00:04इद अजाज जिसे भारत में आमत्वार पर बकराईद का जाता है
00:07इस्लाम धर्म का बेहद एहम और पाक तेवहार मना जाता है
00:11हर साल दुनिया भर के मुसलमान इस दिन नमज अदा करते हैं
00:13कुर्बानी देते हैं और ज़रुरतमंदों की मदद करते हैं
00:16भारत में जादातर लोग इसे वक्रैईिद के नाम से जानते हैं लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि आखर
00:21ist तेवहार का णाम वक्रैईिद क्यु पड़ा और इसका असली मतलब क्या है।
00:24कई लोगों को लगता है इसका संबन सिर्फ बक्रे की कुर्बानी से है जबकि इसके पीछे धार्मिक और इतिहाजिक वज़ा
00:29भी जुड़ी हुई है
00:30इस साल भारत में बक्राईद 28 माई 2026 को मनाई जा रही है
00:33ऐसे मैं ये जानते हैं कि बक्राईद का नाम आखिर बक्राईद क्यों रखा गया और इसके पीछे की असली वज़ा
00:38क्या है
00:38क्यों मनाई जाती है बक्राईद
00:40बक्राईद का असली नाम एदुल अज़ा है
00:42अरबी भाशा में ईद का मतलब तेवहार होता है
00:45और अज़ा का मतलब कुर्बानी या बलिदान माना जाता है
00:48इसलिए एद अज़ा को कुर्बानी का तेवहार भी कहा जाता है
00:51वहीं भारत पाकिस्तान और कुछ दूसरे देशों में इसे बकराईद कहा जाता है
00:55साथ ही माना जाता है कि बकरी या बकरे की कुर्बानी ज्यादा होने की वज़ा से लोगों ने इसे बकराईद
00:59कहना शुरू कर दिया
01:00इस तवहर की शुरुआत हजरत इबराहीम और उनके बेटे हजरत इसमाईल की कहानी से जुड़ी हुई है
01:05इस्लामिक मानिता के मुदाबिक अल्ला ने हजरत इबराहिम का इम्तिहान लेने के लिए उन से उनकी सबसे प्यारी चीज़ कुर्बान
01:12करने को कहा
01:13हजरत इबराहिम के लिए उनके बेटे हजरत इसमाईल सबसे ज्यादा अजीज थे
01:17उन्होंने अल्ला की हुक्मों को मांते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया
01:21लेकिन जब वो कुर्बानी देने लगे तब अल्ला ने उनकी सचे नियत देखकर हजरत इसमाईल की जगा एक द은बा भीज
01:27दिया
01:27उसी दिन से कुर्बानी की परंपरा शुरू मानए जाती है
01:30बकराईद पर सिर्फ बकरे की ही कुर्बानी नहीं दी जाती है
01:33Islamik नियामों के मुताबिक बकरा, बकरी भीड़, दुम्बा, भैंस
01:36और उंट जैसे कुछ जानवरों की कुर्बानी दी जा सकती है
01:40अलागि भारत में बकरे की कुर्बानी ज्यादा देखने को मिलती है,
01:42इसलिए लोगों के बीच इसका नाम बकरई ज्यादा फेमस हो गया है।
01:45कुर्बानी के लिए जानवर का स्वस्त और तैय उम्र का होना जरूरी माना जाता है।
01:49बकलाई सिर्फ जानवर के कुरवानी का तेवहार नहीं
01:51इसका असली मतलब सैक्रिफाइज, इंसानियत और अल्ला के लिए समढ़ पर से जुड़ा है
01:56ये तेवहार लोगों को सिखाता है कि इंसान को अपने अंदर के लालज, खमंड और बुराईयों को खत्म करना चाहिए
02:01जरुरतमंदों की मदद करना और समाज में भाईचारा बढ़ाना भी इस तेवहार का एहम हिस्सा बन जाता है
02:06इसलामिक परंपरा के मताबिक कुर्बानी के बाद गोश्ट को तीन बराबर हिस्सों में बाटा जाता है
02:10जिसमें पहला हिस्सा गरीब जरुरतमंदों के लिए रखा जाता है
02:13दूसरा हिस्सा रिष्टेदारों और दोस्तों को दिया जाता है
02:30जानवरों को तकलीफ ना दी जाए, बिमारिया कमजोर जानवर की कुर्बानी ना की जाए
02:33वही फोटो और वीडियो सोचल मीडिया पर शेयर ना किये जाए
02:36इसके लावन अगर निगम और इस्थानी प्रिशासन की नियमों का पालन करना चाहिए
02:40साथी कुर्बानी के बाद साफसफाई का भी दिहान रखना चाहिए
02:42इस वीडियो में फिलाल इतना ही आप क्या कहना चाहेंगे
02:44कॉमेंट सेक्षन में हमें लिक कर जरूर बताएं
02:46वीडियो को लाइक करें शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिलकुल ना भूलें
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