00:00दिव्य धनुष गांडीव की अद्भुद का था
00:04खांडव वन की भीशन अगनी के बीच, अगनीदेव ने वरुन देव के माध्यम से अर्जुन को यह शक्तिशाली दिव्य धनुष
00:11प्रदान किया था
00:13गांडीव की टंकार इतनी भयानक थी कि उससे तीनों लोग काम उठते थे और इसकी प्रत्यंचा को कोई नहीं काट
00:20सकता था
00:22पौरानिक कथाओं के अनुसार इस अजे धनुष का निर्मान महर्शी दधीची की पवित्र और दिव्य अस्थियों से किया गया था
00:31अर्जुन के पास दो अक्षय तरकश थे जिनमें बान कभी समाप नहीं होते थे जिससे वहाँ अनन्त युद्ध कर सकता
00:37था
00:39यहाँ धनुष धर्म की विजय का प्रतीक था जिसका सम्मान स्वयम ब्रह्मा, शिर्फ और इंद्र जैसे महान देवताओं ने भी
00:46किया
00:49महाभारत युद्ध के बाद अगनिदेव की आग्या मानकर अर्जुन ने इस दिव्य गांडीव को वापस गहरे समुद्र में विसरजित कर
00:56दिया
00:56विनो क्लिप्स को लाइक और सब्सक्राइब करें
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