00:00आज आज आपिक था इंडियन ट्रादिशन यूथ
00:02जो प्रादिशन पर प्रादिशन अब फिलोशो फूट
00:08देखिए शुरुवात तो उसको करनी पड़ेगी
00:12जिसको भारतिये दर्शन समझ में आने लगा है
00:16आज मैं कह रहा था ना दर्शन एक तो हर वेक्ति होता है
00:19बस हमने किसी छूटी चीज को किसी थोड़े से निचले स्थर की चीज को
00:24दर्शन ही कहकर पकड़ लिया होता है उसको सत्यमाने बैठे होते हैं
00:28तो आज ऐसे लोग चाहिए कि जो लोक दर्शन है जो पॉप फिलोसफी है उसको चुनौती दे सकें
00:34ठीक है यही तरीका है लोगों तक सच्चा दर्शन लाने का
00:38अगर किसी व्यक्ति को ही लग रहा है कि वो जो विचार लेकर चला है जिन्दगी का जो नमूना वो
00:43पकड़कर बैठा है
00:44जो उसके पास मेंटल मॉडल है आदर्श है कलपनाई है बविश की योजनाई है और उसको लगता है यह सब
00:50बिलकुल बढ़ी आया ठीक है
01:05तुम बताओ अपने आपको क्या मानते हो जिन्दगी को क्या मानते हो प्रत्वी को क्या मानते हो और आगे भविश
01:11में क्या करना चाहते हो बताओ और उस पर चर्चा होनी चाहिए
01:13तो इस तरीके से लोग जो मानिताइं कलपनाएं पकड़कर बैठे हैं उनको थोड़ी चुनौती मिलेगी जब चुनौती मिलती है न
01:20तो एक खाली जगा तयार होती है जिसमें फिर उंचा दर्शन उतर सकता है
01:27पूरा पूरा अरे मनुष्य चेतना के अतरिक्त और कुछ नहीं मनुष्य पश्रों से इसलिए भिनने है क्योंकि हमारे पास एक
01:36चेतना है इसलिए आदमी के लिए रोटी कपड़ा मकान से कहीं ज़्यादा जरूरी एक अर्थ में शिक्षा है क्योंकि शिक्षा
01:44ही तो है जो च
01:47बिंताओं से मुक्तकर आती है
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