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Transcript
00:00रटले पूरी गीता, साथ सोच लोग तो क्रिष्ण थोड़ी बन जाएगा
00:04पर ऐसे लोग हो सकते हैं जो सब कुछ याद कर लें गीता इससे कुछ नहीं हो जाएगा
00:08क्रिष्ञ क्रिष्ण की गीता में दम है क्योंकि उनके जीवन में दम है
00:11और उनका जीवन भी जरूरी नहीं है कि वही हो वैसा ही हो जैसा कि हम सोचते हैं या हमें
00:17बताया गया है
00:18राज साजा करना जाओंगा
00:21कभी भी आपके सामने कोई उचा ग्रंथ पड़े या उचा वक्तव है आपके सामने आ जाए
00:34और उसके साथ में बता दिया जाए कि जिसने ये काम करा ये उसकी जीवनी हो
00:41काम जितना सच्चा होगा जितनी गहराई से सच्चा होगा आपको जो जीवनी बताई गई है उतनी गहराई से जूटी होगी
00:49क्योंकि ऐसा बहुत कम हुआ है कि किसी महापुरुष ने अपनी जीवनी स्वयम लिखी हो हां उनका वक्तव उनका अपना
00:58हो सकता है मौलिक हम मान सकते भगवद गीता अलंकि गीता में भी कई बार संदे उठता है कि कुछ
01:04लोगों ने आगे पीछे तो नहीं कर दी है वो ज
01:19बहुत सारी हार जेली है अपनी ही बेहोशी की दीवार से सरपटका है यह सब कराया उन्होंने अपने ले तो
01:26नहीं लिखा किसके लिखा हमारे ले तो हमें दे दिया और हमें दे दिया तो हम क्या करते हैं फिर
01:31उसका सबसे हमारी जो घणासपद कोशिश होती है वो तो होती ह
01:35कि ग्रंथ में ही मिलावट कर दो
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