00:00भीश्म पितामह की मृत्यू का रहस्य
00:05पिता शांतनु ने अपने पुत्र भीश्म की कठिन प्रतिग्या से प्रसन्न होकर उन्हें इच्छा मृत्यू का अद्भुत वर्दान दिया था,
00:14जिससे यम्राज भी उनकी अनुमती के बिना प्राण नहीं ले सकते थे.
00:21महाभारत के भीशन युद्ध में भीश्म अजे थे, तब श्री क्रिश्न की योजना के अनुसार अर्जुन ने शिखंडी को अपनी
00:28धाल बनाया क्योंकि भीश्म किसी स्त्री या नपुनसक पर वार नहीं करते थे.
00:35शिखंडी को सामने देख भीश्म ने अपने शस्त्र त्याग दिये और इसी मौके का फाइदा उठा कर अर्जुन ने बानों
00:42की वर्षा कर उन्हें बानों की शया पर सुला दिया.
00:47बानों की शया पर तड़पते हुए भीश्म को श्री कृष्ण ने बताया कि यह पीडा उनके पिछले जन्म के एक
00:54छोटे से पाप का फल है, जब उन्होंने एक मासूम कीडे को कांटों में फैंका था.
01:02बीश्म ने अपनी मृत्यू के लिए सूर्य के उत्तरायन होने का धैर्यपूर्वक इंतजार किया, क्योंकि शुप समय में प्राण त्यागना
01:10मोक्ष का मार्ग प्रशस करता है.
01:14अंतता उन्होंने पांडवों को राजनीती और विश्नु सहस्रनाम का ज्यान दिया और अपनी इच्छा के अनुसार इस नश्वर संसार को
01:22त्याग कर मोक्ष प्राप्त किया.
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