Skip to playerSkip to main content
  • 2 days ago
असफलता से सीखो: सबसे बड़े लोगों की गलतियों से सीखें - Focusing on the journey from failure to success.
Transcript
00:26द्वार का
00:31जहां हर ओर शान्ती और भक्ती का वातवरन था
00:35महल के भीतर भगवान कृष्ण बैठे थे
00:38उनके चहरे पर वही दिव्य मुस्कान थी
00:40जो हर मन को शान्ती दे देती थी
00:43गरुड जी ने जुक कर प्रणाम किया
00:45प्रभु
00:47भगवान कृष्ण मुस्कराय
00:48आओ गरुड ऐसा लगता है तुम्हारे मल में कोई प्रश्ण है
00:53गरुड जी बोले
00:54हाँ प्रभु
00:55मैंने प्रित्वी लोग पर देखा
00:57कि लोग तूटे हुए बर्तनों में भोजन करना अशुभ मानते है
01:01क्या सच में ऐसा करने से कोई दोश लगता है
01:04भगवान कृष्ण कुछ क्षण शांत रहे
01:07फिर उन्होंने धीमे स्वर में कहा
01:09गरुड मनुष्य की परंपराएं केवल अंधविश्वास नहीं होती
01:13उनके पीछे जीवन को सुरक्षित और पवित्र रखने का ज्यान छुपा होता है
01:18गरुड जी ध्यान से सुन रहे थे
01:21भगवान कृष्ण आगे बोले
01:23तूटे बर्तन में भोजन करने से केवल शरीर ही नहीं
01:27मन और भाग्य पर भी प्रभाव पड़ता है
01:29गरुड जी आश्चरे चकित हो गए
01:31उन्होंने पूछा
01:33प्रभू ये कैसे संभव है
01:35भगवान कृष्ण मुस्कराए
01:37फिर बोले
01:38मैं तुम्हें एक कथा सुनाता हूँ
01:40बहुत समय पहले एक नगर में
01:42विराज नाम का एक व्यक्ती रहता था
01:44विराज महनती था
01:46लेकिन बहुत लापरवाह भी था
01:48उसके घर में कई पुराने
01:50और तूटे हुए बर्तन पड़े रहते थे
01:52उसकी पतनी कई बार कहती
01:55इन तूटे बर्तनों को फेंक दीजिए
01:57लेकिन विराज हसकर कहता
01:59अरे बर्तन तूटा है तो क्या हुआ
02:02खाना तो वही है
02:03धीरे धीरे उसने आदत बना ली
02:06कि वो अकसर तूटे हुए कटोरे में ही भोजन करता था
02:09एक दिन की बात है
02:11संध्या का समय था
02:13आसमान में हलकी लालिमा फैल रही थी
02:15विराज अपने आंगन में बैठ कर भोजन करने लगा
02:19उसके हाथ में वही पुराना
02:21किनारे से तूटा हुआ कटोरा था
02:23जैसे ही उसने पहला कौर उठाया
02:25उसे अचानक लगा
02:27जैसे कोई उसे देख रहा है
02:29उसने चारों और देखा
02:31लेकिन वहाँ कोई नहीं था
02:33उसने सोचा
02:34शायद मेरा भ्रम होगा
02:36वो फिर से भोजन करने लगा
02:38लेकिन उसी समय अचानक तेज हवा चली
02:42आंगन में रखा दीपक
02:43जोर से कामपने लगा
02:45और उसी क्षन आंगन के कोने में
02:48एक अजीब सी चाया दिखाई दी
02:51विराज का दिल
02:52जोर जोर से धड़कने लगा
02:54उसने घबरा कर पूछा
02:56कौन है वहाँ
02:57कुछ क्षन तक सननाटा रहा
03:00फिर उस चाया से
03:01एक धीमी आवाज आई
03:03तुम वही कर रहे हो
03:06जिसके कारण
03:07तुम्हारे जीवन में
03:09दुरभाग्य ब्रवेश कर रहा है
03:12विराज के हाथ से
03:13कटोरा गिर गया
03:14उसकी आवाज कापने लगी
03:16तुम कौन हो
03:19चाया धीरे धीरे
03:21स्पष्ठ होने लगी
03:22और जो दृष्ष विराज ने देखा
03:25उसे देखकर उसका पूरा शरीर काप उठा
03:27क्योंकि उसके सामने खड़ी थी
03:30एक अजीब और भयावह आकरिती
03:32उसकी आखों में गहरी उदासी थी
03:36वो बोली
03:37मैं वही हूँ
03:39जो तूटे हुए बरतनों में बसे
03:41दोष के साथ रहती हूँ
03:44विराज की सांसे तेज हो गई
03:46वो समझ नहीं पा रहा था
03:48कि उसके सामने क्या खड़ा है
03:50लेकिन सबसे बड़ा रहस्य ये था
03:53कि तूटे बरतन में भोजन करने से
03:55ऐसा कौन सा दोष जागरित हो जाता है
03:58जो धीरे-धीरे मनुष्य के जीवन को
04:00प्रभावित करने लगता है
04:01और वो रहस्य में आकरती आखिर कौन थी
04:04जिसने विराज को ये चेतावनी दी
04:07आंगन में गहरा सन्नाटा था
04:09तेज हवा के कारण
04:11दीपक की लौब बार-बार कांप रही थी
04:13विराज के हाथ से तूटा हुआ कटोरा गिर चुका था
04:17उसका दिल तेजी से धड़क रहा था
04:19उसने ड़ते हुए सामने खड़ी उस रहस्य में आकरती को देखा
04:24उसकी आखों में एक अजीब सी उदासी थी
04:27और उसका स्वर बहुत धीमा लेकिन भारी था
04:31वो बोली तुम्हें शायद ये नहीं पता
04:34कि तूटे हुए बरतन में भोजन करना केवल एक छोटी गलती नहीं है
04:40विराज की आवाज कांप रही थी
04:42वो बोला तुम कौन हो
04:45आकरती ने धीरे धीरे उत्तर दिया
04:48मैं उस दोश की प्रतीक हूँ
04:50जो तूटे हुए बरतनों में बसता है
04:53विराज का शरीर डर से कांपने लगा
04:56वो बोला
04:56लेकिन बरतन तूट जाने से क्या फर्क पड़ता है
05:00भोजन तो वही रहता है
05:02उस रहस्यमई आकरती ने गहरी आवाज में कहा
05:05फर्क पड़ता है
05:07और बहुत बड़ा फर्क पड़ता है
05:09तूटा हुआ बरतन केवल मिट्टी या धातू का नहीं होता
05:13वो उर्जा के तूटने का प्रतीक होता है
05:16जब मनुष्य ऐसे बरतन में भोजन करता है
05:20तो वो अंजाने में अपने जीवन की सकारात्मक उर्जा को भी कमजोर कर देता है
05:25विराज ये सुनकर स्तब्द रह गया
05:28उसी समय अचानक तेज हवा चली
05:30और वो आकरती धीरे धीरे अंधेरे में विलीन हो गई
05:34आंगन फिर से शांत हो गया
05:37लेकिन उस रात के बाद विराज के जीवन में सब कुछ बदलने लगा
05:41कुछ ही दिनों में उसके व्यापार में लगातार नुकसान होने लगा
05:45घर में छोटी-छोटी बातों पर जगडे होने लगे
05:48विराज को समझ नहीं आ रहा था कि उसके जीवन में अचानक इतना दुर्भाग्य क्यों आने लगा
05:53एक दिन वो बहुत परेशान होकर गाउं के बाहर स्थित पुराने मंदिर में चला गया
05:58वो मंदिर भगवान कृष्ण का था
06:00मंदिर में गहरा सन्ना का था
06:02दीपक की हलकी रोष्णी में भगवान कृष्ण की मूर्ती चमक रही थी
06:06विराज मूर्ती के सामने बैठ गया
06:08उसकी आँखों से आसु बहने लगे
06:10वो बोला
06:11हे प्रभु अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो मुझे मार्ग दिखाईए
06:15उसी समय मंदिर के अंदर एक हलकी सी दिव्य आभा फैलने लगी
06:20और धीरे धीरे भगवान कृष्ण का स्वर गूझने लगा
06:22विराज
06:24विराज ने आखे खोली
06:25उसने देखा मूर्ती से जैसे एक दिव्य प्रकाश निकल रहा था
06:29भगवान कृष्ण बोले
06:30तुम्हे उस दोष का अनुभव हो चुका है
06:33जैसे लोग अकसर छोटी बात समझ कर अंदेखा कर देते हैं
06:36विराज कापती आवाज में बोला
06:38प्रभु क्या सच में तूटे बरतन में भोजन करने से दोश लगता है
06:42भगवान कृष्ण ने शांत स्वर में कहा
06:44हाँ विराज
06:45शास्त्रों में इसे अशुधी और दरिद्रता का संकेत माना गया है
06:49तूटा हुआ बरतन ये दर्शाता है
06:51कि मनुष्य अपने जीवन में विवस्था और सम्मान खो रहा है
06:55जब कोई व्यक्ती ऐसे बरतन में भूजन करता है
06:58तो वो अंजाने में अपने घर की उर्जा को भी असंतुलित कर देता है
07:01विराज ध्यान से सुन रहा था
07:03भगवान कृष्ण आगे बोले
07:05भोजन केवल पेट भारने के लिए नहीं होता
07:08ये एक पवित्र प्रक्रिया है
07:11और जिस भरतन में भोजन किया जाता है
07:13वो भी उस पवित्रता का हिस्सा होता है
07:16इसलिए हमारे रिश्यों ने कहा था
07:18कि तूटे हुए बरतनों को घर में नहीं रखना चाहिए
07:21विराज की आखों में आसु आ गए
07:23वो बोला
07:24प्रभु मुझे अपनी गलती समझ आ गई है
07:27अब से मैं कभी भी तूटे बरतन में भोजन नहीं करूँगा
07:30भगवान कृष्ण मुस्कुराए
07:32उन्होंने कहा
07:33मनुष्य से गलती होना स्वाभाविक है
07:36लेकिन जो अपनी गलती को समझ कर उसे सुधार ले
07:39वही सच्चा बुद्धिमान होता है
07:41उस दिन के बाद विराज ने अपने घर के सभी तूटे हुए बरतन हटा दिये
07:45उसने अपने जीवन में अनुशासन और पवित्रता लाना शुरू किया
07:49धीरे धीरे उसके जीवन की परिशानिया भी कम होने लगी
07:53घर में फिर से शान्ती लोटाई
07:55कथा समाप्त होने पर गरुण जी ने भगवान कृष्ण से कहा
07:59प्रभू अब मैं समझ गया कि हमारी परंपराओं के पीछे कितना गहरा ज्यान चुपा होता है
08:04भगवान कृष्ण मुस्कुराए
08:06उन्होंने कहा
08:07गरुण सनातन धर्म के नियम मनुष्य के जीवन को संतुलित और पवित्र बनाने के लिए बनाए गए है
08:15जो उन्हें समझ कर अपनाता है उसके जीवन में सुख और शान्ती बनी रहती है
08:22मित्रो इस कथा का संदेश बहुत सरल है
08:26तूटे हुए बरतन में भोजन करना केवल एक छोटी आदत नहीं है
08:31ये धीरे धीरे घर की उर्जा और विवस्था को प्रभावित कर सकता है
08:37इसलिए हमारे शास्त्र कहते हैं भोजन हमेशा स्वच्च और पून बरतन में ही करना चाहिए
08:45अगर आपको ये कथा पसंद आई हो तो वीडियो को लाइक जरूर करें
08:50और कॉमेंट में लिखें जै श्री कृष्ण
08:53ताकि भगवान कृष्ण की गृपा आपकी जीवन में बनी रहे
08:57फिर मिलेंगे सनातन धर्म की एक और रहस्यमई कथा के साथ
09:02जै श्री हर्म
Comments

Recommended