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Did the People of the Cave experience a form of ancient "Cryosleep"?

In this video, we dive deep into the extraordinary story of Ashab-e-Kahf (The People of the Cave) through the lens of modern science and medicine. Moving beyond traditional narratives, we explore a provocative hypothesis: Was their 300-year slumber a medical state of suspended animation?

Key highlights of this exploration include:

The "Ruqud" Mystery: Why the Quranic term Ruqud suggests a deep medical coma rather than standard sleep.

Biological Stasis: How the suspension of the nervous system and the cessation of metabolism could effectively "pause" the aging process.

The Zero-Gravity Theory: An analysis of the claim that a gravity-free environment inside the cave protected their bodies from physical decay and bedsores.

NASA & The Future: Comparing this Quranic miracle to NASA’s research into long-term space travel and the development of Cryosleep technology for interstellar missions.

Join us as we bridge the gap between 14 centuries of faith and the cutting edge of 21st-century space exploration.

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#ashabekahf #quranandscience #cryosleep #spacetravel #MiraclesOfIslam #ModernMedicine #NASA #SuspendedAnimation #IslamicHistory #QuantumPhysics #ThePeopleOfTheCave #DivineScience

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Transcript
00:00तसवर करे एक ऐसा साइनसी मनजर नामा जहां इनसानी जिस्म को मतलब बगैर खोराक, पानी या ओक्सिजन के पूरे तीन
00:09सो साल तक जिन्दा और बिलकुल महफूज रखा जाए
00:13और वो भी बिलकुल जवान हालत में, मतलब उन पर बढ़ापा भी ना आए
00:17बिलकुल, बजाहर तो ये किसी जदीद हॉलिवूड साइनस फिक्शन फिल्म का प्लॉट महसूस होता है न, या फिर शायद नासा
00:25की किसी इंतहाई खुफिया लिबॉरिटरी का कोई प्रोजेक्ट
00:28हाँ, आम तोर पर इनसान यही सोचेगा
00:30लेकिन क्या हो, अगर ये तमाम तफसीलात आज की नहीं, बलके सदियों पुरानी एक तहरीर में पहले से मौजूद हों?
00:38आज के इस तफसीली जाइजे में हम एक ऐसे ही हैरान कुन मौजू की गहराई में उतर रहे हैं
00:44जी, और ये वाकई एक बहुत ही पुरसरार मौजू है
00:48हमारे पास जो सोर्स मवाद है, वो एक इंतहाई दिल्चस्प वीडियो तजजिया है, जिसका उन्वान है असहाब कहफ, नासा और
00:56नाकाबल यकीन राज
00:57बिलकुल, और इस तजजिये ने तारीख के एक ऐसे मशूर वाक्य को, जिसे अमूमन एक पुरानी दास्तान समझा जाता है,
01:05मुकमल तोर पर जदीद बायालोजी और फिजिक्स के जाविये से पेश किया है
01:09तो आज की हमारी इस नशिस्त का मिशन यही खोज लगाना है, कि किस तरह एक खदीम मतन में जदीद
01:16साइंस के पेचीदा तरीन राज चुपे हो सकते हैं
01:19हम खालिसतन इल्म और तहकीक की आँख से उन हकाइक को परखेंगे, हम सिर्फ ये देखेंगे कि उस वाकए को
01:26बयान करने के लिए जो मखसूस अलफाज चुने गए, उनके अंदर जदीद एनाटमी और एस्ट्रो फिजिक्स के कौन से उसूल
01:33मौजूद है
01:33तो चलिए हम इस पुरसरार घार के दरवाजे से ही शुरुआत करते हैं, इस वीडियो के बिलकुल आगाज में एक
01:39नहायत बुनियावी, मगर मतलब चौका देने वाला सवाल उठाया गया है
01:43हम, वो खौफ वाला सवाल
01:46जी, फर्स करें, कोई शक्स बटकता हुआ किसी तारीक गार में जा निकलता है, और वहाँ उसे चंद नौजवान और
01:53एक तुत्ता सोते वे मिलते हैं, आम आलात में क्या होगा
01:56जादा से जादा बंदा चौक जाएगा, या खामोशी से वापिस आ जाएगा
02:00बिलकुल, लेकिन सोर्स में जो मनजर कशी है, वो बताती है कि अगर कोई उन्हें इस हालत में देख लेता,
02:07तो वो पीट फेर कर भाग खड़ा होता, और उनकी हैबत से उस पर देहशत चा जाती
02:11ये एक बहुत एहम नुकता है
02:13मुझे तो ये बात समझ नहीं आई, मतलब चन्द सोते हुए लोगों को देखकर कोई खौफ से क्यों भागेगा, ये
02:19कोई ड्राउनी फिल्म तो नहीं चल रही थी वहाँ
02:21देखें, यहीं से इस वाके की नफसियाती और साइंसी गहराई शुरू होती है
02:27तच्जिये में निशान दही की गई है कि इस खौफ के लिए जो लव्ज इस्तमाल हुआ है, वो रॉब है
02:32रॉब, मतलब आम तोर पर तो हम इसे दबदबे के मानों में लेते हैं
02:36हाँ, लेकिन नफसियात और इंसानी आसाबी निजाम के हवाले से रॉब कोई आम डर या घबराहट नहीं है
02:43यह एक ऐसी मुफलूच कर देने वाली देशत है, जो आसाबी निजाम को मुकमल तोर पे सुन कर देती है
02:50अच्छा, यानि दिमाग काम करना छोड़ देता है?
02:53बिल्कुल ऐसा ही है, जब दिमाग किसी ऐसे मनजर को देखता है, जो फिजिक्स के तबई कवानीन से बिल्कुल टकरा
03:00रहा हो, तो दिमाग का फाइट और फ्लाइट रिस्पॉन्स ओवरलोड हो जाता है
03:05हम, दिमाग प्रोसेस ही नहीं कर पता के सामने हो क्या रहा है
03:09जी, और वो पूरे जिस्म को सिर्फ एक ही एमरजनसी सिगनल भेजता है कि फॉरण यहां से भाग जाओ, वरना
03:16जान चली जाएगी
03:17यानि गार का वो मनजर किसी आम नींद का था ही नहीं
03:21तो वहां कोई ऐसा गैर फित्री अमल हो रहा था जो इनसानी समझ से बाहर था
03:26अब बात थोड़ी खुल रही है मेरे लिए
03:28हाँ, क्योंकि बायोलिजी के हिसाब से तो वैसे भी यह नामुम्किन है
03:32बिलकुल, मैं यही सोच रहा था कि अगर बायोलिजी के बुन्यादी उसूलों को देखें
03:36तो कोई भी जानदार अगर 309 साल तक एक ही जगा पढ़ा रहे
03:41तो खलियात की तूट फूट से तो जिसम गल सर जाना चाहिए
03:44हड़ियां तक मिट्टी बन जानी चाहिए इतने अरसे में
03:47तो बायोलिजी के लिहास से वो कौन सी ऐसी कैफियत थी जिसे देख कर दिमाग सुन हो जाए
03:52इसका बहुत ही तकनीकी जवाब इस मतन के अलफाज में है
03:56वीडियो में बताया गया है कि इस वाकEr के लिए आम नींद यानी नोम का लफस सिरसे इस्तमाली नहीं हुआ
04:03है
04:03तो फिर कौन सा लफस इस्तमाल हुआ है
04:05इसकी जगा एक खास लवस रुकूत का इनतखाब किया गया है
04:09अगर हम रुकूत को आज के medical terminology में समझें तो ये नींद नहीं बलके एक इंतहाई गहरा कोमा है
04:16कोमा? यानि suspended animation जैसी कोई चीज?
04:21बिलकुल, जिस्मानी अफाल की मुकम्मल मौत्तली, एक ऐसी हालत जहां जिस्म के तमाम functions को जबरदस्ती रोका गया हो
04:30आम नींद में तो दिमाग, दिल, निजामे निजाम सब चल रहा होता है
04:35हाँ, वो तो active होते हैं
04:36लेकिन यहां एक ऐसा mechanism इस्तमाल किया गया, जिसने उनके जिस्मानी निजाम को मुझमित कर दिया
04:43अरे वाह, ये तो बिलकुल ऐसा ही है जैसी मेरा computer freeze हो जाए
04:46मतलब जब वो hang हो जाता है तो मैं सिफ keyboard के button दबा के इंतिजार नहीं करता
04:50हाँ, आप उसे restart करते
04:52बिलकुल, मैं बाकाइदा उसका power button दबा कर रखता हूँ
04:56ताके hard reset हो सके
04:58यानि system को पूरी तरह से shutdown करके रोका जाए
05:01ताके वो reboot हो
05:03ये hard reset की तजबी यहां 100 फीसद fit बैठती है
05:07तो क्या हम कह सकते हैं
05:08कि उन अजसाम का भी कोई hard reset button दबाया गया था
05:12हैरत अंगेज तोर पर मतन बिलकुल
05:15इसी mechanism की तरफ इशारा करता है
05:17वहां बताया गया है
05:18कि उनके कानों पर जर्ब लगाई गई
05:20कानों पर जर्ब ये तो कोई
05:23महावरा लगता है के गहरी नीन
05:25सुला दिया बजाहर ऐसा ही लगता है
05:27लेकिन अगर medical science
05:28और anatomy के माहरीन से पूछें
05:31तो कान के बिलकुल पीछे
05:33एक उबरिवी हड़ी होती है
05:34जिसे mastoid process कहते हैं
05:37अच्छा mastoid process
05:38जी और इसी के करीब से
05:40इंसानी जिस्म की सबसे एहम नस
05:43vagus nerve गुजरती है
05:44ये नस दिमाग को
05:47सीधा दिल, फेपडों
05:48और निजामे इनहिजाम से जोडती है
05:50यानि ये vagus nerve दरसल
05:52वो main power cable है
05:54जो पूरे system को चला रही है
05:56बिलकुल सही समझे रब
05:58और medical science मानती है
06:00कि अगर इस vagus nerve पर
06:02एक मखसूस और नहायत
06:04नपी तुली चोट लगाई जाए
06:06या कोई खास frequency दी जाए
06:08तो क्या होगा?
06:09तो ये इनसान के
06:10parasympathetic nervous system को
06:12overdrive में भेज देती है
06:14blood pressure अचारक गिर जाता है
06:16दिल की धड़कन
06:17इंतहाई सुस्थ हो जाती है
06:18और इनसान का पूरा
06:19आसाबी निजाम
06:20एक लम्हे में
06:21shutdown होकर
06:22गहरे कोमा में चला जाता है
06:25यानि वो जो जरब थी
06:26उसने दरसल
06:27उनके आसाबी निजाम का
06:29heart reset button दबा दिया था
06:30ये तो वाकई जहन चक्रा
06:32देने वाली biological engineering है
06:34हाँ ये मुकमल तौर पर
06:36एक biological hack था
06:37लेकिन एक मिनिट
06:39यहाँ मेरे जहन में
06:40एक बहुत बड़ा scientific जोल आ रहा है
06:42मतलब एक confusion है
06:44जे बताएं क्या confusion है
06:45फर्स करें
06:46कि आसाबी निजाम बंद हो गया
06:48और वो कोमा में चले गए
06:49लेकिन कोमा में पड़ेवे
06:51मरीज का जिसम भी तो काम कर रहा होता है न
06:53उसे जिन्दा रहने के लिए
06:54तवनाई तो चाहिए
06:55बिल्कुल चाहिए
06:56इसलिए तो हस्पदालों में
06:58कोमा के मरीजों को
06:59डिप्स लगाई जाती है
07:00अगर मैं इसी को
07:06अगर मैं गाड़ी को
07:08गैराज में खड़ा कर दूँ
07:09और उसका इंजिन
07:10300 साल के लिए स्टार्ट छोड़ दूँ
07:12तो जाहरे चन दिनों में
07:14सारा फ्यूल जलकर खतम हो जाएगा
07:15हाँ और इंजिन सीज हो जाएगा
07:18बिल्कुल बगैर फ्यूल चलने से
07:20इंजिन तबाह हो जाएगा
07:21तो इन अचसाम के अंदर का जो इंजिन था
07:24उसने जिस्म को अंदर से क्यों नहीं खा लिया
07:27बहुत ही जबरदस सवाल है
07:28और यही वो मकाम है
07:30जहां ये तज्जिया हमें
07:32बायोलोजी की अगली और
07:34ज्यादा पेचीदा मनजर पर ले जाता है
07:36अच्छा तो उसका जवाब क्या है सोर्स के मुताबिक
07:39इस सवाल का जवाब
07:41एक और कदीम जुमले में छुपा है
07:43जहां कहा गया कि
07:44उनके दिलों को मजबूत कर दिया गया
07:46या बांध दिया गया है
07:48इसके लिए अर्भी लव्ज रबतना इस्तमाल हुआ है
07:51रबतना
07:52रवायती दौर पर तो हम इसे हिम्मत बंधाना समझते हैं न
07:55जी बिलकुल
07:56लेकिन मेडिकल नुकता नजर से
07:58रबतना का मतलब है
08:04या इस गाड़ी का इंजन सिर्फ स्लो नहीं किया गया था
08:08बलकि उसे मुकमल तोर पर बंध कर दिया गया था
08:10बिलकुल
08:11उनके दिल की धड़कन को सिफर पर लाया गया
08:14और खून की गर्दिश को मुकमल तोर पर मौतल कर दिया गया
08:17एक सेकेंड
08:18दिल की धड़कन सिफर
08:20बायोलजी का पहला उसूल तो ये है कि अगर दिल धड़कना बंद कर दे
08:24तो दिमाग को ऑक्सिजन मिलना बंद हो जाती है
08:26और चंद ही मिंटों ने ब्रेन डेथ हो जाती है
08:28ये बात आम हलात के लिए बिलकुल दुरुस्त है
08:31तो जीरो धड़कन पर तो कोई इंसान जिन्दा ही नहीं रह सकता
08:34इसका जवाब खलियाद और मेटबॉलिजम के काम करने के तरीके में है
08:38देखें आम हलात में दिमाग को ऑक्सिजन इसलिए चाहिए
08:42क्योंकि वो मुसलसल तवानाई खर्च कर रहा होता है
08:45यानि वो एक्टिव होता है
08:47लेकिन जैसा के हमने पहले बात की
08:49उनका आसाबी निजाम पहले ही वेगस नर्फ के जरिये शाटडाउन किया जा चुका था
08:55जब दिमाग का मेटबॉलिक रेट और तवानाई की जरूरत ही सिफर कर दी गई
09:00तो उसे ऑक्सिजन की जरूरत ही नहीं रही
09:02अरे वाह ये तो कमाल का लिंक है
09:04जी और जब दिल रुका तो जिसम में मेटबॉलिजम का अमल भी रुक गया
09:09मेटबॉलिजम वो अमल है जिसमें खलिये तूटते और नए बनते हैं
09:14तो जब खलियों की तूट फूट खतम हुई तो DNA का प्रोसेस भी रुक गया
09:18बिलकुल, DNA के सिरों पर मौजूट टीलोमेर्स का घिसना बंध हो गया
09:23और साइनसी तोर पर जब ये अमल रुकता है
09:25तो इनसान का उम्र बढ़ने का अमल यानि बुढ़ापा वही मुझमेद हो जाता है
09:31अब समझ आया, इसी लिए 300 साल बाद भी उन पर बुढ़ापा नहीं आया
09:35क्योंकि उनका बाइलोजिकल वक्त रोका जा चुका था
09:38जी, जिस्म का अंदरूनी निजाम मुकम्मल तोर पर सस्पेंड हो चुका था
09:42कमाल है, यानि हमने अंदर का निजाम तो संभाल लिया
09:45इंजिन बंद कर दिया, बैटरी निकाल दी और उम्र बढ़ने के अमल को फ्रीज कर दिया
09:50लेकिन अब जरा गेराज के माहौल पर भी तो गौर करें
09:53गेराज से आपकी मुराद वो गार है?
09:55जी, बिल्कुल, जिस्म के बाहर भी तो खतरात थे
09:58मतलब, ऑक्सिजन एक ऐसी जालिम चीज है
10:01जो किसी कटेवे सेब को चंद घंटों में काला करके सड़ा देती है
10:20जिससे खतरनाक बेड सोर्स बन जाते हैं और गोश्ट गल जाता है
10:24बिल्कुल, तो इन बैरूनी खतरात का क्या?
10:27क्या तज्जिये में इस हवाले से कोई सुराग मिलता है?
10:30बिल्कुल मिलता है, और मैं बताऊंगी कि ये हिस्सा सबसे जादा हैरान कुन है
10:34तज्जिये के मताबिक इस गार का अंदरूनी माहौल कोई आम गार जैसा था ही नहीं
10:40तो कैसा माहौल था वहाँ?
10:41वहाँ लवज फजुआ इस्तमाल किया गया है, जिसका मतलब है एक खुली और कुशादा जगा
10:47लेकिन बात सिर्फ कुशादगी की नहीं है
11:02तज्जिये में जो सबसे बड़ा दावा किया गया है
11:19वो ये है कि इस गार के अंदर कशिश सिकल यानी ग्राविटी को भी मौतल कर दिया गया था
11:26एक मिनिट एक मिनिट
11:27जमीन पर एक गार के अंदर जीरो ग्राविटी?
11:30जी हाँ, बिलकुल
11:32ये तो फिजिक्स के बुनियादी कावानीन की खुली खिलाव वर्जी है
11:35मतलब एक मखसूस जगा पर ग्राविटी कैसे खत्म हो सकती है?
11:39अगर ग्राविटी नहीं होगी तो अजसाम तो हमा में तैरने लगेंगे
11:42और यही तो वो नुक्ता है जो इस पूरे मन्जर को नामम्किन और हैबतनाग बनाता है
11:48जरा सोचें जिसमों को बेड सोर्स से बचाने का वाहिद साइंसी हल यही है
11:53कि उनका राप्ता किसी भी ठोस सता से खत्म कर दिया जाए
11:56तो आपका मतलब है कि दलब गार के उस हिस्से में तबई कवानीन को मौतल करके
12:01कशिश सकल को सिफर किया गया तो वो अजसाम जमीन पर पड़े हुए नहीं थे
12:06बिल्कुल नहीं वो चटान को चूही नहीं रहे थे
12:10ओ मेरे खुदाया अब जाकर मुझे इस रोब और धशत वाली बात की पूरी तरह समझ आ रही है
12:15अब जरा इस पूरे मनजर को एक फिल्मी सीन की तरह हम अपने जहन में लाएं
12:19हाँ जरा तसवर करें
12:21तसवर करें कि कोई इनसान उस तारीक गार में दाखिल होता है
12:24और वो क्या देखता है साथ इनसानी अचसाम
12:27दस फुट की बुलंदी पर हवा में मौल लख हैं
12:31वो जीरो ग्रेविटी की वज़े से हवा में तैर रहे हैं
12:33दाएं और बाएं हलके हलके जूल रहे हैं
12:36हाँ, उनके दिल रुके हुए हैं, वो सांस नहीं ले रहे
12:39और सोर्स ने जो सबसे ज़्यादा होलनाक बात बताई है
12:42वो ये कि चूँके पुठे रिलाक्स हो चुके थे
12:45तो उनकी आँखे पूरी तरह खुली हुई थी
12:48ये वाकई खौफनाक मनजर है
12:50जरा सोचें, साथ जिस्म हवा में तैर रहे हैं
12:54और अंधेरे में बगैर पलक छपकाए घूर रहे हैं
12:58जब एक आम इनसान का दिमाग किसी घार में कशिश सकल से पाक ऐसा नामुम्किन मनजर देखेगा
13:03जो जमीन के फिजिक्स की नफी कर रहा हो
13:06तो उसका दिमाग वाकई शौर्ट सर्किट हो जाएगा
13:09और वो वहां से चीखता हुआ ही भागेगा
13:11बिलकुल दुरुस्त तज्जिया किया आपने
13:13ये तो कमाल की बात है
13:15ये मनजर इनसानी दिमाग की प्रोसेसिंग पावर से बाहर था
13:18और अगर हम इस पूरी बहस को एक बड़े तनाजुर में देखें
13:22तो ये सब सुनकर ऐसा लगता है
13:24जैसे हम किसी बहुत ही एडवांस्ट खलाई तैजीब की बात कर रहे हूं
13:27हाँ किसी साइफाई मूवी की तरह
13:29लेकिन ये वीडियो तज्जिया हमें एक दम एक जबरदस्त मोड काट कर
13:34आज की दुनिया यानि 2026 में ले आता है
13:37वो बताता है कि ये कोई तिलिसमाती कहानी नहीं है
13:40तो आज के साइन्स का क्या तालुक है इससे?
13:42आज की जदी तरीन खलाई एजन्सियां बिलखुस नासा बिलकुल इसी मॉडल को कॉपी करने के लिए
13:48अर्बो डॉलर खर्च कर रही है
13:55जी हाँ बिलकुल वही
13:57नासा का सबसे बड़ा दर्दे सर इस वक्त तवील खलाई सफर है
14:02मरीख या उससे आगे जाने के लिए इनसानों को कई महीने या साल दरकार है
14:07जाहिर है अगर इनसान इतनी लंबे सफर पर जागता रहे
14:11तो उसे जिन्दा रखने के लिए टनों के हिसाब से खुराग, पानी और ऑक्सिजन चाहिए होगी
14:16और इसका वजन कोई भी रॉकेट नहीं उठा सकता
14:19इस मसले का वाहिद हल नासा ने क्रायो स्लीप की सूरत में निकाला है
14:24उनकी रिसर्च इस बात पर है कि किसी तरह इनसान के अंदरूनी दरजाए हरारत को इंतहाई कम कर दिया जाए
14:31और उसके आसाबी निजाम को सुन कर दिया जाए
14:34जी और दिल की धड़कुन को इतना सुस्त कर दिया जाए कि मेटाबॉलिजम तकरीबन सिफर हो जाए
14:39ताके खलानावर्द बगेर खुराक और पानी के सालों तक कैपसूल में महफूज रह सकें
14:45मतलब तजजिया हमें ये बताता है कि जिस टेकनॉलोजी की बुनियाद आज की जदीद साइंस रख रही है
14:52उस बायोलोजिकल सस्पेंशन का मुकमल ब्ल्यूपरिंट उस कदीम तहरीर में सदियों पहले बयान कर दिया दिया था
14:58पूरी दुरुस्ती के साथ
15:00ये बात अपने आप में एक बहुत बड़ा इनकिशाफ है
15:02और यहां इस तज्जिये में एक ऐसी मिसाल पेश की गई है
15:06जिसने मुझे वाकई हैरान कर दिया
15:08वो कुते वाली मिसाल?
15:10हाँ, एक जबरदस रब्त काइम किया गया है
15:13हमने बात की कि इस वाक्य में उन नौजवानों के साथ उनका एक कुता भी मौजूद था
15:18जी, बिल्कुल
15:19अब जरा आज की इनसानी तारीख पर गोर करें
15:221957 में जब सोवित यूनियन ने इनसानों को पहली बार खला में भेजने का इरादा किया
15:28तो क्या उन्होंने बराहरास्त इनसानों को रॉकेट में बिठा दिया था?
15:31बिल्कुल नहीं, उन्होंने तो एक जानवर को भेजा था
15:34जी, उन्होंने जीरो ग्रैविटी और खलाई सफर के असराद जाचने के लिए
15:39सबसे पहले जिस जिन्दा मखलूक को खला में भेजा, वो लाईका नामी एक कुता था
15:44वागई? ये कितनी नाकाबिल यकीन मुमास्लत है
15:47जदीद साइंस में, इन्सानों के जीरो ग्रैविटी के सफर से पहले एक कुत्टे ने वो सरहत पार की
15:53और इस गार के जीरो ग्रैविटी महोल में भी इन इन्सानों के साथ एक कुता मुझूद था
15:58ये मुमासलत महज इत्तिफाक नहीं लगती
16:00बिल्कुल ये बहुत गहरा कनेक्शन है
16:03मैं समझती हूँ ये तमाम मालूमात हमें एक बहुत गहरा सबक सिखाती है
16:07जब हम जदीद इल्म, साइंस और कदीम हवालों को एक दूसरे से अलग रखने के बजाए
16:12उन्हें एक साथ मिला कर परकते हैं तो काइनात को देखने का हमारा नजरिया वसी हो जाता है
16:18हाँ, हमारा पस्पेक्टिव बदल जाता है
16:20इल्म के जिस्तजू में रहने वालों के लिए ये जानना इंतहाई एहम है कि काइनात के वो तबई कवानी और
16:27इंसानी बकाके जो पेचीदा तरीन तरीके आज लाबरिटरीज में इजाद किये जा रहे हैं
16:31उनके तसवरात और उनकी बुन्यादों पर सदियों पहले ही गुफ्तगू हो चुकी है
16:35इसका मतलब ये है कि इल्म की कोई हद नहीं और ये एक मसलसल इर्तकाई सफर है जो माजी और
16:41मुस्तक्बिल को जोड़ता है
16:43बिल्कुल सही कहा आपने
16:44खैर आज के इस तफसीली जाइजे से हमने ये तो बहुभी जान लिया कि इस पुरसरार गार के अंदर बायॉलजी,
16:52मेटाबॉलिजम, आक्सिजन और कशिश सुखल के तमाम तबी कवानीन को किस हैरतंगे इस तरीके से हैक करके रोका गया था
16:59एक मुकमल साइनसी शाहकार की तरहा
17:02लेकिन इस से पहले के हम आज की इस निशिस्ट को खतम करें एक ऐसा सवाल है जो मुसलसल मेरे
17:08जहन में गर्दिश कर रहा है
17:09वो क्या सवाल है?
17:10जरा इस बारे में सोचिए अगर उस गार की देहलीज पर फिजिक्स, बायालिजी और कशिश सकल के तमाम उसूल मौतल
17:18कर दिये गए थे
17:19तो क्या ऐसा मुम्किन है कि वहां एक और चीज़ की रवानी भी रुक चुकी हो?
17:24आपका इशारा किस तरफ है?
17:26देखें, अगर एक मक्सूस जगा पर कशिश सकल मुकमल तौर पर सिफर है और जिन्दगी हर लिहाज से जमी हुई
17:33है, तो आइंस्टाइन की थेरी ओफ रिलेटिविटी के मुताबिक, क्या उस गार के अंदर उनके लिए वक्त का पहिया भी
17:40थम चुका था?
17:43जी हाँ, क्या वक्त ने भी उनके लिए अपनी रफ्तार सिफर कर दी थी, जिसकी वज़ा से उन्हें 300 साल
17:49सिर्फ चंद घंटे मैसूस हुए? ये एक ऐसा सवाल है, जो किसी भी सोचने वाले दिमाग के लिए तहकीक की
17:55एक बिलकुल नई खिड़की खोल सकता है.
17:57और शायद यही वो सबसे बड़ा राज है, जो आज भी उस गार के अंधेरों में कहीं हमारी खोज का
18:03मुंतजर है.
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