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  • 2 days ago
अर्द्धकुवारी गुफा (जिसे गर्भजून भी कहा जाता है) माता वैष्णो देवी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता वैष्णो देवी ने भैरवनाथ से छिपकर इस गुफा में 9 महीने तक तपस्या की थी। यह गुफा मां के गर्भ के समान है और मान्यता है कि जो भक्त इसमें से गुजरते हैं, वे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाते हैं।
Transcript
00:00Ardhakuwareegufa
00:04Ardhakuwareegufa Mata Vyashno Devi की yatra का
00:07एक महत्वकूर हिस्सा है
00:08जिसे गर्भजून भी कहा जाता है
00:11यहाbits Mata Vyashno Devi ने
00:13bhaReadav Nonetheless से छिप कर
00:159 महिने तक तपस्या की थी
00:19Bhauep sociedad prim тел
00:20Mata Vyashno Devi के पीछे पढ़ा
00:22तो माता ने उस दुष्ट से
00:24बचने के लिए
00:25गुफाओं का मार्ग लिया, वे कट्रा से उपर त्रिकुटा पर्वत की और बड़ी।
00:32अर्थकुवारी नामक स्थान पर माता ने एक संकरी गुफा में प्रवेश किया और वहां 9 महिने तक ध्यानमगन होकर तपस्या
00:39की, यह गुफा गर्ब के आकार की है।
00:449 महिने की तपस्या के बाद माता ने गुफा के दूसरी तरफ से रास्ता बना कर बाहर आई और उन्होंने
00:51भैरवनात को चेतावनी दी, अंत में उन्होंने भैरोनात का वद कर दिया।
00:5710 गुफा से जुड़ी मान्यताएं, गर्भजून का महत्व, गुफा का रास्ता बहुत संकरा है।
01:05भक्तों का मानना है कि रेंकर गुफा में प्रवेश करना और निकलना आध्यात्मिक शुद्धी और पुनरजन का प्रतीक है।
01:1310 गुफा मा के गर्भ के समान है, और मान्यता है कि जो भक्त इसमें से गुजरते हैं, वे पुनरजन
01:31के चक्र से मुक्थ हो जाते हैं।
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