ये
01:51है कि इस गाने का असर इतना वसी है कि इसे किसी एक खित्ते या एक प्लैटफॉर्म तक महदूत किया
01:57ही नहीं जा सकता. मिसाल के तोर पर कोक स्टूडियो पाकिस्तान के �
02:01इस मशूरे जमाना वर्जिन को ही ले लें या फिर बॉलिवुड की हिट फिल्में जैसे ओय लकी लकी ओय और
02:06कॉक्टेल जुगनी हर जगा चाही हुई है. रभी शेरगिल और दिलजीत दुसान जैसे जदीद दौर के सुपरस्टार्स ने भी इसे
02:13अपने अंदाज में गा
02:28एक लोहार से फोक सूपरस्टार तक का सफर. चलते हैं बरतानवी हिंदुस्तान के देही पंजाब में जहां से इस पूरी
02:35दास्तान की शुरुआत हुई. अगर आलम लोहार के जिंदगी के एहम संगे मील पर नज़र डालें तो कहानी शुरू होती
02:42है 1928 से जब वो गुजर
02:58ट्रैक रिकॉर्ड करवा लिया था. इसी अथक मेहनत का नतीजा था कि 1965 में उन्हें जुगनी के लिए बाकाइदा गोल्ड
03:04डिस्क मिली और फिर 1989 का वो साल जब एक अलमनाग कार हाथसे ने उनकी जान ले ली. ये पूरा
03:10टाइम लाइन एक ऐसे शक्स की कहानी सुनाता है ज
03:26क्या वो तवे पर रिकॉर्डिंग करवाएंगे? अब रेडियो वाले की मुराद ग्रामोफोन का ब्लैक रिकॉर्ड था जिसे आम जुबान में
03:32तवा कहा जाता था लेकिन आलम लोहार ने बड़ी मासूमियत और मुस्करातेवे जवाब दिया कि जी हाँ मैं तवे पर
03:38बिल
03:56जहां आलम लोहार का अंदाज अपने दौर के हर दूसरे गुलुकार से बिलकुल अलग और मुन्फरिद साबत हुआ
04:02जरा इस कमाल तसवर पर गोर किया जाए
04:05एक आम सा रिवायती चिम्टा जिसका काम बावर्ची खाने में महज आग पर गरम चीज़ें पकड़ना या रोटियां उलटना होता
04:12है
04:12वोही चिम्टा आलम लोहार के हाथों में आकर एक बाकाइदा परकशन इंस्ट्रूमेंट बन गया
04:18उन्होंने क्या किया कि उस चिम्टे में छोटी छोटी जांजने लगा दी
04:21और देखते ही देखते मौसीकी की एक बिल्कुल नई सिन फिजात कर डाली
04:26सच तो ये है कि इस से पहले दुनिया चिम्टे को मौसीकी के किसी सास के तोर पर जानती ही
04:30नहीं थी
04:31लेकिन जब आलम लोहार की गर्जदार पुरजोश अवाज के साथ इस चिम्टे की मौनफरित थाप मिलती
04:36तो सुनने वाले लफजी तोर पर सहर जदा रह जाते थे
04:40और फिर इसी चिम्टे की बदूलत तारीक का एक ऐसा मनजर सामने आया जिस पर यकीन करना मुश्किल है
04:45अगर हम आखे बंद करके इस मनजर का तसवर करें
04:48पंजाब का एक दिहाती लोहार जो अपना रिवायती लाचा और कुर्टा पहने वे है और वो खड़ा कहा है
04:53बरतानिया के शाही महल में
04:55वो मलका एलिजबेट की सिल्वर जूबली की शानदार तकरीब में परफॉर्म कर रहा है
04:59और उसके हाथ में सास के नाम पर सिर्फ एक चिम्टा है
05:02ये इतनी जानदार और परजोश कारकरदगी थी
05:05कि खुद मलका समेत वहां मौझूद हर एक शक्स तालिया बजाने पर मजबूर हो गया
05:09ये उनके फन की वो बुलंदी थी
05:11जिसे तसलीम करते वे उस वक्त के सदर पाकिस्तान अयूब खान ने
05:15उन्हें शेर पंजाब का अजीम खिताब दिया
05:17अब वक्त आ गया है कि इस गीत की जरा बातरी मफूम को भी समझ लिया जाए
05:21जिसे उन्होंने पूरी दुनिया में अमर कर दिया
05:23चौथा हिस्सा जुगनी की रुहानी हकीकत
05:26तो आखर ये जुगनी बला क्या है
05:28इसका कोई एक सीधा सा मतलब नहीं है
05:30सूफियाना शायरी में अगर देखें
05:32तो इसका मतलब है जिन्दगी की रुह
05:34कुछ पुरानी रिवायात ये भी बताती है
05:36कि जुगनी दरसल एक कदीम मुसलिम
05:38इबादती आले यानि तजबी को भी
05:40कहा जाता था जिसके मोतियों पर
05:42सूफी बुजर्ग अल्ला के नाम का विर्द करते थे
05:44और अगर हम इसे अपनी फोक मोसिकी के
05:46हवाले से देखें तो जुगनी एक इंतहाई
05:48मासूम और गेर जानिबदार मुशाहिदा
05:50करने वाले का किरदार अदा करती है
05:51वो इस दुनिया को देखती है
05:53और फिर अपने बेसाखता, कभी मजाहिया
05:55तो कभी बहुती जजबाती तपसरे पेश करती है
05:57अगर हम जुगनी गाने की अंदाज
06:00या बयानिये की साखत को समझें
06:02तो ये एक बहुत ही खास तरतीब में चलती है
06:04स्टेप नंबर एक
06:06जुगनी आचानक किसी गेर मुतवक्का जगा पर जा पहुँचती है
06:09कभी किसी शहर के बीचो बीच
06:11कभी किसी स्कूल में
06:12तो कभी किसी भरे बाजार में
06:14स्टेप नंबर दो
06:15वो इस दुनिया के रंग ढंग को
06:17बड़ी खुली आँखों और हैरत से देखती है
06:19फिर स्टेप नंबर तीन
06:20वो तीन या चार मिसरों पर मुश्टमिल
06:22अपना एक तपसरा पेश करती है
06:24जिसमें कड़वी सच्चाई का कोई न कोई पहलू
06:26जरूर छुपा होता है
06:27और आखर में स्टेप नंबर चार
06:29जो सबसे एहम है
06:30वो हमेशा खुदा यानि साइं का नाम लेती है
06:33बजाहिर ये गाई की बड़ी सादा लगती है
06:36लेकिन इस सादगी में
06:37बहुत ही गहरी और फलसफियाना सच्चाईयां लिप्टी होती है
06:40अब हम इस तफसीली जाइजे के आखरी हिस्से की तरफ बढ़ते हैं
06:45पांचमा हिस्सा
06:46अल्मुनाक अंजाम और लाजवाल विर्सा
06:49उनकी जिन्दगी का इक्तिताम यकीनन बहुत अफसोसनाक था
06:53लेकिन उनका विर्सा आज भी हमारे दर्मियन जिन्दा है
06:55उनकी जिन्दगी का एक वाकिया ऐसा है जो सीधा दिल पर असर करता है
06:59एक मरतबा आलम लोहार लाल शहबास कलंदर के मजार सियून शरीफ जा रहे थे
07:03के रास्ते में उनकी बसका एक इंतहाई खौफनाक हादसा हो गया
07:06वो इस कदर शदीद जखमी हुए कि कई दिनों तक हस्पताल में मौतो हयात की कश्मकश में बेहोश पड़े रहे
07:12जब आखिरकारों ने होश आया तो उन्होंने एक नर्स को मदद के लिए पुकारा
07:16मगर आवाज इतनी कमजोर थी के नर्स सुनना सगी
07:19इस वक्त उनके दिल की गहराईयों से वो मशूर और दर्द भरा गीत निकला
07:23वाजा मारिया बुलाया कई वार
07:25एक करीबल मर्ग हादसे की कोक से जनम लेने वाल इस कलाम ने बाद में लाखों सामें इनके दिलों को
07:30चूलिया
07:30येकिन फिर बदकिसमती से तीन जुलाली 1989 का वो दिन उनकी जिन्दगी का आखरी दिन साबित हुआ
07:37मुल्तान रोड पर शाम के भटियां के करीब उनकी गाड़ी एक तेज रफ़ता ट्रक से टकरा गई
07:42और वो इस अलमनाक हादसे में हमेशा के लिए हम से बिछड़ गए
07:46उनके इंतकाल के बाद पाकिस्तान के लिए उनकी इंशानदार और बेमिसाल खिदमात का एतराफ करते हुए
07:52उन्हें मुल्क के आला तरीन सिविल एजाजात में से एक तुमगए हुसने कारकरदगी यानी प्राइड ऑफ परफॉमंस से नवाजा गया
07:59पर एक बात तो तैह है कि उनका फन उनके साथ खतम नहीं हुआ
08:03उनके साहिबजादे आरिफ लोहार ने इस अजीम विरासत का परचम थामे रखा
08:08आरिफ लोहार ने बहुत ही खुबसूरती से जुगनी को जदीद मौसिकी के साजों और मौडन रॉक इन पॉप वाइब्स के
08:15साथ मिलाकर नई नसल तक पहुँचाया
08:17और सबसे एहम बात ये कि उन्होंने अपने वालिद के उसी पुराने और सचे पैगाम यानी महबबत, अमन और भाईचारे
08:23को आज की दुनिया में पहलाना जारी रखा
08:26तो इस पूरे सफर से गुजरने के बाद इखतिताम पर एक बहुत ही गहरी बात सोचने पर मजबूर करती है
08:32आज हम जिन दरजनों जदीद और हिट पॉप ट्रेंड्स को सुनते और उनकी बीट्स पर जुमते हैं
08:36उनमें से आखिर कितने ऐसे होंगे जो दरसल ऐसी ही किसी कदीम और रुहानी लोक रिवायात की कोक से निकले
08:42हैं
08:43आलम लोहार की ये जुगनी ये सोचने पर मजबूर कर देती है कि हमारे जदीद मीडिया की जड़ें माजी के
08:48कच्चे और साधे सेहनों में कितनी गहराई तक पैवस्त हैं
08:51और इसी दिल्चस्प खयाल के साथ आज के इस जाइजे का एक्तिताम करते हैं
08:54तजस्स कायम रहना चाहिए और नई नई चीजे दर्याफ्त करने का ये सिलसला यूही चलते रहना चाहिए