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क्या Iran के Oil को लेकर दुनिया एक नई जंग की तरफ बढ़ रही है?
USA और China के बीच तनाव अब खुलकर सामने आ चुका है, और हालात बेहद नाजुक बनते जा रहे हैं।Iran Oil Deal को लेकर China का आक्रामक रुख America को सीधी चुनौती देता दिख रहा है।Donald Trump के सख्त बयान ने इस टकराव को और भी भड़का दिया है।Middle East में पहले से ही बढ़ते तनाव के बीच ये नई खींचतान दुनिया के लिए खतरे की घंटी हैOil supply, trade routes और global power dominance की ये लड़ाई अब सिर्फ आर्थिक नहीं रह गई।Experts का मानना है कि ये टकराव आने वाले समय में बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।क्या ये सिर्फ geopolitical tension है या सच में World War 3 की आहट?इस रिपोर्ट में समझिए पूरी कहानी, आखिर क्या है इस टकराव की असली वजह।

Is the world heading towards a new global war over Iran’s oil?Tensions between the USA and China have escalated dramatically, making the situation extremely sensitive.China’s aggressive stance on the Iran oil deal is being seen as a direct challenge to the United States.
Strong statements from Donald Trump have further intensified the conflict.Amid rising instability in the Middle East, this power struggle signals a dangerous shift in global politics.The fight over oil supply, trade routes, and global dominance is no longer just economic.Experts warn that this confrontation could potentially escalate into a larger conflict.Is this just geopolitical tension, or the beginning of World War 3?Watch the full report to understand the real reasons behind this growing crisis.

#USAvsChina #IranOil #WorldWar3 #GlobalTension #Trump #MiddleEastCrisis #OilWar #Geopolitics #BreakingNews

~HT.318~PR.512~GR.508~

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Transcript
00:04क्या एक सूपर पावर दूसरी सूपर पावर के रूल्स को पूरी तरह से रप कर सकता है आज बात करेंगे
00:10उस ओईल वार की जिसने वाशिंग्टन और बीजिंग को आमने सामने लाकर खड़ा कर दिया है दर्शकों आज हम डीकोड
00:18करेंगे चाइना का वो बड़ा मूव जिस
00:30दर्शकों बड़ी अनाउंस्मेंट आ रही है चाइना के डिफियांसे से चाइना ने खुले आम यूएस को चैलेंज कर दिया है
00:37चाइना की मिनिस्ट्री ओफ कॉमर्स ने एक प्रभिहिशन ओडर यानी एक कानूनी रोक लगा दी है उन यूएस सांक्शन पर
00:45जो उनकी पा�
00:51ये एरान से तेल खरीद रही है और यूएस के मुताबित ये गलत है लेकिन चाइना का कहना है कि
00:57ये सांक्शन इंटरनाशनल लौ का उलंगन करते हैं वीजिंग ने साफ कर दिया कि उनकी कंपनीज इन सांक्शन को रेकगनाइज
01:05या कंप्लाइन नहीं करेंगी यानि ये कं�
01:13टी-POT Refineries हैं अब आप सोच रहे होंगे ये T-POT Refineries क्या होती है क्या ये चाये बनाती
01:19है जी नहीं
01:20Hypn Persian yla ये चायना की वो Refineries हैं जो सरकारी जायंस जैसे Sinopec के अंडर नहीं आती है ये
01:28छोटे स्केल पर लिकिन बहुत तेजी से काम करती है ये चायना की
01:33टोटल रिफाइनिंग कपासिटी का लगबग 25% हिस्सा इनिटी पॉट्स के पास हैं। बड़शकों ये वो प्लेयर्स हैं जो इरान,
01:41रश्य और वेनिजवेला जैसी कंट्री से सस्ता डिसकाउंटेड ओयल खरीदने में माहिर हैं जिन पर यूएस ने बैन लगा रखा
01:48हैं।
01:49ये वहाँ से सस्ता डिल खरीते हैं इसलिए बड़े जायंट्स के आगे सस्ता डिल बेच पाते हैं। अब इस लिस्ट
01:55में सबसे बड़ा नाम है हैं हैंगली पेट्रोकेमिकल।
01:58यूएस ट्रेजरी का कहना हैं कि हैंगल तहरान के सबसे बड़े वाल्यूड कस्टुमर हैं जिसने एरानियन मिलिटरी को करोडो डॉलर्स
02:06की कमाई करवाई हैं।
02:10जैसे चार और नाम इस ब्लॉक लिस्ट में शामिल हैं। यानि वो सारी बड़ी कंपनीज जो इरान से तेल खरीती
02:18हैं। अब चाइना इरान से सबसे जादा तेल खरीता है। इरान की 90% बार्किट ही चाइना है। ये उन
02:25पे सैंक्शन लगाके बैठे थे। और ट्रम्प न
02:40उस पर डिपेंट करता है। और डेटा कहता है कि 2025 में एरान ने जितना भी ओयल इस्पोर्ट किया उसका
02:4780% से जादा किलाथ चाइना ने खरीगा। चाइना का लॉजिक सिंपल है। हम यूएन की सांक्शन मानते हैं। लेकिन
02:53किसी एक देश यानि यूएस की मनमानी नहीं सह
02:58उनका कहना है कि इस सांक्शन उनकी नाशनल सौवरेंटी और डेवलप्मिंट इंटरस्ट के खिलाफ है। यानि सीधे तौर पर एकॉनमिक
03:06दुनिया में चाइना ने यूएस की खिलाफ अपना पर्चम लहरा दिया है। अब दर्शकों इन टी पॉच का स्ट्रगल बहुत
03:13
03:13और इन रिफाइनरीज की राह इतनी आसान नहीं है। एक तरफ यूएस संक्शन ने इनके लिए इंटरनाशनल बैंकिंग के दरवाजे
03:21बंद कर दी है। वहीं दूसरी तरफ चाइना की अपनी एकॉनमी में ठोड़ी ठंडी पड़ी है। इन्हें कई बार अपने
03:27रिफाइ
03:40लेकिन नर्शकों चाइना का ये प्रोबेशन ओडर एक बहुत बड़ा जियो पॉलिटिक सिग्नल है। यह दिखाता है कि बीजिंग अब
03:47यूएस के फाइनांशल सिस्टम्स और सांक्शन को इग्रोर करने की ताकत रखता है। वह इनमें विश्वास ही नहीं रखता। क्य
03:55यूएस इसका पलट वार करेगा। क्या सांक्शन का असर खतम हो जाएगा और टरंप की दुनिया भर में बेस्ती हो
04:01जाएगी। चाइना जैसी बड़ी एकॉनमी उन्हें मानने से इंकार कर देगी तो दुनिया पर असर खराब ही पड़ेगा। लेकिन फिलाल
04:09इनरजी की इ
04:11एक बड़ा चेक दे दिया है। आपको क्या लगता है? क्या चाइना का ये स्टेप ग्लोबल मार्केट में ऐल प्राइस
04:16को स्टेबिलाइस करेगा? या फिर से टेंशन बढ़ जाएंगी? कमेंट करके ज़रूर बताइएगा। आप देख रहे हैं OneIndia, नहीं हुआ
04:23कर श्कॉ
04:23कि आपको स्टेबिसे स्टेबिसे सी
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