Skip to playerSkip to main content
Eating with your hands is more than just a tradition — it’s a cultural experience that connects people with food in a natural and meaningful way. In this video, discover the secret behind hand-eating traditions, proper etiquette, health benefits, and why many cultures believe food tastes better when eaten by hand. Watch till the end to learn fascinating food customs from around the world!

👍 Don’t forget to Like, Share & Subscribe to Apna TV New York for more amazing cultural and food stories.

eating with hands, secret of eating with hands, hand eating tradition, why people eat with hands, traditional food culture, food etiquette, eating by hand benefits, desi food culture, Indian food traditions, Pakistani food traditions, cultural eating habits, food and culture, traditional dining methods, eating food naturally, hand eating techniques, south asian food culture, why food tastes better with hands, authentic food traditions, cultural food practices, eating with fingers, food rituals, hand eating secrets, traditional lifestyle, desi lifestyle, apna tv new york

#EatingWithHands
#FoodCulture
#TraditionalFood
#DesiCulture
#PakistaniFood
#IndianFood
#FoodTraditions
#HandEating
#CulturalTraditions
#ApnaTVNewYork
#StreetFoodCulture
#FoodLovers
#TraditionalLifestyle
#SouthAsianCulture
#DiningTraditions



#EatingWithHands #FoodCulture #TraditionalFood #HandEating #PakistaniFood #IndianFood #DesiCulture #FoodTraditions #CulturalFood #ApnaTVNewYork #StreetFood #Foodie #Lifestyle #SouthAsianFood #TraditionalEating #shortvideo #viral #viralvideo #short #ternding #canada #pakistan #usa #uk #india #apnatvnewyork

Category

😹
Fun
Transcript
00:00ज़रा तसवर करें, क्या हो अगर ये साबित हो जाए कि चम्मच और कांटों को छोड़ कर रिवायती अंदाज में
00:06अपने हाथों से खाना दरसल हमारे जिस्म के लिए ज्यादा फाइदा मंद है।
00:10आए इस मालुमाती निशिस्त में देखते हैं कि जदीद मेडिकल साइंस उन पुराने तरीकों की किस तरह मुकमल तौसी कर
00:17रही है जिने हम शायद फरसूदा समझ कर पीछे छोड़ चुके हैं।
00:21इस तरिजिये में हम छे एहम हिस्सों पर बात करेंगे।
00:24पहले रिवायत की तरफ वापसी, फिर सिफालिक फेस का आगाज, उसके बाद माइक्रो बायो मनी वर्क आउट, फिर जहनसाजी यानि
00:31माइंडफुलनेस, बैठने का अंदाज और सकाफ्ती हिकमत और आखिर में इसके फवाइद और नुकसानात।
00:38तो शुरू करते हैं हिस्सा एक, रिवायत की तरफ वापसी और जदीद दुनिया में कदीम जड़ें।
01:08पर्टामिया की कदीम तहजीवों से लेकर मुक्तलिफ मकामी बाशिंदों तक इनसानों ने हमेशा ये समझा है कि खाने को ब्रहे
01:14रास चुने से उसका लुट्फ और बढ़ जाता है। ये बस कोई पुरानी आदत नहीं थी, बलके खुराक के साथ
01:19जड़ने का एक बिलकुल
01:20फितरी तरीका था। और इस बात की तजदीक अब जदीद साइंस भी कर रही है। बरतानिया के नैशनल हेल्थ सर्विस
01:27के सरजन डॉक्टर किरन राजन के इस बात पर गोर करें। वो कहते हैं हमारे हाथ कुदरत का थर्मामीटर हैं
01:34और ये बन्यादी तोर पर हाजमे के ज�
01:37ये इस बात का वाज़ सुबूत है कि मेडिकल प्रोफेशनल्स अब बाकाइदा तोर पर इन रवायात की साइंसी बन्यादों को
01:43तसलीम कर रही हैं। आईए अब बढ़ते हैं हिस्सा दो की जानिब सिफालिक फेज का आगाज और चूने की हायातियात।
02:07आखों की तादाद में टेक्टाइल सेंसर्स होते हैं तो जब बेजान चम्मच के बजाये खाने को हाथ से चुआ जाता
02:13है तो ये सेंसर्स फोरन दिमाग को सिगनल भेचते हैं कि भाई मैदे को हाजमे के लिए तेयार करो। ये
02:19पूरा अमल सच में बहुत दिल्चस्प है।
02:33और नतीजातन मेदा खुराग को हजम करने के लिए बिल्कुल तयार हो जाता है। मतलब खुराग पेट में जाने से
02:40पहले ही बौडी फुल तयारी कर लिती है।
03:03इससे पता चलता है कि हमारी रिवायात में कितनी गहरी हिकमत छपी थी। चलिए अब चलते हैं हिस्सा तीन की
03:09तरफ एक माइक्रोबायोम मिनी वर्काउट जिसमें हम मुदाफियती निजाम की ट्रेनिंग पर बात करेंगे।
03:33सिखाते हैं कि नुकसान दे जरासीम और सहतमंद बैक्टीरिया के दर्मियान फर्क कैसे करना है।
03:38इस माइक्रोबायोम ट्रैंसफर के बेशुमार फायदे हैं।
03:41उंग्लियों से आने वाले सिहतमंद फ्लोरा और इंजाइम्स हमारे हाजमे को बहतर बनाते हैं।
03:47ये आंतों के माइक्रोबायोटा में तनवो लाते हैं।
03:50इससे हमारा इम्यून डिफेंस मस्बूत होता है।
03:52और सबसे बड़ी बात, आंतों और दिमाग के दर्मियान जो कनेक्शन है, उसकी वज़ा से ये अमल हमारी जहनी सिहत
03:59पर भी बहुत मुस्बत असरात मुरतब करता है।
04:01हिस्सा चार, जहनसाजी और शिकमसेरी यानि खाने की नफसियात क्या है?
04:06अब ज़रा फर्क देखिए, जब कटलरी इस्तेमाल होती है, तो खाना खाने का अमल बहुत तेज और थोड़ा मेकैनिकल सा
04:13हो जाता है।
04:38और शिर्फ यही नहीं, नफसियाती रिसर्च एक और जबरदस बात बताती है।
05:08अगर कदीम वेदिक रिवायत को देखा जाए, तो वहाँ इनसान के हाथ की हर उंगली काइनात के किसी ना किसी
05:14ऑंसर की नुमाइंद की करती है।
05:16अंगूठा आग यानि हाजमी की अलामत है, शादत की उंगली, हवा यानि खून की गर्दिश की, दर्म्यानी उंगली खला या
05:23तवाजन की, अंगूठी वाली उंगली जमीन की और छोटी उंगली पानी या सेयाल के तवाजन की।
05:29कहा जाता है कि जब खाना खाते वक्त ये तमाम उंगलियां आपस में मिलती हैं, तो ये खुदरती तोर पर
05:34एक शिफा बख्ष कैफियत पैदा करती हैं।
05:36और इसी तरहां, जब हम इसलामी सुन्नत के तरीकों पर गौर करते हैं, तो वो आज की modern medical advice
05:43से बिलकुल match करते हैं।
05:59पर मेदे के तीन हिस्से करने का उसूल, एक हिस्सा खुराक, एक हिस्सा पानी और एक हिस्सा हवा के लिए
06:04खाली छोड़ना।
06:05आज की science बताती है कि ये तरीका तेजाबियत और मुटापे से बचने का एक बहतरीन राज है।
06:10हैरत की बात ये है कि अब मगरिबी तहकीक भी जमीन पर बैटने के इन तरीकों की मुकमल हिमायत कर
06:16रही है।
06:16The European Journal of Preventive Cardiology की एक रिसर्च के मुताबिक फर्ष पर बैटकर खाने से जोडों की लचक बहतर
06:23होती है, दिल की तरफ खून की गर्दिश बढ़ती है और यहां तक के उन लोगों के मुकाबले में आसत
06:29उम्र भी लंबी होती है जो कुर्सियों और मेजों पर बैटकर खाते हैं�
06:32अब हम अपने आखरी हिस्से पर हैं, हिस्सा 6, फवायद, नुकसानात और हिवजाने सहत, यानि कुछ अमली हिदायात।
07:02और अगर हाथों पर लोशन या सेनिटाइजर लगा हो, तो वो ना सिर्फ खाने का जाइका खराब कर देगा, बलकि
07:08सहत के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
07:10तो यहां सबसे बुनियादी उसूल क्या है? वो यह है कि हिवजाने सहत पर कोई समझाओता नहीं किया जा सकता।
07:32मेडिकल साइंस की तस्दीक के बाद एक सवाल तो पैदा होता है, क्या अगली बार खाना खाते वक्त चमच और
07:39कांटा दराज में ही बंद रहेंगे? कटलरी के इस्तमाल पर दुबारा गौर करना और इस कुदरती और अदीम अंदास को
07:46अपनाना हमारे मैदे, दिमाग और म
08:02कर दो
Comments

Recommended