00:24थीवन में चेल रही समस्यां खत्म होने के साथ ही
00:27विशेश पुण्यों की प्राप्ति हूती है
00:29जने इन जने में किये गए पापों से मुक्ती मिलती है, व्यक्ति की इच्छा पूरी होती है
00:34लेकिन इस दिन अप्रैकादुशी की कथा जरूर पढ़ने चाहिए, इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है
00:44प्राचीन काल में महिध्वज नाम के एक धर्मात्मा राचा थे, जिनका छोटा भाई ब्रजध्वज बहुती क्रूर और अधर्मी था
00:52ब्रजध्वज ने सडियंत रच कर अपने बड़े भाई की हत्या कर दी और उनके शरीर को एक पीपल के पेड़
00:58के नीचे दबा दिया
00:59अकाल मृत्ति होने के कारण राजा महिध्वज की आत्मा प्रेथ बनकर उसी पेड़ पर रहने लगी थी
01:07और रहगीरों को परिशान करने लगी एक दिन धौम में रिशी उस रास्ते से गुजर रहे थे और अपने दिव्वे
01:15दिर्ष्टी से राजा के प्रेथ मनने का कारण जान लिया
01:18रिशी को राजा पर तया आ गई और उन्होंने राजा को प्रेथ योनी से मुक्ति दिलाने के लिए सोह में
01:24अप्राय कादिशी का व्रत किया
01:26रिशी ने अपने व्रत का सारा पूर्णे राजा को दान दे दिया
01:30अप्रयक आदिशी के पूर्णे प्रभाव से राजा मही ध्वज को तुरंत ही प्रेतियोनि से मुक्ती मिल गए
01:36उसके सारे पाप धुल गए और वो एक दिव्य शरीर धारन कर स्वर्ग लोग को चरे गए
01:42जाते समय राजा ने धौमे रिशी का आभार प्रकट किया
01:46और बताए कि कैसे इस व्रत ने उन्हें घोर कस्टों से मुक्ती दिला दी
01:51ये कहानी हमें जिखाती है कि चाहे अंजाने में ही कितनी भी बड़ी गलती हुई हो
01:56अगर हम भगवान की शरण में जाते हैं और विदिविधान से व्रत का पालन करते हैं
02:02तो हमारे जीवन के दुखों का आंतर जरूर होता है
02:05इस कता को सुनने मातर से भी व्यक्ति के कस्ट कम होते हैं
02:09और उसे मांसिक शान्ति प्राप्त होती है
02:11फिरहाल हमारे इस वीडियो में इतना है
02:14वीडियो को लाइक शेर और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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