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  • 2 days ago
Eklavya (Mahabharat )story of his rebirth एकलव्य (महाभारत) के पुनर्जन्म की कहानी
Transcript
00:00एकलव्य का पुनर्जन
00:03पहले जन्म में एकलव्य असुरहंस के रूप में द्रोण के पूर्वजों का घोर शत्रू था, उसकी दैत्य शक्ती और पंखों
00:12की गून सुनाई देती थी.
00:15एकलव्य ने द्रोणाचार्य से धनुर्विद्या सीखने की विंती की, परंतु वह उसे अपने शिश्य के रूप में स्वीकार नहीं कर
00:23सका क्योंकी वह निशाद वन्ज का था.
00:27द्रोण की मूर्थी बनाकर एकलव्य ने अकेले ही निरंतर अभ्यास किया, उसकी तीरंदाजी अध्वितिय बन गई और वह सबसे श्रेष्ट
00:37धनुर्धर बन गया.
00:40जब द्रोणाचार्य को एकलव्य की असाधारन कौशल का पता चला, तो उन्होंने उसकी परीक्षा के रूप में दाहिना अंगुठा मांगा,
00:49जिससे उसकी शक्ती में बाधा आई.
00:53अपमान का बदला लेने के लिए एकलव्य ने राजा जरासंद के साथ गट बंधन किया, परन्तु महाभारत के युद्ध से
01:01पहले भगवान क्रिश्ण ने उसे एक ही तीर से मार गिराया, जिससे वहा अधर्म से मुक्त हो गया.
01:10मृत्योप्रांथ एकलव्य का पुनरजन ध्रिश्ट द्यूम्न के रूप में हुआ, जो द्रोण आचार्य को मारने और उसके विरुत बदला लेने
01:18के लिए जन्मा था, और वह 15 वर्ष की उम्र में ही द्रोण को घातक वार करता है.
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