00:06मेरा बेटा है चार साल का मेरी वाइफ में से
00:09इनकी तरफ से स्टाफ कोई नी था कि जो इस जैकेट दे या कोई दे
00:11मैंने खुद लाइफ जैकेट लोगों के हाथों में दिये इसे पहनो इसे पहनो
00:25नर्मदा का शान तांचल अचानक चीतकारों से भर गया
00:29और खुशियों की एक लहर देखते देखते मातम के गहरे समंदर में टूप गई
00:34जवलपुर के बर्गी बांध का वो मंजर याद कर आज भी रूखांप उपती है
00:38जहां खुदरत के छोटे से आंधी तूफान ने इंसानी लापरवाही के साथ मिलकर
00:43कई हसते खेलते परिवारों को हमीशा किलके खामूश कर दिया
00:48कल्पना कीजे उस शाम की जब डूपते सूरज की लालिमा के बीच परेटक एक क्रूस पर सवार होकर
00:54ठंडी हवाओं का आनंद ले रहे थे बच्चों की हसी भूँच रही थे और कोई नहीं जानता था
01:00कि चंद मेंटों बार मौत अपना जाल पिछाने वाली है
01:03ये कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं बलकियो नाखिरी पलूँकी है
01:06जहां ममता ने मौत से चंग लड़ी और जहां उमीद की एक-एक बूंद पानी में समाती गई
01:13जैसे ही इस भायवा हादसे के विडियो और तस्वीरों को आप देखते हैं कलेचा मुख को आता है
01:19जवलपुर की वो तस्वीर जो की पत्थर दिल इनसान को मिरूला दे जुसमें एक माने अपने चार साल की बेटे
01:26को अपनी चाती से चिपका रखा है
01:28उसमाने आखरी वक्त तक हार नहीं मानी होगी
01:31उसने अपने बच्चे को अपनी ही लाइफ जैकेट की भीतर समेट लिया था ताकि शायद उसका कलेचा पानी की गहराई
01:38से बच जाए
01:39लेकिन खुदरत और सिस्टम की बेरहमी देखिए जब रेस्यू टीम ने उन्हें बाहर निकाला तो दूम मापेटे उसी आलिंगन में
01:47मृत पाए गए
01:48यह दर्शो देखकर वहां मौजू सेना के जवान मीडिया कर्मी और खुद मंतरी राकेश सिंगम अपने आखों के आँसू नहीं
01:56रोप पाए
01:57मा की मम्ता की यह अंतिम पोशुश महां खड़े हर शक्स के सीनी को चलनी कर गई
02:02रस्तरदनाख हादसी की गहराई उन लोगों की जुवानी सुनकर और भी डरावनी लगती है जो मौत के मूसे वापस लौटे
02:10है
02:10उनके परिचन क्या कुछ बता रहे हैं
02:2222 साल के सेद रियाज हुसेन की आप पीती किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं है
02:27उन्होंने अपनी आखों के सामने अपनी मा को डूपते देखा
02:30वो खुद तीम घंटे तक क्रूस के कूने में गर्दन तक पानी में डूपे रहे
02:35जहां सांस लेने के लिए सिर्फ एक छूटा सा हिस्सा बचा था
02:39अंधेरे और मौत की शांती के बीच वो तीम घंटे तक अपनों को खुणे के गम और खुद के खत्म
02:45होने के डर से लड़ते रहे
02:47जब अचावदल ने गैस कड़सी कुरूस की छट काटी तब जाकर उन्हें कहीं बाहर निकाला गया
02:53रियाज हुसैन वो चहरा जिसमें खुणे का गम और बचने की हैरानी एक साथ है
02:59इस हाथ से की भयावता का सबसे बड़ा गभा सबसे बड़ा चश्मदीत और आप कह सकते हैं बदकिस्मत बेटा जो
03:08शायद बच्ट हो गया लेकिन दर्द लिकर जीवत बचेगा
03:12इस पूरी घटना में जो सबसे बड़े सवाल हैं वे सवाल हैं शाशन और प्रशाशन की नीद उड़ाने वाले
03:19क्या परियटकों की सुरक्षा सर्फ कागजों पर थी
03:22हाथ सेंबचे प्रदीप कुमार और विकास जैसे प्रत्यक्ष दर्शों ने जो बताया उठ जगजोर देने वाला है
03:28उनका कहना है कि क्रूज पर लाइफ जैकेट इधर उधर बिखरे पड़े थे और किसी भी करमचारी ने ये सुनिश्रिक
03:34नहीं किया
03:34कि पर्यटकों ने ये पहना या नहीं
03:37जब तूफान आया और नाव डगमगाने लगी तब लोग खुद ही भाग कर जैकेट ढूडने लगे
03:43कुछ लोग तो कैबिन के भीतर ही फस गए क्योंकि कांच के दर्वाजों और अफ्रात अफ्री ने उन्हें बाहर निकलने
03:48का रास्ता ही नहीं दिया
03:5029 व्यसकों के टिकट तो थे लेकिन उन मासूम बच्चों को क्या जिनका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है
03:57जवलपूर कलेक्टर और NDRF की टीमें अभी भी लापता लुगों की तलाश में चुटी है
04:01लेकिन नौ जिनकियां अब कभी लौट कर नहीं आएगी
04:04मंदेपर दिल सरकार ने मुआफ़जे का एलान कर दिया
04:08और सभी क्रूज के सिंचालन पर रोख लगा कर जहांच की भी आदेश दिये
04:12लेकिन क्या ये मुआफ़जा उस मा की ममता और उस मासूम की जिन्दगी की भरपाई कर पाएगा
04:18ये हाथसा हमें चेतावनी लेता है
04:20हमें समझाता है हमें बार बार चीख चीख कर
04:24ये सोचने पर मजबूर करता है कि परिटन के नाम पर सुरखषा से खिलवाड कितना महगा बढ़ सकता है
04:30सिर्फ प्रिशाशन की गलती नहीं गलती यहां हमारी भी है
04:34गलती है हमारी खुद की सुरक्षा से खिलवार करना, लाइफ जैकेट्स को इगनोर करना, अधिकतर हमने देखा है, आपने भी
04:42देखा होगा कि इस तरह ऐसे जब लोग क्रूस के सवारी करते हैं, तो लगातार वे बिना लाइफ जैकेट पहने,
04:49फोटोस क्लिक करवाते हैं, व
05:04कोई भी उस जैकेट के साथ इस तरह की यातरा करता है, तो उसकी सुरक्षा बहुत बहतर होती है, और
05:11जीवन आप कहा सकते हैं, उसका बाकियों के मुकाबले अधिक सुरक्षित रहता है, आज जब वे इन तस्वीरों को देखते
05:19हैं, तब रेस्यू की टी में एक एक कर शव
05:34नर्मदा की लहरे अब शांत हो सकती हैं, लेकिन उन परिवारों के दिलों में उठात तूफान, कभी शांत नहीं होगा,
05:40जिन्होंने इस क्रूज हादसे में अपना सब कुछ खो दिया, किसी ने मा, किसी ने अपना बच्चा, और किसी ने
05:47अपनी पतनी पूरा जहां खो दि
06:02आरो प्रत्या रोप है, बयान बाजियां हैं, जाहिर तोर पर, क्योंकि जब कमर्शल के सिलंडर पर लगभग एक हजार रुपए,
06:09993 रुपए बढ़ा दिये जाए, तो आपकी प्लेट महंगी होने वाली है, जाएकी कीमत बढ़ जाएगी, और शायद आपको अब
06:17चार बा
06:18पड़ेगा बाहर का खाना खाने के लिए, पहराल मामले को जानने के लिए, जमीनी हकीकत से रूबर उने के लिए
06:25हमारे संबाता था, शिविंद कॉर्ड फील्ट मौजूद थे, उन्होंने लोगों से बात की, धाबे रेस्टरंट में जाकर उनका दर्द सुना,
06:32क्या कुछ
07:01पता रहे हैं वो लोग, शिविंद जी ने क्या महसूस किया?
07:03मैं आपको दिखा दूँगा, मैं यह नई दिल्ली पे हूँ, जहां पर गारी में जड़ा सा धुआ निकलने के लिए
07:07आपको चालान हो जाएगा, और मैं दिखानों पर खड़ा हूँ, यह देखिए, यह लोग कोईले से काम कर रहे हैं,
07:14कोईले से, यह है कोईला, यह भट्�
07:29साथ जाब रुते हैं, कि मसीन इस दुकांदार ने उठाई होगी, लेकिन यह देकार है, इसे खुद भी दुआ लग
07:34रहा है, और यहां पर गिराग भी, और इसे क्यों करना पड़ा, यह जानता है कि इनको, यह स्ट्रेंडर पाचिजार
07:40कर लाएंगे, स्ट्रेंडर ठाली �
07:41इंडियन का यह रखा हुआ, दिखाएंगे, दिखाएंगे, स्रेंडर भी है, यह सपेदाती बना हुआ है, और इसकी बज़ाएं से बात
07:48यह है, कि इनके नहीं कर पा रहा है, जाओ छोड़ जाओ, देश में बिरोजगारी की हाल मैंने भी एक
07:57मकान मालिक से बात की, उन्हें
07:58इनके नहीं कर पा रहा है, छोड़ जाओ, देश में बिरोजगारी की हाला ऐसी है, यह चोड़ेंगे, चार लायन में
08:03लगेंगे, नीचे भाई, कहने करते हैं, इनको में करना है, और यह उसको मेंटेन करने के लिए, कोई लगा जाओ,
08:13पूर दिल्ली में की बात भी करते हैं
08:17और अभी इनके उपर चालान का डंडा भी लटका हुआ है, यह भी आप समझेए, वो भी होता रहा है
08:23भी बीचों इनका, आखिरें दुकांदार क्या करें, इनसे कोई बिधाया, कोई स्थानी ब्यक्ति, कोई पारसर, कोई ब्यक्ति पूछ नहीं आया,
08:29कि तुमारी दोगने
08:31कैसे चल रही है, यह है, असलियत यह है, उपर से कागज में आपने इस स्लेंडर को कह दिया, अभी
08:38में एक एजनसी पे गया, उसने दिखाए नहीं हमारे सेंडर, अभी गाड़ी आई है, वो क्यों बोलेगा, लेकिन असलियत यह
08:45है, कि अंदा तो जब माने गाउं में कहा ब
08:59आज करी मिली, बापिस आप कोले पर आगा है, यह गाउं में आप तस्मीरे देखते हों कभी, लेकिन आपको दिल्ली
09:04की राजधानी में तस्मीरे देखते हों कर मिलना ही मुकों में, तो यह थी आज देश-दुनिया की वो बड़ी
09:08खबरी, वो तमाम अपडीट से जित का च
09:26अठीडिया कुंग तांप चरेखते हों करऊ़ आज दूब आण में आटा है, वो यह खिया है कुल आपको फुल में
09:32आपको कैंबादेशने की यह बट्रवितोों क का चाह तांड आ़ झाय को धॉचिकों सन्तुकर एड़।
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