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00:00:00हाल ही में डेटा आया है जिसमें दुनिया के सौ सबसे गरम शहरों में 95 शहर जो आए है वो
00:00:07भारत के आए है
00:00:11हमारे पहाड है वो प्रवतों का पलाकार करने पूरी मनुष्यता प्रक्रति को लूट लूट के अमीर होती जा रही है
00:00:28तो प्रक्रति भी विद्रोह कर रही है उसी विद्रोह का नाम है Climate Catastrophe
00:00:34हम इतने नाकाबिल लोग हैं कि हम अपने दम पर कुछ नहीं कर सकते तो हम प्रक्रति को लूट लूट
00:00:39कर अमीर हो रहे हैं
00:00:40कोई जैसे अपनी मा के गहने बेच बेच कर अपना रोटी पानी चला रहा हो और बोले देखा मेरी कितनी
00:00:47बड़ी आमदनी है
00:00:48अरे तु अपनी मा के कपड़े बेच रहा है मा को नंगा करके उसकी साड़ी बेच रहा है
00:00:52यही तो हम प्रत्वी के साथ कर रहे हैं और फिर कह रहे हैं हमारी आमदनी बढ़ रही है देश
00:00:56तरक्की कर रहा है जीडिपी बढ़ रहा है पहाड पर बात करके जीडिपी बढ़ रहा है जंगल काट करके जीडिपी
00:01:02बढ़ रहा है नदिया सुखा के यह तो अमीर हो रहे हो
00:01:04या और गरीब हो रहे हो बोलो हम अपने अतीत का तो खाई रहे हैं अपनी विरासत का तो खाई
00:01:11रहे हैं हम अपने भविश्य से भी उधार ले लेकर खा रहे हैं हम भूत और भविश्य दोनों को खा
00:01:17रहे हैं पर ये प्रत्वी माह है हमारी हम प्रक्रति को महादेवी बोलते है
00:01:22उन्हीं के लिए नौदॉर्गा मनाते हैं, पर जंगल बदला लेगा, उसकी नियत नहीं है बदला लेने की, बस नियम है,
00:01:30जो अपने ही घर में आग लगाते हैं, वो खुद राख हो जाते हैं, नियम है, प्रथवी कीमत नहीं मागेगी,
00:01:37पर हिसाब जरूर बराबर कर रही है,
00:01:39और हिसाब वो बड़ी पेदर्दी से बराबर करती है, इसलिए सब को साउधान कर रहा हूँ.
00:02:09सबसे गरम शहरों में, 95 शहर जो आएं हैं, वो भारत के आएं हैं, और इन शहरों में जो नाम
00:02:16शामिल हैं, वो वारा नसी और प्रयाग राज जैसे शहरों की नाम शामिल हैं, जिन्ने हम देवभूमी कहते हैं,
00:02:2344 दिगरी के टेमपरेशर के साथ ये शहर जल रहे हैं अचारे जी, और दूसरी तरफ अभी चारधा म्यात्रा भी
00:02:31शुरू हो चुकी है, लाखु लोग गंगोतरी और केदारनाथ की ओर जा रहे हैं, कुछ दिनों पहले मैं भी पहाड़ों
00:02:40की तरफ गई थी अचारे जी, और
00:02:42वहाँ पे वही 50-60 रुफे की मैगी बिखती है, और वो मैंने भी खाई, उसको खाते खाते हैं, उसका
00:02:49प्लास्टिक जो पैकेजिंग है, जो बेस्ट है, उसको देखके मन में ख्याल है कि ये कहां जाता है, ये नीचे
00:02:56तो नहीं जाता, तो ये कहां जा रहा है, क्या इसका ज
00:03:12ये आपने दो बातें कहीं हैं, ये दो अलग-अलग सवाल हैं, दोनों महत्यकोंड सवाल हैं, लेकिन आवश्यक नहीं है
00:03:21कि सबको इन दोनों बातों का संबंध समझ में आया हो, पहली बात तो आपने गई है कि भारत तपरा
00:03:29है, दुनिया के जो सबसे आदा गर्म शहर हैं, �
00:03:33उसमें इस वक्त पर 95 भारत से हैं, जो मैंने पढ़ा है, उसके अनुसार तो शायद 100 के 100 भारत
00:03:39से थे किसी दिन, अभी हाल में, खिर फर्क नहीं पढ़ता, 90 हैं कि 100 हैं, जितने भी हैं, ये
00:03:44देखिए, अब इनके पक्ष की बात हो रही है न, तो वो भी अपना स्थान लेने
00:03:53आई थी, तो कितने हैं, इस से फर्क नहीं पढ़ता, पर ये बात पक्की है, कि क्लाइमेट चेंज का बुरे
00:04:03से बुरा असर भारत पर पढ़ रहा है, ठीक है, ये आपके सवाल का पहला हिस्सा था, और दूसरे हिस्से
00:04:09में आपने कहा, कि लोग पहाड़ों पर जा रहे हैं, �
00:04:12और बहुत ज्यादा लोग अप पहाड़ों पर जाना एफोर्ड कर पा रहे हैं, और बड़ी सस्ती सी मेगी मिल रही
00:04:20है, पचास रुपए की और आपने भी खाली, फिर आपने कहा प्लास्टिक कहा जाएगा, ये दो बाते आपने कहीं, अच्छा
00:04:25सवाल है, ये दोनों बाते �
00:04:27आपस में जुड़ी हुई हैं, हम इन पर आते हैं, ठीक है, इसका जवाब मैं खुल करके दूँगा, विस्तार में
00:04:37दूँगा, उतनी देर आप खड़े रहों कि आप कहीं बैठ जाईए, क्योंकि बीच बीच मैं आप से पूछूँगा, आपको कहीं
00:04:43पर यहीं पर जगह दे
00:04:48दो, देखिए, सबसे पहले एकदम मूलभूत बात, ताकि जिन लोगों को इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं पता है, वो
00:04:59भी साथ चल सकें,
00:05:03क्लाइमेट चेंज किस वज़ा से होता है, एकदम सीधे सीधे, यह जो प्रत्वी का वातावरण है, इस में कार्बन डाइ
00:05:12आउकसाइड और कार्बन डाइ आउकसाइड जैसी ग्रीन हाउस गैसे के बढ़ने से होता है, ठीक है?
00:05:17carbon dioxide greenhouse gas है
00:05:20उसके अलावा methane है water vapor है
00:05:22और sulfur और nitrogen के भी कुछ oxides है
00:05:26जो कि greenhouse gases है
00:05:28प्रमुखतया लेकिन carbon dioxide
00:05:30carbon dioxide ठीक
00:05:32carbon dioxide यही जो वातावरण है
00:05:35यही जो हवा है हमारी
00:05:36इसमें जितनी बढ़ती जाती है
00:05:38उतना ज्यादा
00:05:41वातावरण में heat retention capacity बढ़ती जाती है
00:05:45जो किर्णे आती है
00:05:49सूर्य की उनमें energy होती है
00:05:51ठीक है वो यहाँ आती है
00:05:53वो गर्म करती है प्रत्वी को
00:05:56प्रत्वी की सतह को दिन में
00:05:58और रात में यह जो गर्म सतह है
00:06:01साधरन तया इसको वो heat
00:06:04radiate back कर देनी चाहिए
00:06:06कोई भी गर्म सतह
00:06:08अपनी गर्मी को
00:06:10radiation के द्वारा बाहर
00:06:12फेक करके घटा देती है
00:06:14आप एक गर्म
00:06:16बरतन लेते हैं थोड़ी देर में ठंडा हो जाता है
00:06:18कैसे ठंडा हो गया
00:06:19माल लिजे आपने वो गर्म बरतन पथर पर रख दिया
00:06:23तो गर्मी
00:06:24conduct away तो हुई नहीं है
00:06:28क्योंकि पत्थर
00:06:29तो bad conductor
00:06:31आपने एक गर्म बरतन लिया पत्थर पर रख दिया
00:06:33वो थोड़ी देर में ठंडा हो जाता है कैसे हो जाता है
00:06:35ऐसे हो जाता है कि उसकी कुछ गर्मी
00:06:38तो हवा ले गई
00:06:39convection के थू
00:06:41कुछ गर्मी हवा ले गई और उसकी
00:06:43बहुत सारी गर्मी और कौन ले गया
00:06:45वो गर्म था तो उसने
00:06:47खुदी अपना
00:06:48radiate out कर दी अपनी energy
00:06:50तो इस तरह से वो थंडा हो गया
00:06:52ठीक है प्रत्थवी भी यही करती है
00:06:54जब सूर्य की किरिणे आती है तो प्रत्थवी में
00:06:56जितनी सतहें हैं चाहे वो
00:07:12उपर से गर्मी आनी बंद हो जाती है
00:07:14तो यही सब सतहें जो गर्म हो गई थी
00:07:16अभी अपनी गर्मी को
00:07:19आस्मान में वापस भेज देती है
00:07:21radiation के माध्यम से
00:07:22सबसे ज़्यादा ही हमें कहां देखना को बिलता है
00:07:24रेकिस्तान में रेकिस्तान में दिन में
00:07:26बहुत गर्मी हो जाती है
00:07:27और रात में बहुत थंड़क हो जाती है
00:07:29क्योंकि जो कुछ गर्म हुआ था
00:07:30वो अपनी गर्मी को
00:07:32radiation से वापस भेज देता है
00:07:33और इसलिए जब बादल होते हैं
00:07:36तो रातें फिर बहुत थंडी
00:07:38नहीं होने पाती
00:07:39क्योंकि वो गर्मी जो
00:07:41radiation से वापस
00:07:42space में चली जानी चाहिए थी
00:07:44बादल उसको रोक देते हैं
00:07:46तो इसलिए रेकिस्तान में आप जाओगे
00:07:49और गर किसी वज़े से वहाँ
00:07:50बादल है रात में तो रात उतनी
00:07:52थंडी नहीं होगी
00:07:54बात आ रही है समझ में
00:07:57carbon dioxide का जो
00:07:58molecule है उसमें
00:08:00एक खास property गुण होता है
00:08:02क्या
00:08:04वो radiation को
00:08:06रोक लेता है वो heat को
00:08:08सोख लेता है इसको कहते है
00:08:10green house effect
00:08:12कुछ हद तक
00:08:13वो हमारे लिए बहुत अच्छा है
00:08:15क्योंकि अगर carbon dioxide जरा भी नहों
00:08:18atmosphere में
00:08:20तो जितनी कर्मी थी वो सब की सब
00:08:22वापस लोड जाएगी
00:08:24बड़ी थंड हो जाएगी
00:08:25खास कर रातों में बहुत थंड हो जाएगी
00:08:29और जीवन
00:08:30जैसा हम जानते हैं वैसा चली नहीं पाएगा
00:08:32बहुत थंड हो जाएगी
00:08:35तो carbon dioxide की
00:08:38एक निश्चित मात्रा
00:08:40एक साधारन अनुपात
00:08:42जीवन के लिए आवश्यक है
00:08:44वो कितना होता है
00:08:46जितना होना चाहिए उतना होता है
00:08:48वो होता है 270-280
00:08:49पार्ट पर मिलियन
00:08:51कि अगर हवाली
00:08:53और उसके मिलियन हिस्से हैं
00:08:56तो उसमें से करीब 280 हिस्से
00:08:58carbon dioxide के हैं
00:08:59तो अच्छा है इतना ही होना चाहिए
00:09:01वही normal है पर हमने fossil fuels के आने के बाद industrial revolution के बाद बहुत ज्यादा इंधन जलाया है
00:09:14बहुत ज्यादा ऐसा कुछ जलाया है जो carbon dioxide छोड़ता है, emit करता है
00:09:22सिर्फ इंधन से ही carbon dioxide नहीं निकलती, कोई भी organic material जलाओगे जिसमें carbon होगा तो उसको जलाओगे, oxidize
00:09:29करोगे तो उसमें से carbon dioxide निकलेगी
00:09:31ठीक है आप पेड़ काट करके लगड़ी चला दो उससे भी carbon dioxide निकलेगी और जमीन में बहुत नीचे नीचे
00:09:41बर्फ के नीचे मीथेंद अभी होती है
00:09:43आप बर्फ पिखला दोगे तो उसमें भी जो मीथेंद थी वो फिर वातावरण ने पहुँच जाएगी
00:09:47तो हमने बहुत तरीकों से इस वातावरण में carbon dioxide और carbon dioxide equivalent gases बढ़ा दी हैं
00:09:57यह climate change है ठीक है यह बात मैंने उनके लिए करी जो इस मुद्दे से कम परिचित हैं अभी
00:10:02तक
00:10:05अब यह बात अभी तक वैज्ञानिक थी यहां से मनो वैज्ञानिक होनी शुरू होती है उसके बाद आध्याद्मिक हो जाएगी
00:10:13वैज्ञानिक पक्षम ने समझ लिया मोटे तौर पर ठीक है बात अब मनो वैज्ञान में प्रवेश करती है विज्ञान से
00:10:20मनो वैज्ञानिक बात यह है कि जो carbon emission होता है
00:10:28वो ज्यादा तर consumption based activities से होता है
00:10:36आप जितना ज्यादा भोगते हो उतनी आपको energy चाहिए क्योंकि भोगा नहीं आसकता बिन energy के
00:10:44मनुष्य कुछ भी करे उसको एनर्जी की जरूरत पढ़ेगी पढ़ेगी न कहीं आना है कहीं जाना है कुछ खाना है
00:10:51उड़ना है कुछ बनाना है कुछ गिराना है हर चीज में क्या लगती है एनर्जी
00:10:58और एनर्जी हमारी आ रही है ज्यादातर फॉसिल फ्यूल से
00:11:02हमारी एनर्जी आ रही है फ्यूल को जला करके
00:11:06कामना मांगती है एनर्जी अपनी पूर्ती के लिए
00:11:10आपको कामना है मैं बाजार जा करके कुछ खरीदू हूँ कुछ खाऊं
00:11:15उसके लिए आपको क्या चाहिए उसके लिए गाड़ी में क्या चाहिए गाड़ी में पिट्रोल चाहिए ना बादार जाने के लिए
00:11:22कामना एनरजी मांगती है और एनरजी से एमिशन होता है
00:11:28कामना उसको डिजायर बोलो या एमोशन बोलो
00:11:32मैं इसको आपसे ऐसे कहा करता हूँ न कि emotion और emission साथ-साथ चलते हैं
00:11:42emotion, energy, emission
00:11:46तो हम चितना ज्यादा कुछ करना चाहते हैं यहां का वहां यहां का वहां
00:11:52उतना ज्यादा carbon emit होता है उतना ज्यादा carbon emit होता है
00:11:58बात आ रही है समझ में? सो consumption सीधे सीधे जिम्मेदार होता है emission के लिए
00:12:06सीधे सीधे
00:12:09अब यहां से एक रोचक पहलू खुलता है बहुत
00:12:14हमने बहुत ज्यादा consumption कर रखा है निसंदे है
00:12:17उदारण के लिए जो औसत अमेरिकन है वो जितना consumption करता है
00:12:22उतना consumption करने के लिए पांच प्रत्वियों के संसाधन भी अपर्याप्त है
00:12:29अगर पूरी दुनिया उतना consume करने लगे तो
00:12:33एक औसत अमेरिकन जितना consumption करता है
00:12:36और अगर दुबई का एक औसत आदमी जितना consumption करता है
00:12:41दुनिया के सब लोग उतना करने लगें तो दस प्रत्वियां भी कम पड़ जाएंगे
00:12:47ठीक तो consumption से emission हो रहा है
00:12:50emission ही climate crisis है और एक climate crisis
00:12:54सब प्रजातियों को बरबात करने के लिए खड़ी हुई है
00:12:57यह हम बहुत अच्छे से जानते हैं जानते हैं अब यहां से वो रोचक पहलो शुरू होता है
00:13:04जो इन्होंने का आम आदमी इतना consumption कर कैसे ले जा रहा है
00:13:10खासकर जो आम American है जो आम बंदा है Western World का Global North का
00:13:18या कि भारत जैसी जगहों पर भी जो आम आदमी है जिसका consumption बढ़ता ही जा रहा है
00:13:25वो इतना consumption कर कैसे ले रहा है
00:13:27भई consumption करोगे तभी तो Emission होगा
00:13:29इतना consumption कर कैसे ले रहा है
00:13:31वहां वो 50 रुपई की मैगी का मुद्दा आप खड़ा हो जाता है
00:13:37मामला मेज़दार होने जा रहा है
00:13:38आप consumption इसलिए तो कर ले रहे हो ना क्योंकि मामला सस्ता है
00:13:44आप consumption इसलिए तो कर पा रहे हो ना क्योंकि ओचीज सस्ती है
00:13:47तो आपने खरी दी और आपने consume कर ली
00:13:50इसलिए तो कर पा रहे हो ना
00:13:52इसलिए कर पा रहे हो ना
00:13:54यहां से एक खतरनाक बात आती है वो यह कि उस चीज का जो प्राइज है जो दाम है क्या
00:14:03वो उतन नहीं है जितना आप चुका रहे हो
00:14:08भई मान लो पेट्रोल दस रुपए लीटर हो जाए तो आप क्या करने आ ले हो आप और कंजियूम करोगे
00:14:14ना और करोगे और और एमिशन बढ़ाओगे
00:14:19तो वहाँ पर ये बड़ा महत्वपूर्ण सवाल खड़ा हो जाता है कि दस रुपए लीटर यदि पेट्रोल हो गया तो
00:14:27क्या दस रुपए उसकी वास्तविक कीमत है
00:14:31आप जिस चीज को जितने में खरीद रहे हो क्या ये सचमुच उसकी असली कीमत है खरीद रहे हो तभी
00:14:38तो खा रहे हो तभी तो जड़ा रहे हो तभी तो कंजम्शन है और तभी तो क्लाइमिट क्राइसिस है
00:14:46इसका जवाब है बहुत बड़ा नो नो
00:14:53हमें जो चीज जितने में मिल रही है
00:14:57वो जबर्दस तरीके से
00:15:02क्लाइमेट द्वारा
00:15:03प्लैनेट द्वारा
00:15:05सबसिडाइजड है
00:15:09कैसे सबसिडाइजड है
00:15:11यह समझने के लिए
00:15:13मैं आपको एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ
00:15:16वो कहानी है
00:15:19ब्रिटेन की और भारत की
00:15:21चुकि उसका संबंध हमारे राष्ट से है
00:15:24तो इसी लिए आप आसानी समझ पाएंगे
00:15:27और रोचक रहेगी
00:15:31ब्रिटेन ने भारत पर कबजा कर लिया
00:15:37ब्रिटेन ने भारत पर कबजा कर लिया
00:15:39यह दूर के लोग हैं
00:15:41ये दूसरे धर्म के लोग है हम गोरे लोग है ये तो भूरे और काले लोग है हम आकर इन
00:15:48पर कब्जा कर लेंगे ठीक है और भारत की दौलत लूट कर ब्रिटेन ले जाई गई ठीक
00:15:59अनुवान है कि ब्रिटेन ने लगभग भारत से 45 ट्रिलियन डॉलर लूटे ट्रेड के नाम पर कितने
00:16:1045 trillion dollar
00:16:12आज के exchange rate पर
00:16:1345 trillion dollar
00:16:1545 trillion dollar समझे रहे हैं उन्हों कितने होते हैं
00:16:19और ये loot है
00:16:21ये loot है
00:16:24इस से
00:16:25Britain को क्या मिला
00:16:28बहुत सारी
00:16:30संपन्नता
00:16:31और वो जो संपन्नता है
00:16:33उसके कारण अब वो क्या कर पाएंगे
00:16:35consumption
00:16:38भारत से
00:16:39जब ब्रिटेन लूट लेगा
00:16:42तो ब्रिटेन के लोगों के लिए
00:16:44चीजे सस्ती हो गई ना
00:16:46अब जब चीज सस्ती हो जाएगी
00:16:48तो consumption बढ़ जाएगा
00:16:51जब भी चीज सस्ती हो जाएगी
00:16:53तो consumption बढ़ जाएगा
00:16:54ये तो सधारन एकनोमिक से जानते ही हो
00:16:57सवाल ये वो चीज सस्ती क्यों है
00:17:00वो सचीज
00:17:01बिटेन में सस्ती इसलिए क्योंकि भारत से
00:17:03लूट के ले जाई गई है
00:17:05क्योंकि आपने उसका असली
00:17:07दाम चुकाया ही नहीं है वो इसलिए सस्ती है
00:17:11बात आ रही है समझ में
00:17:13और वो लूट आज भी बदस्तूर जा रही है
00:17:17एपल के बहुत सारे प्रोड़क्ट्स है जो ग्लोबल साउथ में
00:17:22माने विकास शील देशों में बनाए जाते हैं
00:17:27उसके बाद उस प्रोड़क्ट को एक अमेरिकन या एक येरोपियन खरीदता है
00:17:34मान लेजिए वो प्रोड़क्ट उसको हजार डॉलर का पड़ता है
00:17:37हजार डॉलर का
00:17:38वो हजार डॉलर का इसलिए पड़ता है
00:17:41क्योंकि आपने भारत को, अफरिका को, बंगलादेश को, कमबोडिया को
00:17:48इतना गरीब कर दिया है कि वहाँ लेबर कास्ट बहुत कम है
00:17:54अगर आपने उनको लूटा नहीं होता
00:17:56तो वो जो एपल का प्रोड़क्ट है, वो अमेरिका में
00:17:59एक ख़़ार डॉलर का नहीं 25 डॉलर का होता
00:18:01और जब 25 डॉलर का होता, तो उसका कंजमशन
00:18:05कम ہوتा है, जब कंजमशन कम होता तो
00:18:08एमिशन भी अब एपल प्रोड़क्ट से एमिशन नहीं होता आम तोर पर पर उधारन के लिए समझो
00:18:12एपल प्रोड़क्ट को किसी और चीज़ से सब्सिचूट कर दो
00:18:15कोई वहिकल मान लो कुछ और मान लो
00:18:20बात समझ में आ रही है
00:18:23ज्यादातर एमिशन उनके दोरा करा जा रहा है
00:18:26जो खरीद सकते हैं
00:18:28और जो खरीद सकते हैं
00:18:30वो ज्यादा से ज्यादा इसी लिए खरीद पा रहे हैं
00:18:33क्योंकि चीज़ें सस्ती
00:18:35हम महंगाई करोना भले ही रोते हो
00:18:37लेकिन इसके बात भी सच्चा ही यह है
00:18:40कि हमें जो चीज जिस कीमत पर मिल रही है
00:18:42उसकी वास्तोगी कीमत उससे बहुत ज्यादा है
00:18:46ब्रिटेन के नागरिकों को
00:18:48बहुत सस्ता
00:18:50इंडिगो मिल रहा था
00:18:51बहुत सस्ते कपड़े मिल रहे थे
00:18:53बहुत सस्ते हर तरीके का
00:18:56raw material मिल रहा था जैसे जूट
00:18:59बहुत कुछ था
00:19:00जो ब्रिटेन के नागरिकों को बहुत सस्ता
00:19:02मिल रहा था और जितना सस्ता मिलेगा
00:19:04उतना consume करोगा उतना emission बढ़ेगा
00:19:06वो सस्ता इसलिए मिल रहा है
00:19:08क्योंकि ब्रिटेन की
00:19:10accounting में भारत कहीं आई नहीं रहा था
00:19:12वो कह रहे थे ब्रिटेन अलग है भारत अलग है
00:19:14भारत बरवाद हो रहा है कोई बात नहीं
00:19:16ब्रिटेन का खाता तो मजबूत होता जा रहा है
00:19:20ब्रिटेन का खाता तो मजबूत होता जा रहा है
00:19:22तो ऐसे करकर के करकर के
00:19:23भारत लुटता गया
00:19:25और ब्रिटेन
00:19:27बढ़ता गया और मोटा होता गया
00:19:29इस कहानी में और nuances हैं
00:19:31पर अभी मैं आपको मोटे तोर पर बता रहा हूँ
00:19:34ठीक है
00:19:35ये कहानी तब तक तो चल जाती है
00:19:38जब तक आप भारत और ब्रिटेन को अलग-अलग मानो
00:19:42पर अगर आप कहो
00:19:43कि नहीं मैं भारत और ब्रिटेन को मिला कर देखना चाहता हूँ
00:19:46तो आपको पता चलेगा कि बरबादी चल रही थी
00:19:49क्योंकि ब्रिटेन की आबादी इतनी सी
00:19:51और भारत की आबादी इतनी
00:19:54तो आप इतनी बड़ी आबादी का भारी नुकसान करके
00:19:58इतनी सी आबादी के कंजम्शन बढ़ा रहे थे पर हम यह नहीं मानेंगे जो ब्रिटिश बंदा है वो कभी नहीं
00:20:04कहेगा कि मैं और भारती एक हैं वो कहेगा मैं और जो बाकी ब्रिट्स हैं वो एक हैं चलो जो
00:20:12वेल्श है जो स्कॉर्ट है मैं उसको अपना मान लूँगा जो
00:20:19भूरे देशी हिंदुस्तानी इनको थोड़ी अपना मानूँगा तो उनको अलग मान रहा है तो उनकी बरबादी को उनकी बरबादी मान
00:20:27रहा है अपनी बरबादी नहीं मान रहा है बात आ रही है समझ में कुछ बात आ रही है लेकिन
00:20:32हम जानते हैं कि यह जो संपन्नता है ज
00:20:48सो सालों में जिसको आप प्रोग्रस कहते हो और जीडिपी ग्रोथ कहते हो वेस्टरन वर्ड की आम तोर पे आप
00:20:56क्या बोलते हो कि वेस्ट इतना सम्रद संपन प्रगतिशील क्यों है ये फैशनेबल हो गया है बोलना कि वेस्ट आगे
00:21:04इसलिए है क्योंकि भाई उनके पास इनो
00:21:18प्रोणीज बनाई उसका उनको लाफ मिला हम ये सब बोलना चाहते हैं एकनोमिस्ट जब कैलकुलेट करते हैं तो वहां कड़े
00:21:25चौकाने वाले हैं जितनी भी आपकी प्रोग्रस हुई है पिछले 200 सालों में उसमें मुश्किल से एक तहाई ओनेस्ट और
00:21:35ओनरेबल फैक्टर
00:21:36की वजए से है सिर्फ एक तहाई सिर्फ एक तहाई उन कारणों से है जिनको आप बोल सकते हैं ये
00:21:44human ingenuity है जिसमें innovation आ जाएगा जिसमें diligence आ जाएगी श्रमशीलता आ जाएगी organization आ जाएगा इनको आप कह
00:21:56सकते हो ये इमांदारी से लाई हुई
00:21:59प्रोग्रेस के कारख है वो सिर्फ एक तहाई है 1x3 बाकी 2x3 कहां से आया है बाकी 2x3 प्रोग्रेस जो
00:22:06आई है वो दुनिया को दूसरे लोगों को और प्रकृत को लूट लूट कर आई है बात आप समझ रहे
00:22:18हो आप उसको गिन रहे हो GDP के तौर पर लेकिन वो वास्तव में
00:22:26एक inheritance की लूट है जो प्रकृति ने आपको दे रखी ती inheritance आपने उसको लूट लिया प्रकृतिक संसाधनों को
00:22:32लूट लिया और कह दिया यह तो मेरी आमदनी है जैसे कि कोई विरासत में मेरे हुए घर को बेच
00:22:41दे और कहे यह तो मेरी आमदनी है उसको आप आमदनी मानोगे
00:22:45क्या आपको विरासत में एक गर मिला हुआ है आपने उस घर को तोड़ तोड़
00:22:49कर बेचना शुरू कर दिया है और फिर कह रहे हो मेरी आमदनी बढ़� monsters
00:22:52कोत आमदनी मानोगे क्या और सी तरह से एक दूसरे किस्म को बाइमान
00:23:11को लूटने से हुई है, सिर्फ एक तिहाई वो है जिसका श्रे मनुष्य ले सकता है कि ये तो मेरी
00:23:19बुद्धी से, मेरे इनोवेशन से और मेरी साधना से, मेरे श्रम से तरक्की हुई है, बाकी सारी तरक्की नकली है,
00:23:28वो लूट की है,
00:23:30रिसर्च बताती है, कि अगर हम सिर्फ पिछले 20-30 सालों को ले ले, तो जो टोटल हमारा नैचुरल कैपिटल
00:23:41है, हमने 40 प्रतिशत उसको कम कर दिया है, पर हम अपनी कुल संपदा गिनते ही नहीं, हम सिर्फ अपनी
00:23:52वर्तमान आमदनी गिरते हैं,
00:23:54ऐसे समझो, कि तुम्हारे पास कुल कैपिटल था, ये तुम्हारा घर था, ये तुम्हारा घर था, ये तुम्हारा घर था,
00:24:01ये तुम्हारा घर है, ये प्रत्वी है, ये पहले से मौजूद है, और फिर एक चीज़ होती है, रिवेन्यू इंकम,
00:24:06ये कैपिटल है तुम्हार
00:24:20ये बेच दिया मैंने ये खा लिया मैंने ये बरबाद कर दिया और मेरे पास कुछ पैसा आने लग गया
00:24:25और मैं क्या रहा हूँ हम तो समरिध होते जा रहे हमारी इतनी GDP ग्रोथ है तुम्हारी इतनी GDP ग्रोथ
00:24:29है तुमने अपने सारे प्राकृतिक संसाधन बरबाद कर दिये है
00:24:33उनकी कीमत लगाए बिना, तुम पहले से ज्यादा गरीब हो गए हो, तुम अमीर नहीं हो रहे हो, तुम गरीब
00:24:39हो गए हो, पर ये बात तुम अपनी accounting में कभी लाते ही नहीं हो,घुनारी पूरी species, अपने ऊपर
00:24:49खुद एक accounting deception चला रही है,
00:24:54हम सही से ना प्राइसिंग कर रहे हैं ना प्रॉफिट एंड लॉस की गणना कर रहे हैं
00:25:03और ये बात क्लाइमेट क्राइसिस के लिए सीधे सीधे तोर पर जिम्मेदार है
00:25:07मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ
00:25:10ब्रिटेन और भारत का उदाहरण आपको समझ में आ गया ना
00:25:13अब ब्रिटेन को बना लो पूरी मानव प्रजाती और भारत को बना लो प्रकृती
00:25:21ठीक जैसे ब्रिटेन ने भारत को लूटा और कह दिया कि हम तो प्रॉस्परस हो गए
00:25:27उसी तरीके से
00:25:28हमारी पूरी स्पीशीज है
00:25:30वो प्रक्रति को लूट रही है
00:25:32और कहा रही है हम तो
00:25:33प्रोस्परेस हो गए
00:25:35अब भारत नहीं फिर भी विद्रो कर दिया
00:25:38क्योंकि भारत में मनुश्य थे
00:25:40तो उन्होंने विद्रो करा और किसी तरह आजादी आ गई
00:25:42पर प्रक्रति बैसारी कैसे विद्रो करें प्रक्रति कोई एक मनुष्य तो नहीं पर प्रक्रति के विद्रो के दूसरे तरीके होते
00:25:48हैं और वो कर रही है
00:25:51भारत को अंग्रेज लूट रहे थे तो भारतियों ने विद्रोह करा ना भारत को लूट लूट के अंग्रेज अमीर होते
00:25:56जा रहे थे तो भारतियों ने विद्रोह करा ना वैसे ही पूरी मनुष्यता प्रक्रति को लूट लूट के अमीर होती
00:26:02जा रही है तो प्रक्रति भी व
00:26:17जयागी की, उसी को ले लेते हैं, एक आदमी है, वो अपनी गाड़ी ले करके, और उसको अब नई नवेली
00:26:27समरित भी आई है उसके घर में, तो अपनी गाड़ी ले करके वहाँ चड़ा गया है, उपर पहाड पर कहीं
00:26:34पर, बहुत उपर चला गया है, कितरनाथ की दरफ चला ग
00:26:45रहा है वो पेट्रोल अफोर्ड कर सकता है उसको लग रहा है वो वहां जा करके एकोमोडेशन और मैगी जो
00:26:54मैगी आपने बोली वो मैगी अफोर्ड कर सकता है उसको लग रहा है कैसे अफोर्ड कर सकता है बता जूड
00:27:00बोल रहा है जूड सिर्व विसले बोल रहा है क्योंकि जो
00:27:19तुम जिस पेट्रोल को लेके गए हो वहाँ पर तुम्हें क्या लगता है तुम उसके दाम चुका सकते हो
00:27:26दस करोड साल लगते हैं प्रत्वी के गर्भ में आउइल को बनने में
00:27:36इतनी आसानी से आउइल रिजर्वस तैयार नहीं हो जाते
00:27:42करोडों साल लगते हैं तब जा करके नीचे आउइल तैयार हुआ
00:27:48और आपने वो ज़्यादातर आउइल दो सो साल के भीतर निकाल लिया
00:27:54दो सो साल भी मैं ज्यादा बोल रहा हूँ
00:27:57उस दो साल में भी ज्यादा से ज्यादा आपने पिछले पचास साल में निकाला है
00:28:01जो काम प्रत्वी ने अपनी प्रक्रियाओं में करोडों साल में करा था
00:28:09उसको आपने 50 साल में लूट लिया और आप करें तो बहुत सस्ता है तो खुद बना के दिखा दे
00:28:14ना
00:28:16बहुत सस्ता है तो खुद बना के दिखा दे ना
00:28:18तुझे 100 रुपे लीटर मिल रहा है
00:28:21अगर उसकी वास्तविक कीमत लगाई जाए
00:28:23तो तुग गाड़ी क्या एक लीटर पेट्रोल भी अफूर्ड नहीं कर सकता
00:28:32वास्तविक कीमत लगाई नहीं जा रहे प्राइसिंग का धोका है बस
00:28:36और प्राइसिंग के इस धोके के पीछे इन्सान की बुरी नियत है
00:28:42ये हजार डेर्व हजार किलो की गाड़ी लेकर के तू ऐसे पहाड पर चड़ गया है जहां तुझे चड़ने की
00:28:48कोई जरूरत नहीं थी
00:28:50तू मुझे बता तू ये गाड़ी सच-पूच़ फूड कर सकता है तूने ऐसा क्या किया है कि तेरे पास
00:28:54ये गाड़ी होनी चाहिए
00:28:57सिर्फ इतना हुआ है कि उस गाड़ी की वास्तविक कीमत तुने अदाई नहीं करी है
00:29:02वो गाड़ी तुझे मिल गई है दस बीस लाक में तुने खरीद लिए
00:29:06जब उस गाड़ी की एकोलॉजिकल कॉस्ट वास्तव में लगाई जाएगी
00:29:10तो पता चलेगा वो गाड़ी करोडों की है तु कैसे अफोर्ड कर लेगा
00:29:13मैं कहा रहा हूँ गाड़ी क्या तु एक लीटर पेट्रोल नहीं अफोर्ड कर सकता कैसे चड़ेगा पहाड पर
00:29:19वो जब मेगी पचास का मिल गया
00:29:21सहाब वो प्लास्टिक कभी पहाड से बाहर नहीं जाने वाला
00:29:25और अब वो जो पहाड पर नुक्सान करेगा वो नुक्सान हजारों का है
00:29:30एक छोटा सा पैकेट हजारों का हो नुक्सान करेगा
00:29:32काईदे से वो मैगी हजारों की होनी चाहिए थी
00:29:35आपने पहाड को सिर्फ इसलिए बरबाद कर दिया क्योंकि उस मैगी में प्रक्रतिमा का जो खून मिला हुआ है उसकी
00:29:45कीमत आपसे वसूली नहीं गई
00:29:47इसलिए आपको लगा मैगी सस्ता है खा लो आम आदमी को चीजें बिना इकोलोजिकल प्राइसिंग के मिल रही है
00:29:56इसलिए आम आदमी लगातार उसका दुरूपयो करे जा रहा है करे जा रहा है करे जा रहा है
00:30:01हम गिन ही नहीं रहे कि हम जो कर रहे हैं उससे प्रक्रति को जो नुकसान हो रहा है उसका
00:30:06क्या होगा
00:30:06ठीक वैसे जैसे आम ब्रिटिश आदमी गिनेगा ही नहीं कि उसकी संपन्नता में भारत कितना बरबाद हुआ
00:30:15जैसे आम ब्रिटिश आदमी नहीं गिनेगा कि उसकी संपन्नता में भारत की बरबादी का क्या योगदान है
00:30:22वैसे ही आज मनुष्य नहीं किन रहा है कि उसकी संपन्नता में प्रत्वी की प्रक्रतिकी बर्बादी का कितना योगदान है
00:30:31हम जो कुछ कर रहे हैं वो हमें और अमीर नहीं गरीब बना रहा है
00:30:35हम अपना revenue बढ़ा रहे हैं अपनी capital जला जला करके
00:30:41इसको कहते हैं selling of the family silver
00:30:52जमा पूंजी को बेचने पर उताराएं तो इसका क्या मतलब होता है
00:30:57कि ये आदमी बर्बाद हो चुका है अब ये जी रहा है
00:31:02पुराना जो कुछ इसको मिला हुआ था विरासत में उसको बेच-बाच करके
00:31:07पूरी की पूरी मनुष्यों की आबादी जी रही है
00:31:10हमें जो विरासत में प्राकरतिक संसाधन मिले हुए हैं
00:31:13उनको खाके पचाके
00:31:16ये हमारी काबिलियत का सबूत नहीं है कि हम कहें
00:31:19कि हम देखो ग्रो कर रहे हैं संपनता आ रही है
00:31:21इससे बस हमारी नाकाबिलियत पता चल रही है
00:31:24हम इतने नाकाबिल लोग हैं
00:31:25कि हम अपने दम पर कुछ नहीं कर सकते
00:31:27तो हम प्रक्रति को लूट-लूट कर अमीर हो रहे हैं
00:31:31कोई जैसे
00:31:32अपनी मा के गहने बेच-बेच कर
00:31:46अपना रोटी-पानी चला रहा हो
00:31:51जीडिपी पढ़ रहा है जंगल काट-काटके
00:31:53जीडिपी पढ़ रहा है नदियां सुखा करके
00:31:55ये तो अमीर हो रहे हो या और गरीब हो रहे हो
00:31:58बोलो
00:32:00लेकिन हमें नहीं समझ में आ रहा
00:32:01क्यों नहीं समझ में आ रहा
00:32:02अब बात
00:32:04वैज्ञानिक से चल कर मनो
00:32:06वैग्या नहीं खोई अब आध्यात में खो जाएगी
00:32:09ये जो
00:32:10ब्रिटिश बंदा था
00:32:12जो भारत से
00:32:14मान लो तेल लूट रहा है, मसाले
00:32:15लूट रहा है, कपास लूट रहा है
00:32:17जूट लूट रहा है
00:32:20बंगाल की एक जूट की
00:32:22फैक्टरी है, वहां पर
00:32:23ये बंगाली को मार रहा है जोर जोर से
00:32:25और काम कर, और काम कर
00:32:28जूट का प्रोड़क्शन बढ़ा
00:32:31और यही जूट हम दूसरे जगों पर बैठ करके
00:32:34बेच करके, ब्रिटेन की संपनता
00:32:36बढ़ाएंगे, क्या ये आदमी
00:32:38किसी ब्रिटिश नागरिक को
00:32:40ऐसे मारेगा कोड़ों से
00:32:42ये जो ब्रिटिश सुपरवाइजर है
00:32:44कैलकटा की किसी जूट फैक्टरी में
00:32:46ये एक बंगाली को
00:32:48कोड़ों से मार रहा है
00:32:50क्या यही आदमी किसी
00:32:52ब्रिटिशर को मारेगा, नहीं मारेगा
00:32:54क्यों बोलेगा, बोलेगा, मेरा भाई है
00:32:56इसको नहीं मारूँगा
00:32:58नहीं मारूँगा ना
00:33:00उस आदमी ने जा करके
00:33:02इसी ब्रिटिशर ने जा करके
00:33:04पूरे चीन को
00:33:06किसकी इलत लगा दी
00:33:08ओपियम की, क्या यह अपने
00:33:10बच्चे को नशे की इलत लगाएगा
00:33:11नहीं लगाएगा, नहीं लगाएगा ना
00:33:15ये वही आत्मी है जिसने जा करके
00:33:17Amazon के सारे जंगल चला दिये
00:33:20पर क्या ये आत्मी खुद अपने फेपड़े चलाएगा
00:33:22नहीं चलाएगा न
00:33:25ये किसी को मारने से
00:33:27किसी को बरबाद करने से
00:33:29हमें पता क्या चल रहा है
00:33:30पता ये चल रहा है कि
00:33:31उसके मन में भेद है
00:33:34वो सोच रहा है कि
00:33:36ब्रिटिश अलग है और भारती है
00:33:39अलग है
00:33:40तो इसलिए एक का नुकसान करके
00:33:42दूसरे का फायदा करा जा सकता है क्योंकि
00:33:44ये दोनों तो अलग-अलग है
00:33:46जब ये भेद की भावना होती है
00:33:48तो हम एक को बरबाद करके
00:33:50अपने आपको आबाद कर लेना चाहते है
00:33:54ये जो भेद की भावना है
00:33:57ये एक दारशनिक जूट है
00:34:00इसी का अध्यात्म खंडन करता है
00:34:03भाई तुम प्रक्रते से अलग नहीं हो
00:34:07जैसे तुम अपने भाई को कोडे मार के
00:34:09उसकी productivity नहीं बढ़ाओँए
00:34:11वैसे ही बंगाली को कोडे मार के
00:34:13उसमें productivity मत बढ़ाओ
00:34:18जैसे ही आपको दिखाई देना शुरू करेगा
00:34:20कि मैं और प्रकृति मैं और बागी
00:34:22प्रजातियां अलग अलग नहीं है
00:34:25वैसे ही आप
00:34:27ये करना बंद कर देंगे कि
00:34:29मुझे तो मेरी लाइफ स्टाइल मेंटेन करनी है
00:34:31भले ही उसके लिए प्रते दिन
00:34:33सो स्पीशी सदा के लिए
00:34:35विलुप्त हो जाती हूं एक्स्टेंट हो जाती हूं
00:34:37आप यह नहीं करोगे आप यह सिर्फ तब करोगे
00:34:39जब आप करोगे दुनिया मरे तो मरे
00:34:40मेरा क्या मैं और दुनिया
00:34:43अलग अलग है
00:34:44और यह काम करता है अहंकार
00:34:47मैं
00:34:48अलग हूं जब मैं उससे
00:34:50अलग हूं तो वो मरे की जिये मुझे क्या फरक पड़ता है
00:34:53मैं अलग हूं
00:34:55समूचा अध्यात्म
00:34:57आपको यही बताने के लिए
00:34:58कि आप अलग नहीं हो
00:34:59और जब तक हंकार रहेगा, अलगाओ का भाव भी रहेगा, क्योंकि हंकार की परिभाशा ही यह है, यह मैं हूँ,
00:35:07बाकी सब अलग है, बाकी सब अलग है, जब तक आप प्रकृति को मनुष्य से अलग मानोगे, आप प्रकृति का
00:35:17दोहन शोषन करोगे ही करोगे, करना पड़े�
00:35:22और जब देखोगे कि प्रक्रती बरबाद हो गई है तो आप कहोगे अब मैं मार्स पर चला जाता हूँ
00:35:27क्यूंकि आपको दिखाई ही नहीं दे रहा है कि आप प्रत्वी ही हो
00:35:31आप इसी मिट्टी से उठे हो आपको यहीं जाना है
00:35:34आप कहीं और के नहीं हो आप कहीं और जाकर के खुश नहीं रह सकते
00:35:38आप आबाद नहीं हो पाओगे कहीं इधर उधर भाग करके
00:35:41यह आपको नहीं समझ में आ रहा क्योंकि अहंकार ने आपको बताया है
00:35:45और दुनिया के तमाम लोगधर्मों ने भी आपको यही बताया है
00:35:48कि बेटा तुम तो अलग हो, यह जगत है और तुम जीवात्मा हो, तुम अलग हो
00:35:52दुम अलग हो, दुएत का यही तो मतलब होता है, तुम अलग हो
00:35:56ये जो द्वैतात्मक दर्शन चला है पूरी दुनिया में, वही दुनिया के हर पाप की जड़ में है, तुम अलग
00:36:04हो, तुम अलग हो, बिटेन इंडिया से अलग है, तो बिटेन इंडिया को बरबाद करके खुश हो सकता है, मनुष्य
00:36:11जंगल से अलग है, तो मनुष्य जंगल
00:36:13में आगल आगे खुद खुश हो सकता हैAmazon
00:36:18नदी तो बर्बाद करी है मैं
00:36:20तो हूस्टन में बैठा हुआ हूँ और
00:36:21एक डैशबूर्ट देख रहा हूँ नदी
00:36:23सूख गई तो सूख गई मेरा के जाता है मैं तो
00:36:25हूस्टन में बैठा हुआ हूँ
00:36:30बात आ रही है समझ में
00:36:32जब तक अलगाओ का भाव रहेगा
00:36:34तुम बस ये गिनोगे कि तुमने कितना लूट लिया
00:36:38और उसको बोलोगे अपनी आमदनी
00:36:42तुम ये गिनोगे ही नहीं कि उसका कितना नुकसान हो गया
00:36:45क्योंकि वो जी है कि मरे मेरा कहता है मैं तो अलग हूँ
00:36:49हम बस ये देख रहे हैं कि हमें कितना मिल गया
00:36:53हम ये नहीं देख रहे हैं कि किस कीमत पर मिला है
00:36:56हम प्रक्रत का नुकसान गिने ही नहीं रहे हैं
00:37:00और जैसे ही प्रक्रत का नुकसान गिनने लगोगे
00:37:02consumption अपने आप कम हो जाएगा
00:37:04कीमतें बढ़ जाएंगी
00:37:06जैसे ही तुम गिनने लगोगे
00:37:08किसी चीज की
00:37:09पूरी cost
00:37:11जिसमें environmental ecological cost शामिल है
00:37:14consumption अपने आप कम हो जाएगा
00:37:16अरे ये सब जो गाड़ियां ले लेके
00:37:18पहाड़ों पे चड़े जा रहे हैं
00:37:20इन्हें कोई परवतों से प्रेम है
00:37:21ये परवतों को भोगने आये हैं
00:37:23ये ज्यादा तर वो लोग हैं
00:37:25जो आते हैं परवतों का बलातकार करने
00:37:29इनकी हरकतें देखो
00:37:31ये गंदगी फैलाते हैं
00:37:34ये बोतले फोड़ते हैं
00:37:35ये आपस में लडाईयां करते हैं
00:37:37ये शोर करते हैं, ये धुआ छोड़ते हैं, ये किसी भी तरह से इस लायक नहीं है कि ये परवतों
00:37:45में प्रवेश कर सकें, पर ये सिर्फ इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि सब कुछ इनके लिए बहुत सस्ता कर
00:37:50दिया गया है, और सस्ता किसकी कीमत पर किया गया है, प्रकृती की
00:38:07दुख होगा कि ये आनेई पारे वास्तों में इन्हें आना कभी थाई नहीं ये सिर्फ इसलिए आये थे क्योंकि सस्ती
00:38:14चीज है चलो लूट लेते हैं रस्ते कमाल सस्ते में भारत का पहाण सस्ते में चलो लूट लेते हैं
00:38:30हरियाने से चलो उत्राखंड सस्ते में, दिल्ली से चलो, गाजियवाद से चलो, नोईडा से चलो, गुडगाओं से चलो, चंडीगड से
00:38:37चलो, सस्ते में, सस्ते में, सब लूटलो सस्ते में, इन्हें प्यार नहीं है, यह यहां सिर्फ विसले आ रहे हैं
00:38:45क्योंकि माल मिल रहा ह
00:38:46सस्ते में
00:38:47जिस दिन माल की वास्तविक कीमत
00:38:50लगा दी जाएगी डरों मत
00:38:51कि इन बेचारों का दिल तूट जाएगा
00:38:53उनके पास दिल है ही नहीं
00:38:55वो यहाँ प्यार की खाते राई नहीं रहे थे
00:39:02वो यहाँ प्यार की खाते राई नहीं रहे थे
00:39:04वो सिर्फ इसलिए आ रहे थे
00:39:06कि रस्ते में कोई चीज सस्ती मिल रही थी
00:39:08उठा ली
00:39:13बात आ रही है समझ में
00:39:15ये जिसको आप आम आदमी कह रहे हो
00:39:19इसने ऐसा कुछ नहीं करा है
00:39:21कि ये डिजर्व करे इतना कॉंजियूम करना
00:39:24ठीक वैसे
00:39:26जैसे
00:39:2719 वी शताबदी में
00:39:29आज से 100 साल पहले मान लो
00:39:321920 के आसपास
00:39:34एक जो आम ब्रिटिशर था
00:39:38वो दुनिया के सबसे
00:39:39अमीर लोगों में था
00:39:40उसने ऐसा क्या करा था भाई क्यों इतना अमीर हो जाए
00:39:43क्या करा था
00:39:46उसने ऐसा क्या करा था क्यों इतना
00:39:47उसने कुछ नहीं करा था, वो जाहिल हो सकता है, वो एक नंबर का कमीदा हो सकता है, फिर भी
00:39:53बहुत अमीर था, वो क्यों इतना अमीर था?
00:39:58वो सिर्फ इसलिए इतना अमीर था
00:39:59क्योंकि भारत से जो लूटा जा रहा था
00:40:01उसका हिसाब नहीं रखा जा रहा था
00:40:04जो भारत से लूटा जा रहा था
00:40:05अगर उससे वसूल लिया गया होता तो वो अमीर नहीं रह जाता
00:40:09इसी तरीके से आज दुनिया का जो आम आदमी है
00:40:11वो इतना consumption सिर्फ इसलिए कर पा रहा है
00:40:14क्योंकि प्रत्वी से हम जो लूट रहे हैं
00:40:16उस लूट का हिसाब नहीं रखा जा रहा है
00:40:19नहीं तो ही जो आम आदमी है
00:40:22इसकी कोई योग्यता नहीं है
00:40:25कि ये ले करके वहाँ SUV चढ़ा जा रहा है
00:40:27अरे SUV तुझसे दस्वी ठीक से पास कोई नहीं थी
00:40:31तो किस दम पे SUV चला रहा है
00:40:36और इसे तुझे SUV मिल गई है
00:40:38तुझे उसको सड़क पर चलाने की भी तमीज नहीं है
00:40:41तु फिर भी उसको लेके भगा जा रहा है
00:40:43रौंदर आये तु पहाडों को
00:40:51तु यहाँ जाता है किसलिए
00:40:53कि लड़की लेकर गया है हूँ भोगूँगा इसको
00:40:57तु यहाँ जाता है किसलिए
00:40:59कि यहाँ आएं अब और यहाँ बैठ करके खाएंगे
00:41:02और
00:41:04यहाँ नीचे इधर
00:41:06जक्ष्मन जूला
00:41:07से
00:41:09जब आप बाई तरफ को मुड़ करके चलते हैं
00:41:15अब इकल दो पहर में
00:41:17आठ दस थे
00:41:18वो लगभग पूरे नंगे हो करके
00:41:22जितनी अब अधरता कर सकते थे
00:41:23कर रहे थे और वीडियो बना रहे थे
00:41:25और जोड़़़ से चिला के
00:41:28ताकि सब का ध्यान भी तो खीचे
00:41:32और बगल में उनके एक थार खड़ी हुई थी
00:41:34मैं पूछ रहा हूँ इस आदमी के पास
00:41:36ये थार होनी क्यों चाहिए
00:41:38क्यों होनी चाहिए
00:41:40क्या हक है कि ये
00:41:42इस गाड़ी को खरीद पाए
00:41:44क्योंकि उस गाड़ी को खरीद के वो सिर्फ
00:41:46प्रक्रती को रौदेगा और कुछ नहीं करेगा
00:41:47और उसने ऐसी कोई योगिता प्रदर्शित नहीं करी है
00:41:51कि वो उस गाड़ी का मालिक बने
00:41:54ऐसी कोई योगिता नहीं है उसके पास
00:41:56पर उसको मिल गया है
00:41:57क्यों मिल गया है क्योंकि असली कीमत
00:42:00उससे वसूली नहीं गई
00:42:04बात आ रही है समझ में
00:42:09आप और सस्ता कर दीजे चीजों को
00:42:13देड़ सो करोड लोग जा करके
00:42:15वहां के दारनात में खड़े हो जाएंगे
00:42:18आप और सस्ता कर दीजे
00:42:21और आप सस्ता जो कर रहे हो वो धोखा है
00:42:24मैं इसलिए सस्ता करने के खिलाफ हूँ
00:42:26मैं कोई यहां महंगाई की पैरवी करने के लिए नहीं खड़ा हूँ
00:42:29कि इंफलेशन बढ़ाओ इंफलेशन बढ़ाओ नहीं
00:42:31मैं धोखे के खिलाफ हूँ
00:42:33आप प्रक्रति को लूट लूट कर
00:42:36एक आयोग ये आदमी के लिए
00:42:38चीजें सस्ती कर रहे हो
00:42:41आप प्रक्रतिमा को
00:42:42लूट लूट कर
00:42:43आयोग ये लोगों के लिए
00:42:45चीजें सस्ती कर रहे हो
00:42:46वो इसलिए जा करके
00:42:48परोतों को तबाह कर रहे हैं
00:42:54कितना समय लगा था
00:42:56इन पहाडों को बनने में
00:42:58और इन जंगलों को उगने में बताओ
00:43:00बोलो
00:43:02कितना समय लगा था
00:43:03अरे लाखों साल, करोडों साल
00:43:07और
00:43:08हर आदमी यहरा गयरा
00:43:10नथू खेरा वहाँ उपर चड़ जाए
00:43:12इसके लिए तुमने परवत काट दिये
00:43:14सड़क चोड़ी करी, जंगल तुमने
00:43:16सारे उखाड दिये, यह हजारों लाखों
00:43:18साल पुरानी संपदा थी, जो
00:43:20तुमने बरवाद कर दी, ताकि हर
00:43:22आदमी वहाँ पर अपनी थार लेकर चड़ जाए
00:43:25यह कोई
00:43:26मुनाफे का सौदा है, बस पूछ रहा हूँ
00:43:28पूछ रहा हूँ
00:43:29मूरल कोशेन नहीं
00:43:31में इसकी एकनॉमिक्स को कोशेन कर रहा हूँ
00:43:35मैं
00:43:35इसकी एकनॉमिक्स को कोशेन कर रहा हूँ
00:43:37मूरैलिटी को नहीं, बताओ
00:43:39क्या यह एकनॉमिकली, एक
00:43:41feminine life
00:43:41दिसीजन है
00:43:44आपने पृठ्वी की करोड़ों साल की
00:43:47संपदा जला दी है
00:43:50ताकि वो जो बततहजीव आदमी है जिसे कुछ नहीं करना है बस अपनी थार के ऊपर खड़ा हो करके नाचना
00:43:59है भद्दे गाने लगा करके वो वहाँ चढ़ जाए इसके लिए आपने हमारी करुणों साल की प्राक्रतिक विरासत डाइनमाइट लगा
00:44:07के उड़ा दी ये कहीं स
00:44:09भी मुनाफे का सोदा है ब्रिटेन ने भारत पर अत्याचार किया और हमें उसके विरोध में रोश रहता है ना
00:44:17बोलो हाँ या ना हम याद करते हैं ब्रिटेन को आक्रांता की तरह शोशक की तरह करते हैं ना तो
00:44:25बताओ जो काम ब्रिटेन ने भारत के साथ किया वही काम अग
00:44:39आज का भगत सिंग कैसा होगा?
00:44:43बोलो,
00:44:45वो सिर्फ बृतें का विरोध नहीं करेगा.
00:44:48वो पूरी मानवता का विरोध करेगा.
00:44:51वो सिर्फ यह नहीं कहागा की यह गोरे घुसाइन इनको बाहर निकालो.
00:44:55वो कहेगा यह एक एक इनसान जो है,
00:44:57इसको ठीक करो.
00:44:58वो होगा आज का भगत सिंग, वो आपको बनना है
00:45:16इसी के उपर मैंने कुछ रिपोर्ट्स भी पड़ी
00:45:19तो उनमें बताया गया कि पहाडों में जो वेस्ट इकठा होता है
00:45:25उसमें 95% जो वेस्ट है वो प्लास्टिक ही है
00:45:29और उसमें दूसरा सबसे बड़ा जो पॉल्यूटेंट है
00:45:33वो यही नूडल्स के पैकेट्स है
00:45:3680 प्रतिशत जो वेस्ट है वो सिंगल यूज फूड पैकेजिंग है
00:45:40और 70 प्रतिशत उसमें से नॉन रिसाइकलिबल है
00:45:45दूसरा जो वीकल पॉल्यूशन की बात हुई
00:45:48उसमें एक और रिपोर्ट मैंने बढ़ी
00:45:52जिसमें चारधाम यात्रा जो 2024 में हुई
00:45:56उस एक सीजन में ही 5.4 लाग से ज्यादा वीकल्स गंगोत्री और केदारना तक पहुँचे थे
00:46:05इन्वार्मेंटल एक्सपर्ट के अनुसार पहाडों में वीकल पॉल्यूशन मैदानों से चार गुना ज्यादा होता है
00:46:12ये एकोलोजिकल कॉस्ट किसी के भी फ्यूल में नहीं जुडती
00:46:18अरे मैं पूछ रहा हूँ ये आदमी जो अपनी निजी जिन्दगी में घोर अधर्मी है
00:46:26इसको एक बस करके मिनी बस करके ये टैक्सी करके गंगोत्री ये मुनोत्री आने की जरूरत क्या है
00:46:38तू पहले जमीन का अधर्मी था अब तू हिम्षिकर का अधर्मी होगा पर अधर्मी तो तू अभी भी है
00:46:46हाँ जब तू जमीन का अधर्मी था तब इतना उत्सरजन नहीं कर रहा था
00:46:51कम से कम तूने इतना पेट्रोल नहीं चलाया था
00:46:53पहाड पे चलके तूने अपना अधर्म तो क्या ही मिटाया
00:46:57तूने दुनिया भर का वो फ्यूल जला दिया और उसको पहाड पर फैला दिया
00:47:04बात आ रही है समझ में
00:47:05खाओ मैगी पर पूरी कीमत अदा करो ना
00:47:0995 प्रतिशत कचरा प्लास्टिक है और प्लास्टिक में भी सबसे बड़ा कचरा यही नूडल्स के पैकेट्स है
00:47:15पूरी कीमत दो इस कचड़े को साफ करने की वो मैगी के एक प्लेट में शामिल होनी चाहिए
00:47:20वो प्लेट पढ़नी चाहिए 800 रुपे की अब खाओ
00:47:26कोई भी ढंका आदमी वैसे भी यात्रा के दौरान मैगी तो खाएगा नहीं
00:47:32कारण सीधा है यात्रा का मतलब होता है आप गाड़ी में बैठे हो चल फिर नहीं रहे हो
00:47:38बहुत लंबे घंटों तक 8 गंटे 12 गंटे 18 गंटे तक आप चल फिर नहीं रहे हो
00:47:43तो इसका मतलब है खाना पचेगा नहीं ठीक से आप गाड़ी में बस बैठे हुए हो पचेगा नहीं
00:47:48और मैगी पेट में जा करके और जादा अटकती ही है तो कोई बहुत मूर्ख आदमी ही होगा जो यात्रा
00:47:54में मैगी खाएगा
00:47:56ऐसे आदमी को 800 रुपए की मैगी मिलनी चाहिए न मुर्खता टैक्स उसको मैं ग्रीन टैक्स नहीं भी बोलू तो
00:48:04स्टुपिडिडी टैक्स कहलाना चाहिए
00:48:06पर ये भी एक अजब रोमेंटिक नोशन है पहाड़ों की मैगी अरे तुखा मैगी पर एक प्लेट का 800 रुपया
00:48:15दे
00:48:19बात आ रही है समझ में मुझे उस आदमी से दिक्कत नहीं है उसका पेट है वो उसमें मैगी डाले
00:48:25कि गू डाले तू जान
00:48:27पर ये प्रत्वी मा है हमारी और धर्म में भी हम प्रक्रति को महादेवी बोलते हैं उन्हीं के लिए नौदोरगा
00:48:40मनाते हैं
00:48:42तेरी मैगी की हवस में तू प्रत्वी को बरबाद करे और प्रक्रति का अपमान करे ये हम नहीं सहेंगे
00:48:52बात समझ रहे हो एक से एक लोग हैं जो धारमिक बन करके
00:49:00धर्म का सबसे अदाप मान कर रहे हैं और पहाडों पर चड़े जा रहे हैं
00:49:06एक स्प्रेंडर उटाएंगे उसमें सौरूपे का तेल डलाएंगे और उसमें भगवा छंड़ा खोस देंगे
00:49:14और यहां पर ऐसे कमशा बाद लेंगे
00:49:17कि हम गुंडे हैं हमसे मत लड़ना
00:49:19और चड़ जाएंगे पहाड पर
00:49:22ये धर्म का अपमान है
00:49:24ये भगवा रंग का भी अपमान है
00:49:29और ये पहाडों की दुर्दशा है
00:49:33ये सिर्फ इसले जड़ पा रहे हैं
00:49:35क्योंकि वो पेट्रोल
00:49:37सौई रुपए का है
00:49:40पूरी कीमत लगाओ ना
00:49:41तुमने जो टोटल डिस्रक्शन करा
00:49:43उसकी कॉस्ट जोड़ो
00:49:44तो पता चलेगा कि कितना बैठता है
00:49:47मैं कह रहा हूँ
00:49:49बाइक छोड़ दो
00:49:50एक लीटर पेट्रोल नहीं अफूर्ड कर पाओगे
00:49:53अगर टोटल कॉस्ट लगा दी गई तो
00:50:01किसी से संबंदीद एक और रिपोर्ट मैंने पढ़िया चलेज़ी
00:50:04और आंकड़े काफी शॉकिंग थे
00:50:07इसके अनुसार ये रहा कि
00:50:09दुनिया की पब्लिकली लिस्टेड जो
00:50:11कमपनीज है
00:50:122021 में उन्होंने अकेले ही
00:50:153.71
00:50:17ट्रिलियन डॉलर की
00:50:18अनप्राइज़ इंवायर्मेंटल कॉस
00:50:21जनरेट की
00:50:22और ग्लोबल जीव डीबी का
00:50:244 प्रदिशत से ज़्यादा नुकसान
00:50:27किसी के बिल में नहीं रहा
00:50:30क्योंकि उसको आपने चुप चाप
00:50:32प्रथवी के खाते में डाल दिया
00:50:35जो ये कमपनीज मुनाफ़ा दिखा रही है
00:50:37मुनाफ़ा है यह नही
00:50:39वो बहुत बड़ा लॉस है
00:50:41बस उ मुनाफ़ए गैसा इसलिए दिख रहा है
00:50:43क्योंकि आपने laws को छुप-चाप प्रथवी में दफन कर दिया है
00:50:50ये बात समझ में आ रही है कि नहीं
00:50:52मैं एक company हूँ
00:50:53मैं एक company हूँ
00:50:54ठीके
00:50:55और मैं इस जंगल में काम करती हूँ
00:50:57ये पीछे जंगल है
00:51:02मैंने ये जंगल बर्बाद कर दिया
00:51:05और एक हजार रुपए का मैंने मुनाफ़ा दिखाया
00:51:08और जो मैंने जंगल बर्बाद किया
00:51:10उस बर्बादी की कीमत थी एक लाख रुपए
00:51:15मैंने, मैं एक कमपनी हूँ
00:51:19और मेरी जो पॉप फिलोसिफी है
00:51:22वो ये है कि मैं और ये जंगल अलग अलग है
00:51:27तो मैंने ये जंगल जो है पीछे पूरा ये पूरा जंगल बर्बाद कर दिया और एक हजार रुपए का मुनाफ़ा
00:51:31कमा लिया जंगल की बर्बाद ही एक लाख रुपए की
00:51:34मैं लिस्टेट कमपनी हूँ
00:51:37मेरे शेयर होल्डर्स को मैं दिखाऊंगा
00:51:39मैंने एक हजार का मुनाफ़ा कमाया
00:51:40मेरा शेयर और उपर जाएगा
00:51:42उसमें पूरी तरीके से मैं बात छुपा किया गया हूँ
00:51:45मैंने एक हजार कमाये नहीं है
00:51:47मैंने 99,000 गमाये है
00:51:49बस जंगल के बाएफ आवाज नहीं है
00:51:51कि बता पाए
00:51:53एक हजार कमाया नहीं है
00:51:5499,000 गमाया है
00:51:56तुमारा सारा प्रौफट नकली है
00:51:58तुम झुट बोल रहे हो कि दुनिया में तरक्की हो रही है
00:52:00GDP ग्रोथ हो रही है, प्रोग्रेस हो रही है
00:52:02कुछ नहीं हो रहा है, सिर्फ डिस्ट्रक्शन हो रहा है, तुम एक हदार का जो मुनाफ़ा दिखा रहे हो, उसके
00:52:07पीछे 99,000 की तबाही है, और तुम अपने आपको intelligent species बोलते हो, जिनको तुम बोलते हो dumb species,
00:52:15उनमें कोई ऐसी नहीं है जो अपने घर में आग लगा करके हाथ से
00:52:31एक और रिपोर्ट रही है सर इसके ओपर और यह जो एक्स्ट्रीम हीट जो इंडिया में अभी देखने को मिल
00:52:39रही है, उससे भारत को 150 बिलियन डॉलर की productivity का नुकसान हो रहा है
00:52:46और 2050 जानी mid century तक बिना intervention के ही GDP का जो loss है वो 8.7 प्रतिशत तक
00:52:55मैं इस line of thinking से बिलकुल सहमत नहीं हो, जब कहा जाता है कि देखो अगर climate crisis होगी
00:53:06तो GDP का इतना नुकसान हो जाएगा
00:53:09तो उसके पीछे मानने था यह है कि GDP बढ़ाना बहुत बड़ी बात है अरे climate crisis को रोको नहीं
00:53:15तो GDP कम हो जाएगा
00:53:18GDP बड़ी चीज है
00:53:21पर climate crisis तो ही इसले क्योंकि तुमको लगता है कि GDP बड़ी चीज है
00:53:28तो जब तुम कहते हो कि climate crisis से GDP का नुकसान हो रहा है तो तुम वास्तों में climate
00:53:33crisis और बढ़ाने की तयारी कर रहे हो
00:53:36क्योंकि GDP को ही सब कुछ मान लेना ही तो climate crisis का कारण है
00:53:43लगे हुए है विकास विकास विकास प्रगती चाहिए GDP बढ़ानी है इतने trillion economies की इतना उसका
00:53:51अमेरिका लगा हुआ है उसका तेल लूट लूँगा तेल लूटने से दुबारा make a great again
00:53:58GDP ही सब कुछ है और GDP को ही सब कुछ मानना तो climate crisis है अपना GDP बढ़ाने के
00:54:05लिए
00:54:05मैं जंगल, नदी, पशो, पक्षी, हवा, पानी सब तबाह कर दूँगा और बोलूँगा जब सब तबाह हो जाएगा
00:54:11देखा मेरा GDP कितना बढ़ गया अब रखो GDP अपनी जेव में तुमने सब खा लिया penny wise pound foolish
00:54:19करोडों का जंगल बरबाद करके तुमने एक हजार का मुनाफ़ा दिखाया है और तुम अपने आपको intelligent बोल रहे हो
00:54:30पर जंगल बदला लेगा उसकी नियत नहीं है बदला लेने की बस नियम है नियम है
00:54:45जो अपने ही घर में आग लगाते हैं वो खुद राक हो जाते हैं नियम है घर की नियत नहीं
00:54:52होती तुम्हें जलाने की नियम है
00:55:00इज़त देना बंद करो जो बोलते हो न वेस्टरन कॉर्पोरेशन को देख करके अरे वा इन्होंने इतना कमा लिया इतने
00:55:08ट्रिलियंड का इनका हो गया अब ये यूनिकॉर्ण हो रहा है इसका इतना मार्केट कैप हो गया
00:55:15उसमें से बहुत छोटा हिस्सा है जो इमांदारी की कमाई है बाकी सब लूट है और शोषण है और धोखा
00:55:25है उनको अपना रोल मॉडल मानना बंद करो पोईस लायक नहीं है
00:55:36बात आ रही है समझ में बहुत गलत लोगों के पास इस्पेंडिंग पावर आ गई है
00:55:48और बहुत ज्यादा लोगों के पास उनके पास ये स्पेंडिंग पावर कभी होनी ही नहीं चाहिए थी
00:55:58और वो स्पेंडिंग पावर का सबसे नाजायज इस्तिमाल कर रहे हैं बरबाद कर रहे हैं अपनी स्पेंडिंग पावर का इस्तिमाल
00:56:06करके
00:56:13अगर आपको पता हो
00:56:16कि इस समय
00:56:18आप जो भी चीजे इस्तिमाल करोगे
00:56:21उसकी असली कीमत क्या है
00:56:22तो क्या प्रत्वी की आबादी
00:56:24आप ऐसे बेतरतीब बढ़ने दोगे बोलो
00:56:29आपको अगर पता हो
00:56:30कि बच्चा प्यादा करने की और बड़ा करने की
00:56:32असली कीमत क्या है तो क्या आप बच्चे और प्यादा करोगे यह जो प्रथ्वी है न यह साड़े
00:56:42800 करोड लोगों का वजंड होने के लिए बनी ही नहीं है और मनुश्यों के आवादी
00:56:481100-1200 करोड होने वाली है प्रथ्वी पर अधिक से अधिक अधिक से अधिक
00:56:58300-400 करोड मनुश्य रह सकते हैं इस वक्त हमारी जो आबादी है वो दूने से भी ज्यादा है
00:57:06भारत की नहीं पूरी विश्व की आबादी की बात कर रहा हूँ
00:57:10इस वक्त दुनिया में जितने लोग हैं प्रथ्वी इनके आधों को भी नहीं ढो सकती
00:57:15मैं पूछ रहा हूं ये पैदा क्यों हुए ये पैदा इसलिए हुए क्योंकि इनको पैदा करना सस्ता था
00:57:21ये सिर्फ इसलिए पैदा हुए क्योंकि ये सस्ते में पैदा हो गए
00:57:26मावाब आपको पता होता कि आउलाज पैदा करना कितना महेंगा सौधा है
00:57:31तो आबादी कभी इतनी बढ़ती ही नहीं
00:57:37आप इस बात को अच्छे से समझेए
00:57:39इस प्रत्वी पर जो संसाधन है
00:57:42और जितना प्रतिव्यक्ति द्वारा संसाधन का उपभोग है
00:57:46ये प्रत्वी अधिक से अधिक
00:57:48तीन सो चार सो करोड लोगों का बोज उठा सकती है
00:57:54कुछ शोध करता तो कहते हैं नहीं
00:57:56तीन चार सो करोड भी ज़्यादा बोल रहे हो दो सो करोड
00:57:58धाई सौ करोड़ से आदा नहीं
00:58:04इतने पैदा क्यों हुए
00:58:07क्योंकि उन्हें
00:58:08पैदा करने वालों ने कोई कीमत ही नहीं आदा करी
00:58:11उन्हें पैदा करने गी बस हो गया पैदा
00:58:13अरे पैदा हुआ है तो अब तुसके साथ में सड़क भी पैदा कर गर्ब से अपने
00:58:18अब वो पैदा हुआ है तो जो जमीन लगेगी उसके लिए अनुगाने में तू अपने गर्ब से उसमीन भी पैदा
00:58:23कर
00:58:26सब कुछ पैदा कर अपने पेट से जब तूने अलाद पैदा करिये तो स्टील भी पैदा कर
00:58:31कॉल पैदा कर
00:58:34और अब तुने जो आउलाद पैदा करी है
00:58:37उसके गुजारे के लिए इतने जंगल पैदा करेंगे
00:58:39वो भी तु पैदा कर आउलाद के साथ
00:58:43या सिर्फ आउलाद पैदा करके छोड़ दी है
00:58:47जिंक पैदा कर
00:58:49मैंगनीज, मैंगनीशियम पैदा कर
00:58:50रेयर अर्थ पैदा कर
00:58:54यह सब पैदा कर
00:58:55क्योंकि
00:58:56जो तुने पैदा करा है न
00:58:58बच्चा, अब ऴो इन सब
00:59:00चीजों का उपभोग करेगा
00:59:02कहां से आएंगे वो चीजे? प्रतवी तो एक है
00:59:05एक प्रतवी है
00:59:08कहां से आएगा
00:59:09कैल्शियम, कहां से आएगा
00:59:10जिंक
00:59:21तुमने तो बच्चा पैदा कर दिया, पर अब वो जीवन भर जो कंजम्शन करेगा, वो कंजम्शन कहां से आएगा, प्रत्वी
00:59:27से आना है, और प्रत्वी तुमसे कीमत मांग नहीं रही है, इसलिए तुम पैदा करे जा रहे हो, प्रत्वी कीमत
00:59:35नहीं मांगेगी, पर हिसाब �
00:59:37बराबर कर रही है और हिसाब
00:59:39वो बड़ी बेदर्दी से बराबर करती है
00:59:41इसलिए सबको साधान कर रहा हूँ
00:59:51बात आ रही है समझ में
00:59:57समाधान
00:59:57आध्यात्मिक है
01:00:01जब तक ये लगेगा ना
01:00:02कि पेड काट कर अपना घर
01:00:04बना सकता हूँ, पेड कटते रहेंगे
01:00:08हमें वहाँ पहुचना पड़ेगा जहां खुद में और पेड में कुछ समानता दिखाई दे
01:00:16जहां कुलहाडी अगर पेड पर पड़े तो निशान हमारी पीट पर पड़े
01:00:23तब जाकर के प्रत्वी बचेगी अध्यात्म अकेला समाधान है
01:00:38और कुछ है आपके पस जो हम कंजप्शन की बात कर रहे हैं सर जो सस्थे खाने की बात कर
01:00:46रहे हैं
01:00:47तो यह करीब करीब तीन गुना है जो हम पे करते हैं और जो इसकी एक्ट्वल इंवार्मेंटल डैमेज कॉस्ट आती
01:00:55है
01:00:56वो 29 गुमेटल डॉलर है जबकि मार्केट में वही खाना हमें सिर्फ 09 गुम डॉलर में मिल जाता है तो
01:01:03असली की मत से यह
01:01:04असली कीमत कोई नहीं चुका रहा है आपको नहीं पता कि आप जो खाना खा रहे हो वो सबसिडाइज्ड है
01:01:10और वो सबसिडी कोई इंसान नहीं चुका रहा है वो सबसिडी प्रक्रति चुरा रही है आप प्रक्रति से चुरा चुरा
01:01:19कर खा रहे हो
01:01:23आपका पेट भर रहा है, कमपनियों का मुनाफ़़ा बढ़ रहा है
01:01:27और तभाह प्रत्वी हो रही है
01:01:34एनरजी सबसीडी है, फूड सबसीडी है, फर्टिलाइजर सबसीडी है
01:01:38हर वो चीज, जो प्रत्वी को तभाह कर रही है
01:01:42उसको राश्ट्रों ने सबसिडाइज कर रखा है
01:01:48ताकि आपको पता ही न चले कि आपके कंजम्शन की असली कीमत क्या है
01:01:58आपको क्या लगता है यह जो आप दूद पी लेते हो चाए पी लेते हो
01:02:03उसकी कुल कीमत उतनी है जितनी आप अगा करते हो
01:02:06कि आराम से आपको पंदार रुपए पचीस रुपए पचास रुपए में चाय मिल जाती है नहीं
01:02:14जो फूड इंडस्ट्री है विशेशकर जो एनिमल फ्लेश प्रोड़क्ट्स हैं यह हेविली सब्सिडाइजड होते हैं
01:02:25अगर ऐसा होता कि इधर के लोगों को सब्सिडाइज किया जा रहा है इधर के लोगों द्वारा तो यह लोग
01:02:31कर देते मारपीट पर उतारू हो जाते हो जाते न
01:02:36लेकिन इधर को और इधर को दोनों को सब्सिडाइज किया जा रहा है उसके द्वारा वो कर रहा है सब्सिडाइज
01:02:44जंगल
01:02:59प्राइसिंग भी समधान नहीं है अच्छे से समझो
01:03:01आप एक चीज की प्राइसिंग करोगे अहंकार किसी दूसरी चीज का भोग शुरू कर देगा
01:03:07और दूसरे प्राइसिंग तो सरकारों को ही करनी है ना
01:03:11सरकारें तो डेमोक्रेसी में जंताई खिलाव जाई नहीं सकती
01:03:14तो प्राइसिंग भी आखरी समधान नहीं है
01:03:17ग्रीन टैक्स भी आखरी समधान नहीं है, आखरी समधान तो वही है, जो गौतम बुद्ध ने करा था, क्यों काट
01:03:28रहा है इस बकरे को, बोल रहा है मास मिलेगा, बोल रहा है कितने किलो मास मिलेगा, छोटा ऐसा मेमना,
01:03:34बोल रहा है इतना, बोलते हैं अच्छा आ, यह मेरी ज
01:03:47जब जंगल कटने और पशु कटने बंद होते हैं मैं और वो एक हैं तो मुसको नहीं काट रहे हैं
01:03:54तो मुझे काट रहे हूँ
01:04:10इसी पर और कुछ
01:04:13नमस्ते सर इसी से रिलेटेट एक कुछन है तो आजकल गवर्मेंट पुछ कर रही है कारवन सीक्रेस्ट्रेशन प्रोजेक्स और कारवन
01:04:22क्रेडिट मार्केट्स तो सर इस अनदर अकाउंटिक डिसेप्शन
01:04:27एपसल्यूट सेल्फ डिसेप्शन एपसल्यूट
01:04:37और उसके नतीजे ऐसे हैं कि कोई भी इमानदार आदमी उसके बाद बेमानी नहीं करेगा
01:04:43नतीजे कहते हैं आटो मोबील में जब भी कोई एफिशिएंसी रिवालिूशन आता है
01:04:51तो जितना फियूल एफिशिएंसी से बचता है उससे ज्यादा खर्च होने लग जाता है सेल्स में इजाफे से
01:05:02ऐसे समझो
01:05:04कि आटो मोबील्स का
01:05:05सौ साल का इतिहास ना है
01:05:07सौ साल से ज़्यादा का इतिहास रहा है
01:05:08ठीक है
01:05:11इसमें कई बार ऐसा हुआ है कि
01:05:12टेकनोलोजी पूरा एक
01:05:15लंबा कदम लेके आगे बढ़ी है
01:05:16जिससे वेहिकल ज्यादा एफिशियन्ट
01:05:19हो गया है अब उसका
01:05:20फ्यूल कंजम्शन कम होगा
01:05:21या उसमें external economic factor भी रहे जैसे
01:05:24अमेरिका में सडके बना दी गई बहुत बढ़ी
01:05:26जब सडके बना दी गई तो
01:05:28वेहिकल की सेल बढ़ गई जब वेहिकल की सेल बढ़ गई
01:05:45तो उस tech improvement के कारण ही vehicle sale 25% से बढ़ जाएगी लो
01:05:54तुमने पर vehicle emission कितना कम करा 10% और उस पर vehicle 10% emission कम करने के कारण
01:06:04ही
01:06:04जो vehicle sale थी वो 25% बढ़ गई तो अब total emission का क्या हुआ कम हुआ के बढ़
01:06:10गया
01:06:13आप ये जितनी बाते बता रहे हो ना कि साब हम carbon emission कम नहीं करेंगे
01:06:18हम तो carbon को sequester कर देंगे ये होश्यारी प्रक्रति के सामने नहीं चलेगी अपनी जेब में रखो यार
01:06:25ऐसे नहीं चलता मूल समस्या इंसान के दिल से उठ रही है उसका कोई बाहरी समधान नहीं हो सकता
01:06:36छाती के cancer को मूँ पर make-up करके नहीं हटाया जा सकता
01:06:43कोई बात नहीं करना चाहता कि emission हो किस कारण से रहा है
01:06:47कि ज्यादा तर emission needless है कि emission का सबसे बड़ा driver तो population growth ही है
01:06:54कि man is the unit of emission लोग होंगे तो emit करेंगे
01:07:04और आदमी में अग्यान जितना ज्यादा होगा वो अपनी अबादी उतनी ज्यादा बढ़ाएगा
01:07:08कोई नहीं बात कर रहा अग्यान दो तरीके से emission करता है
01:07:14पहला मैं खुद emit करूँगा और दूसरा मैं बच्चे पैदा करूँगा
01:07:19ये दोनों बाते अग्यान से निकलती है
01:07:23जहां अग्यान होगा वहाँ जवरदस्त कामनाएं होंगी
01:07:27वो कामनाएं पहले तो तुम से emission कराएंगी
01:07:30और फिर उन्हीं कामनाओं के कारण तुम और बच्चे पैदा करोगे
01:07:33जो कि खुद emission करेंगे फिर वो बच्चे पैदा करेंगे जो और करेंगे
01:07:38आपको climate crisis रोकनी है
01:07:40उसका सबसे अच्छा तरीका है depopulation
01:07:44और depopulation मतलब यह नहीं होता कि लोगों को मार दो
01:07:47लोग अपने आप मरते हैं
01:07:48तुम बस और ज्यादा पैदा करने बंद करो
01:07:52लोगों की तो एक उम्र होती है कवदी होती हो
01:07:54खुदी विदा हो जाएंगे
01:07:56तुम जिस तादाज से जिस गती से नए बच्चे पैदा कर रहो
01:07:59इनको पैदा करना बंद करो
01:08:02प्रत्वी खुदी फिर धीरे अपने आपको सम्हाल लेगी
01:08:05अपनी मरमत कर लेगी
01:08:06अपने जखमों को भर लेगी
01:08:10लेकिं हम अपने आपको धोखा देने में लगे हुए हैं
01:08:13हम लाएं हैं
01:08:15इको फ्रेंडली टेकनोलोजीज
01:08:17ये लाएं हैं वो लाएं हैं
01:08:19अरे तुम एवी भी लेकर गया होगे
01:08:20तो 30-40 परसंट ही तो कममेमिशन होता है ना
01:08:23उसमें नेट एंटायर लाइफ साइकल मिलाके
01:08:26पर 30-40 परसंट कममेमिशन होता है
01:08:28इवी को तुम सबस्टिडाइज कर रहे हो
01:08:30इवी सस्ती मिलती है दुनिया के सब देशों में सबस्टिडाइज है
01:08:34और उसके चलने की लागत भी कम होती है
01:08:36तो नतीजा क्या होगा
01:08:37जिस घर में एक गाड़ी थी पेट्रोल से चलने वाली
01:08:40उस घर में तीन एवी खड़ी हो जाएंगी
01:08:42अब तीन एवी खड़ी हो गई तो एमिशन कम हो गया कि जादा हो गया
01:08:47परीबात हम खुश हो आते हैं
01:08:49ग्रीन टेक्नोलजी लाएं ग्रीन टेक्नोलजी
01:08:51तुम लाओ ग्रीन टेक्नोलजी
01:08:53एक पेट्रोल गाड़ी पर तीन एवी खड़ी हो जाएंगी
01:08:56अब कर लो जो करना है
01:09:00और यही हुआ है इतिहास में
01:09:02यह मैं कोई आशंका नहीं व्यक्त कर रहा हूँ
01:09:04इतिहास में ऐसा ही हुआ है
01:09:07और सबसे आदा ही भारत में होगा
01:09:09अमेरिका में लगबग हर आदमी के पास अपनी एक कार है
01:09:12वहाँ अगर हजार की आबादी है
01:09:13तो वहाँ 980 कारे होती है हजार लोगों पर
01:09:17भारत में अभी हजार लोगों पर
01:09:2030-35 कार होती है
01:09:2230-35
01:09:24तो सबसे आदा कारें बढ़नी का आया है
01:09:27भारत में ही बढ़नी है
01:09:31तुम ले आओ E.V. सबसे आदा यहीं पर बढ़ेंगी
01:09:34और अभी पार्किंग के लिए लोगों की हत्याएं हो रही है
01:09:41अमेरिका में अब और ज्यादा बिक्री बहुत हो नहीं सकती
01:09:44पहले ही सब के पास कार है
01:09:45उनका तो अभी है कि कार पुरानी पड़ेगी तो अगली ले लेंगे
01:09:48या बड़ी लेंगे
01:09:50पर कार की सबसे आदा जो भूख है वो तो हिंदुस्तान में ही है न
01:09:53हजार लोगों पर चौतीस कार है बाकियों को भी चाहिए
01:09:55तुम लाओ E.V.
01:10:14कानूनी भी नहीं है
01:10:16Economics जरूरी है पर परयाप्त नहीं है
01:10:20हाँ बिलकुल
01:10:21Fair Pricing होनी चाहिए
01:10:23Eco Taxes होने चाहिए
01:10:25Green Labeling होनी चाहिए
01:10:27पर उतने से बात बनेगी नहीं
01:10:31अन्ततह तो मनुष्य के अन्तह करण की सफाई ही करनी पड़ेगी
01:10:35उसको आनंद के
01:10:38दूसरे दौार दिखाने पड़ेंगे
01:10:40अभी उसको आनंद बस इसमें मिलता है
01:10:41कि जाकर पहाड का बलातकार कर दू
01:10:44और दस बारा बच्चे पैदा कर दू
01:10:46दस बारा नहीं तो भी जितने कर सकता हूँ
01:10:47उतना तो करीदो
01:10:49क्योंकि वही तो happy life है
01:10:50वही तो good life है
01:10:53मनुशे को बताना पड़ेगा
01:10:54कि आनंद के दूसरे तरीके हैं
01:10:57और बहुत अच्छे और बहुत उच्चे तरीके हैं
01:11:01तुम्हें हर समय
01:11:02consumption की जरूरत नहीं है
01:11:05तुम्हें हर समय
01:11:06एक साथी खोजने की जरूरत नहीं है
01:11:08विपरीत लिंगी मिल जाए मिल जाए
01:11:09यह जो romance का पूरा culture है
01:11:13इसकी भी
01:11:14गहराई से जाच करनी पड़ेगी
01:11:18तुम्हारे romance के अंत में और क्या रखा है
01:11:20बच्चों के अलावा
01:11:21जब तुम कहते हो प्यार हो गया प्यार हो गया
01:11:24वो प्यार और कहा जाता है
01:11:25maternity world ही तो जाता है
01:11:27और क्या है तुम्हारे प्यार में
01:11:35प्रेम को भी पुनर परिभाशित करना पड़ेगा
01:11:38कि प्रेम वास्तव में क्या है
01:11:39और जो प्रेम सचमुच है
01:11:41वो मानवता को सीखना पड़ेगा
01:11:45तभी यह प्रत्वी बचेगी
01:11:48प्रेम ही है जो प्रत्वी को बचा सकता है
01:11:51पर वो अला प्रेम नहीं
01:11:54कि I love the hills
01:11:57they are good for
01:11:59blues and girls
01:12:00वो अला प्रेम नहीं
01:12:02I love the hills अला प्रेम नहीं
01:12:05वो प्रेम
01:12:08जो किसी कबीर ने किसी बुले शान ने सिखाया है
01:12:11वो प्रेम
01:12:13वो प्रेम जब इनसानिएट सीखेगी
01:12:15तो शायद बच पाए
01:12:17नहीं तो कुछ नहीं है
01:12:20हमने
01:12:22जिस गते से अनुमान लगाया था
01:12:24उससे कहीं ज्यादा
01:12:25तीवर गते से हम बरबाद हो रहे हैं
01:12:29हमने कहा था
01:12:30Operation 2030
01:12:31अभी साल भर भी नहीं बीताया
01:12:33वो नाम बेढ़ंगा लगने लगाया है
01:12:35क्योंकि जितनी आशंका थी
01:12:38कि Carbon Level 2030 में होगा
01:12:40वो 2028 में होने जा रहा है
01:12:45हम अपने विनाश की और सिर्फ बढ़ नहीं रहे हैं
01:12:49एक्सिलरेट कर रहे हैं अपनी नई थार में
01:12:59और जानते हैं हम किस से चुरा रहे हैं
01:13:01हमने कहा हम प्रत्वी से चुरा रहे हैं
01:13:03हमने कहा हम पशुओं से चुरा रहे हैं
01:13:07दिल थामो और बताता हूं किस से चुरा रहे हैं
01:13:10हम अपने बच्चों से चुरा रहे हैं
01:13:12हम उनके भविश्दे चुरा रहे हैं
01:13:15और लानत भेजेंगी तुमारी उलादें तुम पर
01:13:18कि हमारे हिस्से का भी खा गए हमारे माबाब
01:13:22और हमारे लिए एक बिल्कुल जल्ती हुई तबाह बंजर प्रत्वी छोड़ कर गए है
01:13:27हम अपने अतीत का तो खाई रहे हैं
01:13:30अपनी विरासत का तो खाई रहे हैं
01:13:32हम अपने भविश्य से भी उधार ले लेकर खा रहे हैं हम भूत और भविश्य दोनों को खा रहे हैं
01:13:39हमने अपने बच्चों का हिस्सा भी खा लिया हम ऐसे लोग हैं
01:13:49अच्छेत नहीं रहे हैं आत्म विश्वास हमें पूरा है ग्रीन टेक्नोलोजी लाएंगे साब ग्रीन टेक्नोलोजी से हो जाएगा
01:14:00नहीं नहीं मशीने इजाद कर रहे हैं हम एट्मोसियर में जो कार्बन है उसको वापस सक कर लेंगे
01:14:14भाई किसी भी मशीन की एफिशेंसी आम तौर पर 30-40-50% से ज़्यादा तो होती नहीं है
01:14:24तुम कार्बन डायोकसाइट सक करोगे उसके लिए भी तो एनरजी चाहिए ना नहीं
01:14:32अर्मानों को कौन रोक सकता है एफिशेंसी तो 100% कभी क्रॉस करेगी नहीं और तुम कह रहे हो कि
01:14:40एट्मोसियर से कार्बन डायोकसाइट लेना है वो जो मशीन चलेगी
01:14:46वो किस एनरजी पर चलेगी वो क्या चलाकर आएगी एनरजी हम कर लेंगे तुफिकर ना कर कुछ ना होता मौच
01:15:02कर
01:15:05सोचे बहुत है तु मौच क्या अगर बस
01:15:17पूरी संस्कृति को सुधार की जरूरत है वो सब चीजें जो आपको दिख रहा है बरबादी की हैं उस पर
01:15:25खुश होना और बधाईयां देना बंद करो उस पर शोकशंदेश दिया करो
01:15:32अभी वहाँ चले जाओ थोड़ा सा आगे शिवपूरी की ओर वहाँ प्री वेडिंग फोटो शूट चल रहा है उनको सांतों
01:15:40नहीं देखके आओ
01:15:43आपके साथ बहुत गलत हो गया और इशुर भी आपके हंकार को शांती नहीं दे सकता
01:15:56बढाई क्या दे रहे हो
01:15:58यह शोग की घटना है
01:16:00और वो दोनों मूर्ख है महा मूर्ख है
01:16:04तुम्हें क्या लग रहा है
01:16:05वो ब्याकर क्या करने वाले है
01:16:07एक दूसरे को मुख्ति देने वाले है
01:16:09नहीं वो एक दूसरे को काट खाने है
01:16:15और तुम जाके कहोगे
01:16:16Hello, Congratulations
01:16:18उसके बाद काओगे तुम गीता चातरो, गीता ने तुम्हें ये सिखाया है, जूट को प्रोचसाहन देना, बरबादी परबधाई देना,
01:16:36एक की मेल आई है, हेलो जी, मेरा जी, टिकट जी, रिफंड कर दो जी, क्यों, वो ना मेरी दिद्दू
01:16:46का संगीत था,
01:16:47तो जीज्जू ने बोला कि तू नहीं नाचेगी, तो फिर तो मजा नहीं आएगा, तो मैं इसलिए नहीं आऊँगी,
01:16:54वो दिद्दू की शादी में जीज्जू को संकेत दे रही है, और हमसे चिज्जू आपस मांग रही है,
01:17:08एक-एक बात बदलने की जरूरत है, जो कुछ जैसा अतीत में चला है,
01:17:15अगर उसको चलने दोगे, तो जो हो रहा है, वो वैसा ही चलेगा जैसा चल रहा है,
01:17:22तुम्हें सब कुछ बदलना पड़ेगा,
01:17:27रुके किसलिए हुए हो, समय नहीं है,
01:17:40और बदलाओ बाहर से ज्यादा यहां चाहिए, यहां आ जाएगा तो बाहर अपने आप सब बदल जाएगा,
01:17:54और कुछ, इसी से रिलेटर, प्रिणाम अचारेजी,
01:18:05अचारेजी जैसे मैं पंजाब से हूँ, लुध्याना बेसिकली,
01:18:09उसमें मैं यह कल्चर देख रही हूं कि बच्चों को जैसे अभी थार की बात हो रही थी,
01:18:14तो 15-16 साल के बच्चे, अराम से थार और ऐसी बड़ी गाड़ियां लेके, उनके पेरेंट्स ही उनको देते हैं,
01:18:23और वो बहुत तेजी से उसको ड्राइव करते हैं, वेप्स हैं उनके पास, 7-8 वी बच्चों के पास,
01:18:29और अगर पेरेंट्स से ये चीज़ पूछो तो उनको कुछ पता नहीं है,
01:18:33अरे भाई आपने महौल ही बना रखा है, जिसमें जिन्दगी का मतलब ही यही होता है,
01:18:40जिन्दगी माने क्या, ओई मौजाई मौजाँ, तो और क्या होगा,
01:18:45आप से कोई पूछे, कि जिन्दगी काई में सार्थक होगी, तो आप यही तो बोलोगे, बल्ले बल्ले,
01:18:55न आपको दर्शन से मतलब, न गरंट से मतलब, न बोध से मतलब, आप जिन्दगी की गहराईयों में जाना नहीं
01:19:03चाहते,
01:19:05सचाई क्या है और प्यार किसको कहते हैं, इससे कोई सरोकार नहीं, तो और क्या करोगे, बोतले फोड़ोगे, गाड़ियां फोड़ोगे,
01:19:16और करोगे क्या,
01:19:1770-80 साल मिले ढोने के लिए
01:19:20इनको कैसे ढोगे
01:19:21यही तो करोगे
01:19:23कुछ ना कुछ तो बहाना चाहिए न जीने के लिए
01:19:25क्या है बहाना, यही है बहाना
01:19:28जाओ जाके कहीं से कोई लड़की पकड़ लाओ
01:19:30लड़का पकड़ लाओ
01:19:34और क्या करोगे वक्त कैसे गाटोगे
01:19:43जब जीवन का अर्थ ही हमें ना हमारी शिक्षा ने बताया ना परिवार ने बताया ना परवरिश ने बताया
01:19:51तो बंदा और करेगा क्या
01:19:58खुशी खुशी खुशी खुशी चिलाएगा
01:20:01मुझे खुशी चाहिए और खुशी किसी का भी गला काटेगा
01:20:12ये रिशिकेश
01:20:15आसे दस साल पहले
01:20:18वीगन खाना
01:20:21मने पशुक्रूर्ता
01:20:22मुक्त खाना
01:20:23जितनी आसानी से दिल्लीवनी मिलता नहीं मिलता था
01:20:26क्यों
01:20:27क्योंकि यहां विदेशी बहुत आते थि
01:20:30बहुत आते थि
01:20:32और उनको नहीं चाहिए था
01:20:36टिक्का मसाला
01:20:40बटर चिकन
01:20:41वो नहीं मांगते थे
01:20:43विचितरबार
01:20:45वो बलकि मांगते थे सात्विक खाना
01:20:48और यहां हर जगे मिलता था
01:20:49इस बार मुश्किल है
01:20:52क्योंकि कोविड के बाद से
01:20:54यहां विदेशियों ने आना बंद कर दिया
01:20:55और वो जो विदेशियों ने जगह खाली करी
01:20:58उसको बहुत ही बेकार किसम के
01:21:00लोगों ने भर दिया है यहां
01:21:02बहुत ही गलत किसम के लोग अजीब लोग
01:21:04वो यहां पहुँच गए हैं जिनको यहां कभी पहुँचना ही नहीं चाहिए था
01:21:07वो यहां पहुँचे हैं सिर्फ इस जगह को बरबाद करने के लिए
01:21:11अब आप जाईए तो हर जगह पर बताओ भाई कौन से चिकन खाना है चिकन ही चिकन ही चिकन मिल
01:21:19रहा है हर जगह मिल रहा है पहले नहीं मिलता था
01:21:23बिल्कुल गंगा किनारे भी कोई कैफे होगा, वहाँ भी आप चिकन बर्गर मांगेंगे मिल रहा है, पहले नहीं मिलता था
01:21:34गरीबी के दौर से गुजरा है हमारा देश, और अब जब थोड़ा पैसा आने लगा है, तो हमको पता ही
01:21:40नहीं है कि उस पैसे का करना क्या है, हम उस पैसे का बस चिककन शिककन दारू शारू करते हैं
01:21:49आपको खुशी होगी इसनाते, जो हमारी अपनी एप है, जिसमें हमारी गीता और बाकी सब कारिकरम चलते हैं, यहाँ पर
01:21:57बुद्ध हैं, गीता हैं, उपनिशद हैं, अश्टावक्र हैं, यह मुझे मिले मेरी जिन्दगी बदली, यह तुम्हें मिलेंगे तो मारी जिन्द
01:22:36दिया तो हैं, जो बिल्कुल बदली हैं,
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