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  • 4 months ago
Today, we pay tribute to the legendary Punjabi folk singer Alam Lohar on his death anniversary. Known as the king of Punjabi folk music, Alam Lohar's powerful voice and timeless songs continue to inspire generations across Pakistan and around the world. In this video, we remember his remarkable contribution to Punjabi culture, folk music, and entertainment.

Alam Lohar's iconic performances, traditional instruments, and unforgettable melodies made him one of the greatest folk artists in South Asian history. Join us as we honor the life, legacy, and musical journey of this legendary artist.

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Transcript
00:00अगाज करते हैं आज के इस बेहद दिल्चस्प जाइजे का।
00:03अगर हम आज के पॉप कल्चर पर नज़र डालें तो जुनूबी एशिया की लोकमोसिकी का असर हर तरफ चाया हुआ
00:08है।
00:08पुरानी धुने, नए अंदाज, ये सब हम रोज सुनते हैं।
00:11लेकिन इन मशूर धुनों के पीछे एक ऐसी जबरदस कहानी चुपी है, जिसे शाजुनादिर ही पूरी तरह बयान किया जाता
00:18है।
00:18तो आईए इस अजीम और तारीखी सफर पर निकलते हैं।
00:21जरा इस नंबर पर एक नज़र डालते हैं।
00:24एक सो दस मिलियन यानि पूरे ग्यारा करोड और हरानी के बात ये है कि ये महस कोक स्टूडियो में
00:30गाई गई जुगनी के सिर्फ एक जदीद वर्जिन के व्यूज हैं।
00:33जब आरिफ लोहार और मीशा शफी ने मिलकर इस क्लासिक गीत को एक नए मौडन अंदाज में पेश किया, तो
00:39इसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया।
00:41यूट्यूबर ये मकबूल तरीन पंजाबी वीडियोस की लिस्ट में सबसे उपर आ गया।
00:45इससे एक बात तो बिलकुल साफ जाहिर होती है कि ये महज एक गीत नहीं रहा, बलके एक बहुत बड़ा
00:51आलमी रुजहान बन चुका है।
00:53लेकिन यहां एक बहुत ही दिल्चस्प सवाल जहन में आता है कि आखिर ये मशूरे जमाना सकाफती रुजहान दरसल शुरू
00:59कहां से हुआ? इसका आगाज कैसे हुआ? ये जानकर वाकई हैरत होती है कि इस वाइरल ट्रैक की जड़ें कोई
01:06आज की नहीं, बलके 1930 की दहाई क
01:16अगे बढ़ने से पहले जुरा आज के एहम नुकात पर एक सरसरी सी नजर डाल लेते हैं. हम, नमबर एक,
01:22जदीद जुगनी के रुजहान से बात शुरू करेंगे, फिर नमबर दो में देखेंगे कि एक लोहार कैसे फोक सुपरस्टार बना,
01:28नमबर तीन, चिम्टे से मौस
01:30आने वाला इंकलाब, नमबर चार, जुगनी की असल रोहानी हकीकत, और आखिर में नमबर पांच, उनका अलमनाक अंजाम और एक
01:38लाजवाल विरसा. तो चलते हैं, पहले हिसे की तरफ, जदीद जुगनी का रुजहान. दिखते हैं कि ये गीत आखिर पुरानी
01:45रिवायात �
01:46और आज के मॉडरन हिट्स के दर्मियान एक पुल का किरदार कैसे अदा कर रहा है? सची बात तो ये
01:51है कि इस गाने का असर इतना वसी है कि इसे किसी एक खित्ते या एक प्लैटफॉर्म तक महदूत किया
01:57ही नहीं जा सकता. मिसाल के तोर पर कोक स्टूडियो पाकिस्तान के �
02:01इस मशूरे जमाना वर्जिन को ही ले लें या फिर बॉलिवुड की हिट फिल्में जैसे ओय लकी लकी ओय और
02:06कॉक्टेल जुगनी हर जगा चाही हुई है. रभी शेरगिल और दिलजीत दुसान जैसे जदीद दौर के सुपरस्टार्स ने भी इसे
02:13अपने अंदाज में गा
02:28एक लोहार से फोक सूपरस्टार तक का सफर. चलते हैं बरतानवी हिंदुस्तान के देही पंजाब में जहां से इस पूरी
02:35दास्तान की शुरुआत हुई. अगर आलम लोहार के जिंदगी के एहम संगे मील पर नज़र डालें तो कहानी शुरू होती
02:42है 1928 से जब वो गुजर
02:58ट्रैक रिकॉर्ड करवा लिया था. इसी अथक मेहनत का नतीजा था कि 1965 में उन्हें जुगनी के लिए बाकाइदा गोल्ड
03:04डिस्क मिली और फिर 1989 का वो साल जब एक अलमनाग कार हाथसे ने उनकी जान ले ली. ये पूरा
03:10टाइम लाइन एक ऐसे शक्स की कहानी सुनाता है ज
03:26क्या वो तवे पर रिकॉर्डिंग करवाएंगे? अब रेडियो वाले की मुराद ग्रामोफोन का ब्लैक रिकॉर्ड था जिसे आम जुबान में
03:32तवा कहा जाता था लेकिन आलम लोहार ने बड़ी मासूमियत और मुस्करातेवे जवाब दिया कि जी हाँ मैं तवे पर
03:38बिल
03:56जहां आलम लोहार का अंदाज अपने दौर के हर दूसरे गुलुकार से बिलकुल अलग और मुन्फरिद साबत हुआ
04:02जरा इस कमाल तसवर पर गोर किया जाए
04:05एक आम सा रिवायती चिम्टा जिसका काम बावर्ची खाने में महज आग पर गरम चीज़ें पकड़ना या रोटियां उलटना होता
04:12है
04:12वोही चिम्टा आलम लोहार के हाथों में आकर एक बाकाइदा परकशन इंस्ट्रूमेंट बन गया
04:18उन्होंने क्या किया कि उस चिम्टे में छोटी छोटी जांजने लगा दी
04:21और देखते ही देखते मौसीकी की एक बिल्कुल नई सिन फिजात कर डाली
04:26सच तो ये है कि इस से पहले दुनिया चिम्टे को मौसीकी के किसी सास के तोर पर जानती ही
04:30नहीं थी
04:31लेकिन जब आलम लोहार की गर्जदार पुरजोश अवाज के साथ इस चिम्टे की मौनफरित थाप मिलती
04:36तो सुनने वाले लफजी तोर पर सहर जदा रह जाते थे
04:40और फिर इसी चिम्टे की बदूलत तारीक का एक ऐसा मनजर सामने आया जिस पर यकीन करना मुश्किल है
04:45अगर हम आखे बंद करके इस मनजर का तसवर करें
04:48पंजाब का एक दिहाती लोहार जो अपना रिवायती लाचा और कुर्टा पहने वे है और वो खड़ा कहा है
04:53बरतानिया के शाही महल में
04:55वो मलका एलिजबेट की सिल्वर जूबली की शानदार तकरीब में परफॉर्म कर रहा है
04:59और उसके हाथ में सास के नाम पर सिर्फ एक चिम्टा है
05:02ये इतनी जानदार और परजोश कारकरदगी थी
05:05कि खुद मलका समेत वहां मौझूद हर एक शक्स तालिया बजाने पर मजबूर हो गया
05:09ये उनके फन की वो बुलंदी थी
05:11जिसे तसलीम करते वे उस वक्त के सदर पाकिस्तान अयूब खान ने
05:15उन्हें शेर पंजाब का अजीम खिताब दिया
05:17अब वक्त आ गया है कि इस गीत की जरा बातरी मफूम को भी समझ लिया जाए
05:21जिसे उन्होंने पूरी दुनिया में अमर कर दिया
05:23चौथा हिस्सा जुगनी की रुहानी हकीकत
05:26तो आखर ये जुगनी बला क्या है
05:28इसका कोई एक सीधा सा मतलब नहीं है
05:30सूफियाना शायरी में अगर देखें
05:32तो इसका मतलब है जिन्दगी की रुह
05:34कुछ पुरानी रिवायात ये भी बताती है
05:36कि जुगनी दरसल एक कदीम मुसलिम
05:38इबादती आले यानि तजबी को भी
05:40कहा जाता था जिसके मोतियों पर
05:42सूफी बुजर्ग अल्ला के नाम का विर्द करते थे
05:44और अगर हम इसे अपनी फोक मोसिकी के
05:46हवाले से देखें तो जुगनी एक इंतहाई
05:48मासूम और गेर जानिबदार मुशाहिदा
05:50करने वाले का किरदार अदा करती है
05:51वो इस दुनिया को देखती है
05:53और फिर अपने बेसाखता, कभी मजाहिया
05:55तो कभी बहुती जजबाती तपसरे पेश करती है
05:57अगर हम जुगनी गाने की अंदाज
06:00या बयानिये की साखत को समझें
06:02तो ये एक बहुत ही खास तरतीब में चलती है
06:04स्टेप नंबर एक
06:06जुगनी आचानक किसी गेर मुतवक्का जगा पर जा पहुँचती है
06:09कभी किसी शहर के बीचो बीच
06:11कभी किसी स्कूल में
06:12तो कभी किसी भरे बाजार में
06:14स्टेप नंबर दो
06:15वो इस दुनिया के रंग ढंग को
06:17बड़ी खुली आँखों और हैरत से देखती है
06:19फिर स्टेप नंबर तीन
06:20वो तीन या चार मिसरों पर मुश्टमिल
06:22अपना एक तपसरा पेश करती है
06:24जिसमें कड़वी सच्चाई का कोई न कोई पहलू
06:26जरूर छुपा होता है
06:27और आखर में स्टेप नंबर चार
06:29जो सबसे एहम है
06:30वो हमेशा खुदा यानि साइं का नाम लेती है
06:33बजाहिर ये गाई की बड़ी सादा लगती है
06:36लेकिन इस सादगी में
06:37बहुत ही गहरी और फलसफियाना सच्चाईयां लिप्टी होती है
06:40अब हम इस तफसीली जाइजे के आखरी हिस्से की तरफ बढ़ते हैं
06:45पांचमा हिस्सा
06:46अल्मुनाक अंजाम और लाजवाल विर्सा
06:49उनकी जिन्दगी का इक्तिताम यकीनन बहुत अफसोसनाक था
06:53लेकिन उनका विर्सा आज भी हमारे दर्मियन जिन्दा है
06:55उनकी जिन्दगी का एक वाकिया ऐसा है जो सीधा दिल पर असर करता है
06:59एक मरतबा आलम लोहार लाल शहबास कलंदर के मजार सियून शरीफ जा रहे थे
07:03के रास्ते में उनकी बसका एक इंतहाई खौफनाक हादसा हो गया
07:06वो इस कदर शदीद जखमी हुए कि कई दिनों तक हस्पताल में मौतो हयात की कश्मकश में बेहोश पड़े रहे
07:12जब आखिरकारों ने होश आया तो उन्होंने एक नर्स को मदद के लिए पुकारा
07:16मगर आवाज इतनी कमजोर थी के नर्स सुनना सगी
07:19इस वक्त उनके दिल की गहराईयों से वो मशूर और दर्द भरा गीत निकला
07:23वाजा मारिया बुलाया कई वार
07:25एक करीबल मर्ग हादसे की कोक से जनम लेने वाल इस कलाम ने बाद में लाखों सामें इनके दिलों को
07:30चूलिया
07:30येकिन फिर बदकिसमती से तीन जुलाली 1989 का वो दिन उनकी जिन्दगी का आखरी दिन साबित हुआ
07:37मुल्तान रोड पर शाम के भटियां के करीब उनकी गाड़ी एक तेज रफ़ता ट्रक से टकरा गई
07:42और वो इस अलमनाक हादसे में हमेशा के लिए हम से बिछड़ गए
07:46उनके इंतकाल के बाद पाकिस्तान के लिए उनकी इंशानदार और बेमिसाल खिदमात का एतराफ करते हुए
07:52उन्हें मुल्क के आला तरीन सिविल एजाजात में से एक तुमगए हुसने कारकरदगी यानी प्राइड ऑफ परफॉमंस से नवाजा गया
07:59पर एक बात तो तैह है कि उनका फन उनके साथ खतम नहीं हुआ
08:03उनके साहिबजादे आरिफ लोहार ने इस अजीम विरासत का परचम थामे रखा
08:08आरिफ लोहार ने बहुत ही खुबसूरती से जुगनी को जदीद मौसिकी के साजों और मौडन रॉक इन पॉप वाइब्स के
08:15साथ मिलाकर नई नसल तक पहुँचाया
08:17और सबसे एहम बात ये कि उन्होंने अपने वालिद के उसी पुराने और सचे पैगाम यानी महबबत, अमन और भाईचारे
08:23को आज की दुनिया में पहलाना जारी रखा
08:26तो इस पूरे सफर से गुजरने के बाद इखतिताम पर एक बहुत ही गहरी बात सोचने पर मजबूर करती है
08:32आज हम जिन दरजनों जदीद और हिट पॉप ट्रेंड्स को सुनते और उनकी बीट्स पर जुमते हैं
08:36उनमें से आखिर कितने ऐसे होंगे जो दरसल ऐसी ही किसी कदीम और रुहानी लोक रिवायात की कोक से निकले
08:42हैं
08:43आलम लोहार की ये जुगनी ये सोचने पर मजबूर कर देती है कि हमारे जदीद मीडिया की जड़ें माजी के
08:48कच्चे और साधे सेहनों में कितनी गहराई तक पैवस्त हैं
08:51और इसी दिल्चस्प खयाल के साथ आज के इस जाइजे का एक्तिताम करते हैं
08:54तजस्स कायम रहना चाहिए और नई नई चीजे दर्याफ्त करने का ये सिलसला यूही चलते रहना चाहिए

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