00:06बक्राइद का तेवार आते ही बहुत से लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है
00:09अगर हम बक्रे की कुर्बानी ना कर पाए तो क्या होगा?
00:11क्या गुना मिलेगा? क्या सिर्फ पैसा दान कर देने से कुर्बानी हो जाएगी?
00:14और अगर पैसे कम हो तो क्या कोई दूसरा तरीका है
00:17आज हम कुरान, हदीस और उल्मा एकराम की रोशनी में इस पूरे मसले को समझेंगे
00:21हर मुसल्मान पर कुर्बानी जरूरी नहीं होती
00:23इसलाम के मताबिक कुर्बानी उस मुसल्मान पर वाजिब होती है
00:37अगर पैसा ही ना हो तो अगर किसी के पास घर चलाने के लिए मुश्किल से पैसे हो
00:41कर्स ज्यादा हो, नौकरी ना हो, या आर्थिक हालात कमजोर हो
00:44तो ऐसे इनसान पर कुर्बानी वाजिब नहीं होती
00:46अगर किसी जान पर उसकी ताकत से जादा बोज नहीं डालता
00:50यानि अगर मजबूरी है तो अल्ला इंसान की हालत को जानता है
00:53ऐसे में सवाल आता है कि क्या कुर्बानी ना करने से गुना होगा
00:56अगर किसी पर कुर्बानी वाजिब थी और जान बूच कर नहीं की
01:12तो आप भैस या उट की ग्रबानी में
01:14हिसा ले सकते हैं
01:15एक बड़े जानवर में 7 लोग हिसा ले सकते है
01:17इससे कम पैसों में भी सुननत तरीके से
01:19ग्रबानी की जाती है
01:20यह सवाल बहुत लोग पूछते है
01:22क्या पैसे दान कर देने से क�ॉरबानी हो जाएगी
01:24उलेमा एकराम के मताबिक अगर किसी पर कुर्बानी वाजब है तो सिर्फ पैसे दान कर देने से कुर्बानी अदा नहीं
01:29होगी
01:29कुर्बानी की जगा सिर्फ सद्का काफी नहीं माना जाता लेकिन जो गरीब और उस पर कुर्बानी जरूरी नहीं
01:35वो घरीबों की मदद कर सकता है, खाना खिला सकता है, सद्का कर सकता है, अगर कुर्बानी ना कर पाएं
01:40तो क्या करें?
01:40अगर मजबूरी की वज़ा से कुर्बानी नहीं हो पा रही तो इंसान को चाहिए कि यीद की नमास पढ़े, अल्ला
01:45का जिकर ज्यादा करे, गरीबों और जरुवतमंदों की मदद करे, दिल से तौबा और दुआ करे, अपने अंदर की बुराईयों
01:51की कुर्बानी दे, क्योंक
01:52असली मकसद सिर्फ जानवर काटना नहीं, बल्कि अल्ला की फर्मर बर्दारी है, अगर आपकी नियाद अच्छी है लेकिन मजबूरी है,
02:04तो अल्ला आपकी हालत को जानता है, तो हर इंसान की हालत एक जैसी नहीं होती, कुछ लोग आसानी से
02:09कुर्बानी कर लेते हैं, कु�
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