00:00ज़रा तसवर करें, क्या हो अगर ये साबित हो जाए कि चम्मच और कांटों को छोड़ कर रिवायती अंदाज में
00:06अपने हाथों से खाना दरसल हमारे जिस्म के लिए ज्यादा फाइदा मंद है।
00:10आए इस मालुमाती निशिस्त में देखते हैं कि जदीद मेडिकल साइंस उन पुराने तरीकों की किस तरह मुकमल तौसी कर
00:17रही है जिने हम शायद फरसूदा समझ कर पीछे छोड़ चुके हैं।
00:21इस तरिजिये में हम छे एहम हिस्सों पर बात करेंगे।
00:24पहले रिवायत की तरफ वापसी, फिर सिफालिक फेस का आगाज, उसके बाद माइक्रो बायो मनी वर्क आउट, फिर जहनसाजी यानि
00:31माइंडफुलनेस, बैठने का अंदाज और सकाफ्ती हिकमत और आखिर में इसके फवाइद और नुकसानात।
00:38तो शुरू करते हैं हिस्सा एक, रिवायत की तरफ वापसी और जदीद दुनिया में कदीम जड़ें।
01:08पर्टामिया की कदीम तहजीवों से लेकर मुक्तलिफ मकामी बाशिंदों तक इनसानों ने हमेशा ये समझा है कि खाने को ब्रहे
01:14रास चुने से उसका लुट्फ और बढ़ जाता है। ये बस कोई पुरानी आदत नहीं थी, बलके खुराक के साथ
01:19जड़ने का एक बिलकुल
01:20फितरी तरीका था। और इस बात की तजदीक अब जदीद साइंस भी कर रही है। बरतानिया के नैशनल हेल्थ सर्विस
01:27के सरजन डॉक्टर किरन राजन के इस बात पर गोर करें। वो कहते हैं हमारे हाथ कुदरत का थर्मामीटर हैं
01:34और ये बन्यादी तोर पर हाजमे के ज�
01:37ये इस बात का वाज़ सुबूत है कि मेडिकल प्रोफेशनल्स अब बाकाइदा तोर पर इन रवायात की साइंसी बन्यादों को
01:43तसलीम कर रही हैं। आईए अब बढ़ते हैं हिस्सा दो की जानिब सिफालिक फेज का आगाज और चूने की हायातियात।
02:07आखों की तादाद में टेक्टाइल सेंसर्स होते हैं तो जब बेजान चम्मच के बजाये खाने को हाथ से चुआ जाता
02:13है तो ये सेंसर्स फोरन दिमाग को सिगनल भेचते हैं कि भाई मैदे को हाजमे के लिए तेयार करो। ये
02:19पूरा अमल सच में बहुत दिल्चस्प है।
02:33और नतीजातन मेदा खुराग को हजम करने के लिए बिल्कुल तयार हो जाता है। मतलब खुराग पेट में जाने से
02:40पहले ही बौडी फुल तयारी कर लिती है।
03:03इससे पता चलता है कि हमारी रिवायात में कितनी गहरी हिकमत छपी थी। चलिए अब चलते हैं हिस्सा तीन की
03:09तरफ एक माइक्रोबायोम मिनी वर्काउट जिसमें हम मुदाफियती निजाम की ट्रेनिंग पर बात करेंगे।
03:33सिखाते हैं कि नुकसान दे जरासीम और सहतमंद बैक्टीरिया के दर्मियान फर्क कैसे करना है।
03:38इस माइक्रोबायोम ट्रैंसफर के बेशुमार फायदे हैं।
03:41उंग्लियों से आने वाले सिहतमंद फ्लोरा और इंजाइम्स हमारे हाजमे को बहतर बनाते हैं।
03:47ये आंतों के माइक्रोबायोटा में तनवो लाते हैं।
03:50इससे हमारा इम्यून डिफेंस मस्बूत होता है।
03:52और सबसे बड़ी बात, आंतों और दिमाग के दर्मियान जो कनेक्शन है, उसकी वज़ा से ये अमल हमारी जहनी सिहत
03:59पर भी बहुत मुस्बत असरात मुरतब करता है।
04:01हिस्सा चार, जहनसाजी और शिकमसेरी यानि खाने की नफसियात क्या है?
04:06अब ज़रा फर्क देखिए, जब कटलरी इस्तेमाल होती है, तो खाना खाने का अमल बहुत तेज और थोड़ा मेकैनिकल सा
04:13हो जाता है।
04:38और शिर्फ यही नहीं, नफसियाती रिसर्च एक और जबरदस बात बताती है।
05:08अगर कदीम वेदिक रिवायत को देखा जाए, तो वहाँ इनसान के हाथ की हर उंगली काइनात के किसी ना किसी
05:14ऑंसर की नुमाइंद की करती है।
05:16अंगूठा आग यानि हाजमी की अलामत है, शादत की उंगली, हवा यानि खून की गर्दिश की, दर्म्यानी उंगली खला या
05:23तवाजन की, अंगूठी वाली उंगली जमीन की और छोटी उंगली पानी या सेयाल के तवाजन की।
05:29कहा जाता है कि जब खाना खाते वक्त ये तमाम उंगलियां आपस में मिलती हैं, तो ये खुदरती तोर पर
05:34एक शिफा बख्ष कैफियत पैदा करती हैं।
05:36और इसी तरहां, जब हम इसलामी सुन्नत के तरीकों पर गौर करते हैं, तो वो आज की modern medical advice
05:43से बिलकुल match करते हैं।
05:59पर मेदे के तीन हिस्से करने का उसूल, एक हिस्सा खुराक, एक हिस्सा पानी और एक हिस्सा हवा के लिए
06:04खाली छोड़ना।
06:05आज की science बताती है कि ये तरीका तेजाबियत और मुटापे से बचने का एक बहतरीन राज है।
06:10हैरत की बात ये है कि अब मगरिबी तहकीक भी जमीन पर बैटने के इन तरीकों की मुकमल हिमायत कर
06:16रही है।
06:16The European Journal of Preventive Cardiology की एक रिसर्च के मुताबिक फर्ष पर बैटकर खाने से जोडों की लचक बहतर
06:23होती है, दिल की तरफ खून की गर्दिश बढ़ती है और यहां तक के उन लोगों के मुकाबले में आसत
06:29उम्र भी लंबी होती है जो कुर्सियों और मेजों पर बैटकर खाते हैं�
06:32अब हम अपने आखरी हिस्से पर हैं, हिस्सा 6, फवायद, नुकसानात और हिवजाने सहत, यानि कुछ अमली हिदायात।
07:02और अगर हाथों पर लोशन या सेनिटाइजर लगा हो, तो वो ना सिर्फ खाने का जाइका खराब कर देगा, बलकि
07:08सहत के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
07:10तो यहां सबसे बुनियादी उसूल क्या है? वो यह है कि हिवजाने सहत पर कोई समझाओता नहीं किया जा सकता।
07:32मेडिकल साइंस की तस्दीक के बाद एक सवाल तो पैदा होता है, क्या अगली बार खाना खाते वक्त चमच और
07:39कांटा दराज में ही बंद रहेंगे? कटलरी के इस्तमाल पर दुबारा गौर करना और इस कुदरती और अदीम अंदास को
07:46अपनाना हमारे मैदे, दिमाग और म
08:02कर दो
Comments