00:04हिंदु धर्म में जीवन का खरशण एक विशेश संसकार से जुड़ा हुआ है जन्म से लेकर मृत्यू तक इनी में
00:12से एक ऐसा संसकार है जो अक्सर प्रश्न बनकर सामने आता है
00:15मृत्यू के बाद मुंदन क्यों किया जाता है कई लोगों के मन में ये जानने की जग्यासा जरूर रही है
00:21कि परिवार या रष्टदार के जाने के बाद आखर सर के बाल क्यों उतारे जाते हैं
00:26दरसल ये परमपरा सर्फ एक सामाजी के अधार्मिक नियम नहीं बलकि आध्यात्मिक और पौरानिक दुरुष्टी से गहराई से जुड़ी है
00:33गरुण पुरान में इसका विस्तार से उलेख है जुसमें बताया गया है कि सर के बाल नकारात्मक उर्जा को आकरशुत
00:40करते हैं
00:41जब किसी परिवार में मृत्यू होती है तो समय वातावरन में मृत्यू की उर्जा सक्रिय रहती है
00:46ऐसे में बाल मुंडवाकर व्यक्ति उस उर्जा के प्रभाव से खुद को दूर कर लेता है
00:52मुंडन को अहंकार और ममता के त्याग का प्रतीक भी मानते हैं
00:56बाल कटवाना एक तरह से सांसारिक मुहमाया से दूरी बनाने का प्रतीक हैं
01:01जो मृत्व्यक्ति के प्रति गहरे भाव को त्याग कर आत्मा की शांती के लिए किया जाता है।
01:31झाल झाल
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