00:00कोई भी रिष्टा तूटता है, तो वो रिष्टा तो इस धंकी पराधारित था कि तुम जब तक मेरा मत मानोगे
00:08तब तक रिष्टा चलेगा।
00:31तो वो रिष्टा तो फिर इस धंकी पराधारित था कि तुम जब तक मेरा मत मानोगे तब तक रिष्टा चलेगा।
01:00ऐसा कोई मुझे विचार भी नहीं आता, और ऐसी वो मेरे सामने कुछ बोलें तो मेरा काम नोगे पकड़ के
01:05रगड़ देना, तो वो थोड़ी छोड़ देंगे मुझको।
01:10ये रिष्टे कैसे होते हैं कि जिसमें आपने दूसरे की बात के आगे सर नहीं जुकाया, तो वो कहता है
01:17जाओ रिष्टा तूट गया।
01:20ये मत कहिए कि रिष्टा टूट रहा है, ये कहिए कि मैंने ऐसा खोखलापन अपने रिष्टों में पाल कैसे रखा
01:28था, और एक बार आप ये बात स्विकार कर लेते हो, तो फिर रिष्टे को सुंदर बनाने की कुछ संभावना
01:35पैदा होती है, लेकिन ये अगर दिखा ही �
01:38नहीं कभी कि कोई चीज कमजोर है, जबकि वो वाकई कमजोर थी, तो आप कमजोर ही कोई ढोते रह जाओगे।
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