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  • 2 days ago
सफलता का राज: 5 आदतें जो आपको करोड़पति बना देंगी - Targeting success and wealth mindset.
Transcript
00:04
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00:52счастья.
01:08Look,
01:09�से पहले ये देखते हैं कि आखिर वो वादा है क्या।
01:13कृष्ञ किस ग्यान की बात कर रहे हैं?
01:16ये कोई साधारन जानकारी नहीं है,
01:19बलकि एक ऐसा सत्य है
01:20जो अपने आप में पूरा है,
01:22अन्तिम है।
01:23और ये ग्यान कितना खास है,
01:25इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा लीजिए
01:27कृष्ण कहते हैं कि हजारों लोगों में से
01:30कोई एक ही होता है
01:31जो इस रास्ते पर चलने की कोशिश भी करता है
01:34और जो कोशिश करते हैं
01:35उनमें से भी कोई-कोई ही
01:37मन्जल तक पहुँच पाता है
01:38मतलब साफ है ये सिर्फ कुछ बाते जान लेना नहीं
01:42बलकि एक बहुत गहरी आध्यात्मिक साधना है
01:44तो आखिर ये ग्यान हमें बताता क्या है
01:47ये हमें सीधे शृष्टी की बुनियाद तक ले जाता है
01:51कृष्ण के मताबिक
01:52ये जो पूरी दुनिया ये पूरा ब्रह्मान्ध हम देख रहे है
01:55ये असल में दो बुनियादी चीजों से मिलकर बना है
01:59और ये दो हिस्से हैं
02:01एक है जड़ प्रकृती यानि material world
02:04इसमें सिर्फ पांच दत्व ही नहीं आते
02:06बलकि हमारा मन, हमारी बुद्धी
02:08और हमारा एहंकार भी इसी में शामिल है
02:10क्यों? क्योंकि ये भी बदलते रहते हैं
02:13ये बस एक औजार है
02:14और दूसरी है चेतन प्रकृती
02:16यानि हम सब के अंदर की आत्मा
02:19जो इस जड़ शरीर और मन को चलाती है
02:21उसे जिन्दा रखती है
02:35और इस बात को समझाने के लिए
02:37कितनी खुबसूरत मिसाल दी गई है
02:39जरा सोचिए
02:40जैसे एक धागा होता है
02:41जो माला के सारे मोतियों को
02:43एक साथ बांद कर रखता है
02:45उन्हें बिखरने नहीं देता
02:46ठीक वैसे ही वो परम चेतना
02:49इस पूरे ब्रह्मान को एक साथ थामे हुए है
02:51हर चीज उसी से जुड़ी है
02:54उसी पर टिकी है
02:55लेकिन अब यहां एक सवाल उठता है
02:58अगर सपुछ उसी एक धागे में पिरोया हुआ है
03:00तो हमें ये सच्चाई साफ साफ दिखाए क्यों नहीं देती
03:03बस यहीं पर एंडरी होती है माया की
03:07एक ऐसा परदा जो हमारी आँखों पर पड़ा है
03:10और ये माया का परदा तीन धागों से बुना गया है
03:13जिनहें गुण कहते हैं
03:15सत्व यानि अच्छाई, शांती और ज्यान का भाव
03:18रज यानि काम करने का जुनून, बेचैनी
03:22और तम यानि आलस, अंधेरा और अज्यान
03:25ये तीनों गुण आते तो उसी परम शक्ती से हैं
03:29पर यहीं मिलकर एक ऐसा भ्रहम पैदा करते हैं
03:31जो हमें असलियत देखने नहीं देता
03:33कृष्ण खुद कहते हैं कि मेरी ये माया बहुत ताकतवर है
03:37इसे अपने दम पर अपनी ताकत से पार करना लगभग नामुम्किन है
03:42तो फिर रास्ता क्या है?
03:45रास्ता है पूरी तरह से शरण में आ जाने का, सरेंडर करने का
03:49जो ऐसा कर लेता है, वो ही इस भ्रह्म के समंदर को पार कर पाता है
03:54तो माया को पार करने का रास्ता है भक्ती, यानि समर्पण
03:58पर अब सवाल ये है कि कौन लोग इस रास्ते पे चलते हैं और कौन नहीं?
04:04चलिए, इसे समझते हैं
04:06गीता के हिसाब से, चार तरह के लोग इस रास्ते से दूर ही रहते हैं
04:09पहले जो बुरे कामों में लगे हैं, दूसरे मूर्ख लोग, तीसरे जिनका ग्यान माया ने ढख लिया है
04:15और चौते वो, जो अपने छोटे मोटे ज्यान के एहंकार में इतने डूबे हैं, कि वो परमसत्य को देखी नहीं
04:20पाते
04:20लेकिन इसके दूसरी तरफ चार तरह के लोग और भी हैं, जो उस परमसत्य की तरफ मुडते हैं
04:27ये चार तरह के भक्त हैं
04:29पहले, दुखी लोग, जो किसी मुश्किल में मदद के लिए पुकारते हैं
04:33दूसरे, जिग्यासू, जिनके मन में सच को जानने की गहरी प्यास है
04:38तीसरे वो, जो दुनिया की कोई चीज, जैसे धन, दौलत पाने के लिए प्रार्तना करते हैं
04:43और चोथे हैं ज्यानी, जो सत्य को जानते हैं और बस उसी में डूबे रहते हैं
04:49और यहां एक बहुत जरूई बात है
04:51कृष्ण कहते हैं कि ये चारों ही मुझे प्यारे हैं
04:54लेकिन इन सब में जो ज्यानी भक्त है, वो सबसे श्रेष्ट है
04:58क्यों? क्योंकि बाकी तीन कुछ न कुछ मांग रहे हैं
05:01लेकिन ज्यानी कुछ मांगता नहीं
05:03वो तो सिर्फ प्रेम और अपनी समझ के कारण जुड़ा है
05:06वो हर पल, हर साज, उसी परम चेतना में रहता है
05:10तो अब हम इस सफर के आखरी पड़ाओ पर पहुँच गए है
05:14वो परम ज्यान आखर है क्या?
05:17कैसी होती है ज्यान की वो सबसे उची अवस्था?
05:21और ये है उस पूरे ज्यान का निचोड़, वो अंतिम सत्य
05:25वासुदेवह सर्वम इती
05:28मतलब ये एहसास हो जाना कि जो कुछ भी है
05:31जो भी हम देख रहे हैं, महसूस कर रहे हैं
05:33वो सबका सब ईश्वरी है
05:35उसकी सिवा और कुछ है ही नहीं
05:37लेकिन ये एहसास, ये समझ कोई एक दिन में नहीं आती
05:41गीता खहती हैं कि कई कई जन्वों की आध्यात्मिक यात्रा
05:45और साधना के बाद कोई इस परम सत्य को दिल से समझ पाता है
05:49और ऐसी आत्मा सच में बहुत दुरलब होती है
05:52और इस ज्ञान को पालेने का आखरी फल क्या मिलता है?
05:56वो ये है कि जो इस परम सत्य को अपने जीवन का हिस्सा बना लेता है
06:01उसकी चेतना इतनी पक्की हो जाती है कि जिन्दगी के सबसे मुश्किल पल में भी
06:06यानि मौत के वक्त भी उसका ध्यान नहीं भटकता
06:09और वो उसी परम चेतना में मिल जाता है
06:12तो आखर में एक सवाल सब के लिए छोड़ जाते हैं
06:16अगर ये सच है, अगर वाकई सबकुछ ईश्वर का ही रूप है
06:20तो क्या इस एक एहसास से हमारे रोज के काम, हमारे रिष्टे
06:25और हमारे जीवन को देखने का पूरा नजरिया ही नहीं बदल जाएगा?
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