00:00अचरी जी आपने जो रास्ता चुना है वो रुबेलियन था या रियलाइजेशन?
00:31गीता आती है जब जीवन में तो बड़ा भारी विद्रोह उतरता है गजब की करांते हो जाती है लिकिन जो
00:42हमारा घरेलू और पालतू किस्म का धर्म और अध्यात्म होता है उसमें हम घर बैठे ब्रह्मक्य हो जाते हैं और
00:51उनसे पूछो तू आज भी बिल्कुल वैसे ही जी
01:01तेरी माननेताओं में और तेरे दादा पर दादाओं की माननेताओं में भी धेले का अंतर नहीं आया है पर तू
01:07कहता है कि तुम मुक्त है अगर तुम मुक्त हो तो फिर बंधन किसको कहते हैं और जैसा जीवन तुमने
01:15जिया बंधनों में घिरा हुआ वैसा ही जीवन बलकि
01:20जीने के लिए तुम अपने बच्चों को भी बाध्य करते हो और सोशल मीडिया पर जाकर दूसरों पर भी तुम
01:27वही बंधन लादते हो लेकिन अपने भारें में तुम्हारा दावा है कि तुम मुक्त पुरुश हो ये कौन सी मुक्ति
01:36है जो बिना विद्रोह के आ गई है क्यो
01:48तो बस लाश होती है मुक्त होने के लिए जीवन चाहिए धड़कता हुआ दिल चाहिए विद्रोह चाहिए आग चाहिए
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