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Transcript
00:12इतना प्रेम बहुत कम लोगों में होता है कि वो तुम्हारी कमजोरियां गिनाएं और फिर तुम्हारे साथ जान लगाकर उन
00:19कमजोरियों से मुक्ति का अभियान भी चलाएं
00:22इस जो साधारन प्रेमी होते हैं शरीर के तलवाले
00:24इनको तो अबर पता होगा कि तुम्हें कोई चीज पसंद नहीं है या कहीं पर तुम कमजोर हो ये उस
00:29जगे की बात ही नहीं करें कहेंगे कि इससे वह बाते करो तो इसका मूड खराब हो जाता है इससे
00:33वह बात करनी ही नहीं है
00:34इसका मूड खराब हो जाता है तो फिर हमें उससे मिलता नहीं जो इससे हमें चाहिए
00:37जिन्दगी में कोई भी निर्णे इसलिए किया जाता है ना कि तुम बहतर बन पाओ
00:41तो शादी भ्या कर निर्णे भी इसी हिसाब से करो कि बहतर बन पाओ
00:44इसलिए नहीं करना है शादी, कि जिन्दगी में कोई आ जाएगा, उससे घर भर जाएगा, कुछ शारीरिक सुख मिलने लगेगा,
00:50यह सब तुच्ची बात है
00:52प्रेम का मतलब यह नहीं, मैं तुभे खुश रखो तो मुझे खुश रखो, बिल्कुल भी नहीं, बिल्कुल भी नहीं
00:56जिससे प्रेम होता है, उससे सुख नहीं दिया जाता है, इसका आशा यह नहीं है कि उसको दुख दिया जाता
01:01है
01:02इसका आशा यह है कि जिससे प्रेम होता है उसके विशय में मन एक ही शुभ विचार से भरा रहता
01:08है
01:08क्या इसको सच्चाई कैसे दू इसे मुक्ति कैसे दू इसे उचा से उचा बहतर से बहतर कैसे होने दू इसको
01:15आस्मान कैसे दू
01:16तुम्हारी संगती से हम एक बहतर इंसान बन पाएंगे इसलिए तो हमारी जंदगी में आओ
01:21और अगर तुम्हारी संगती से हम बहतर इंसान नहीं बन रहे हमारा पतन हो रहा है तो निकलो बाहर अभी
01:26बाहर निकलो
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