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Eid Ul Adha 2026: ईद-उल-अजहा, जिसे भारत में आमतौर पर बकरीद कहा जाता है, इस्लाम धर्म का एक बेहद अहम और पवित्र त्यौहार माना जाता है. हर साल दुनियाभर के मुसलमान इस दिन नमाज अदा करते हैं, कुर्बानी देते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं.भारत में ज्यादातर लोग इसे बकरीद के नाम से जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि आखिर इस त्योहार का नाम बकरीद क्यों पड़ा और इसका असली मतलब क्या है.

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Transcript
00:04इद अजाज जिसे भारत में आमत्वार पर बकराईद का जाता है
00:07इस्लाम धर्म का बेहद एहम और पाक तेवहार मना जाता है
00:11हर साल दुनिया भर के मुसलमान इस दिन नमज अदा करते हैं
00:13कुर्बानी देते हैं और ज़रुरतमंदों की मदद करते हैं
00:16भारत में जादातर लोग इसे वक्रैईिद के नाम से जानते हैं लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि आखर
00:21ist तेवहार का णाम वक्रैईिद क्यु पड़ा और इसका असली मतलब क्या है।
00:24कई लोगों को लगता है इसका संबन सिर्फ बक्रे की कुर्बानी से है जबकि इसके पीछे धार्मिक और इतिहाजिक वज़ा
00:29भी जुड़ी हुई है
00:30इस साल भारत में बक्राईद 28 माई 2026 को मनाई जा रही है
00:33ऐसे मैं ये जानते हैं कि बक्राईद का नाम आखिर बक्राईद क्यों रखा गया और इसके पीछे की असली वज़ा
00:38क्या है
00:38क्यों मनाई जाती है बक्राईद
00:40बक्राईद का असली नाम एदुल अज़ा है
00:42अरबी भाशा में ईद का मतलब तेवहार होता है
00:45और अज़ा का मतलब कुर्बानी या बलिदान माना जाता है
00:48इसलिए एद अज़ा को कुर्बानी का तेवहार भी कहा जाता है
00:51वहीं भारत पाकिस्तान और कुछ दूसरे देशों में इसे बकराईद कहा जाता है
00:55साथ ही माना जाता है कि बकरी या बकरे की कुर्बानी ज्यादा होने की वज़ा से लोगों ने इसे बकराईद
00:59कहना शुरू कर दिया
01:00इस तवहर की शुरुआत हजरत इबराहीम और उनके बेटे हजरत इसमाईल की कहानी से जुड़ी हुई है
01:05इस्लामिक मानिता के मुदाबिक अल्ला ने हजरत इबराहिम का इम्तिहान लेने के लिए उन से उनकी सबसे प्यारी चीज़ कुर्बान
01:12करने को कहा
01:13हजरत इबराहिम के लिए उनके बेटे हजरत इसमाईल सबसे ज्यादा अजीज थे
01:17उन्होंने अल्ला की हुक्मों को मांते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया
01:21लेकिन जब वो कुर्बानी देने लगे तब अल्ला ने उनकी सचे नियत देखकर हजरत इसमाईल की जगा एक द은बा भीज
01:27दिया
01:27उसी दिन से कुर्बानी की परंपरा शुरू मानए जाती है
01:30बकराईद पर सिर्फ बकरे की ही कुर्बानी नहीं दी जाती है
01:33Islamik नियामों के मुताबिक बकरा, बकरी भीड़, दुम्बा, भैंस
01:36और उंट जैसे कुछ जानवरों की कुर्बानी दी जा सकती है
01:40अलागि भारत में बकरे की कुर्बानी ज्यादा देखने को मिलती है,
01:42इसलिए लोगों के बीच इसका नाम बकरई ज्यादा फेमस हो गया है।
01:45कुर्बानी के लिए जानवर का स्वस्त और तैय उम्र का होना जरूरी माना जाता है।
01:49बकलाई सिर्फ जानवर के कुरवानी का तेवहार नहीं
01:51इसका असली मतलब सैक्रिफाइज, इंसानियत और अल्ला के लिए समढ़ पर से जुड़ा है
01:56ये तेवहार लोगों को सिखाता है कि इंसान को अपने अंदर के लालज, खमंड और बुराईयों को खत्म करना चाहिए
02:01जरुरतमंदों की मदद करना और समाज में भाईचारा बढ़ाना भी इस तेवहार का एहम हिस्सा बन जाता है
02:06इसलामिक परंपरा के मताबिक कुर्बानी के बाद गोश्ट को तीन बराबर हिस्सों में बाटा जाता है
02:10जिसमें पहला हिस्सा गरीब जरुरतमंदों के लिए रखा जाता है
02:13दूसरा हिस्सा रिष्टेदारों और दोस्तों को दिया जाता है
02:30जानवरों को तकलीफ ना दी जाए, बिमारिया कमजोर जानवर की कुर्बानी ना की जाए
02:33वही फोटो और वीडियो सोचल मीडिया पर शेयर ना किये जाए
02:36इसके लावन अगर निगम और इस्थानी प्रिशासन की नियमों का पालन करना चाहिए
02:40साथी कुर्बानी के बाद साफसफाई का भी दिहान रखना चाहिए
02:42इस वीडियो में फिलाल इतना ही आप क्या कहना चाहेंगे
02:44कॉमेंट सेक्षन में हमें लिक कर जरूर बताएं
02:46वीडियो को लाइक करें शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिलकुल ना भूलें
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