00:03बक्राइद यानि एदुलधा को लेकर भारत में तारीख लगबग कन्फरम हो चुकी है
00:07दिल्ली की जामा मस्जित के शाही इमाम सेथ शाबान बुखारी ने एलान किया है कि इस साल भारत में बक्राइद
00:1128 मई बरोज जुमरात को मनाई जाएगी
00:14ऐसे में जैसे जैसे कुर्बानी के दिन करीब आ रहे हैं एक सवाल सोशल मीडिया पर सबसे ज़ादा पूछा जा
00:19रहा है
00:20कुर्बानी से पहले दस दिनों तक बाल और नाहून क्यों नहीं काटे जाते
00:24क्या ये सिर्फ एक रिवाज है या इसके पीछे कोई हदीस और गहरी इसलामिक हिकमत मौजूद है
00:29आज की इस वीडियो में हम यही जानने की कोशिश करेंगे
00:32सबसे पहले बात करते हैं कि ये बात कहां से आई है
00:34ये मसला किसी सोशल मेडियो पोस्ट से नहीं आया बलकि इसकी बुनिया एक सही हदीस पर है
00:39हजरत अमे सलिमा रदियल्लाव तालाहन हां से रिवायत है कि नभी करीम ने फर्माया
00:45जब जलहजा के 10 दन शूरू हो जाए और तुम में से कोई क�ुरबानी का इरादा रखता हो
00:50तो वो अपने बाल और नाखून ना काटे जब तक क��ुरबानी ना कर ले
00:53यानि जो इनसन कूरबानी करने वाला हो
00:55उसे एक जिलहज़ा से लेकर कुर्बानी होने तक बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए
01:00अब सवाल आता है आखिर ऐसा क्यों कहा गया
01:03इसलामी के स्कॉलर्स बताते हैं कि इसके पीछे कई हिकमते हैं
01:06पहली अबादत और कुर्बानी का एहसास
01:09जिस तरह हज करने वाले लोग एहराम की हालत में कुछ चीजों से बचते हैं
01:12उसी तरह कुर्बानी करने वाला इनसान भी इन दिनों खुद को अल्ला की अबादत में जोड़ता है
01:17दूसरा है सुनना को फॉलो करना
01:19ये अमल सीधे नभी अल्ला की हदीश से साबित है
01:22इसलिए करोड़ों मुसल्मान इसे सुनना समझ कर फॉलो करते हैं
01:27तीसरा है स्प्रिच्ट्वल डिसिप्लिट
01:28इन दस दिनों को इसलाम में बेहत मुबारक माना गया है
01:31इन दिनों इनसान अपने नफस पर कंट्रोल करना सीखता है
01:34अब यहां सबसे बड़ा कंफ्यूजन होता है
01:36बहुत लोग सोचते हैं कि पूरे घर को बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए
01:40लेकिन ज्यादातर स्कॉलर्स के मताबिक
01:42यानि हम सिर्फ उस इनसान पर लागू होता है जो कुर्बानी कर रहा है
01:45यानि अगर घर में सिर्फ पिता कुर्बानी कर रहे हैं
01:48तो बाकी फैमली मेंबर्स पर ये जरूरी नहीं
01:50अब मान लीजे किसी ने भूल कर नाखून काट लिए
01:52तो क्या उसकी कुर्बानी नहीं होगी
01:54जवाब है कुर्बानी फिर भी वैलिड रहती है
01:56किसी तरह का कफारा नहीं देना पड़ता
01:59स्कॉलर्स कहते हैं कि
02:00इनसान तौबा और इस्तखवार कर ले
02:02हलांकि इस मुद्दे पर अलग-अलग
02:04Islamic Schools of Thoughts की अलग राय है
02:06कुछ स्कॉलर्स इसे बहुत जरूरी मानते हैं
02:08कुछ इसे सुनना और रेकमेंडिट बताते हैं
02:10जबकि कई स्कॉलर्स के मताबिक इसे छोड़ना गुना नहीं है
02:13तो कॉर्बानी से पहले
02:15बाल और नाखुन ना काटना
02:16मकसद सिर्फ अपियरंस नहीं
02:18बलकि अल्ला की इबादत सुनना और स्पिच्ट्रल डिसिप्लिन से जड़ा हुआ है
02:22अगर आप कुर्बानी करने वाले हैं
02:23तो कोशिश करें कि इस सुनना को फॉलो करें
02:27हमें कॉमेंट में बताएं किया आप कुर्बानी करने जा रहे हैं
02:30और क्या आप भी इस सुनना को फॉलो करेंगे
02:33वीडियो पसंद आया हो तो इसे लाइक करें शर करें
02:35और चैनल को सब्सक्राइब करना बिलकुल न भूले
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