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  • 6 hours ago
कुछ महीने पहले तक चलन से तकरीबन बाहर हो चुके मिट्टी के चूल्हों और अंगीठियों की मांग इन दिनों काफी बढ़ गई है. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के बाजारों में पारंपरिक चूल्हे फिर से नजर आने लगे हैं. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण रसोई गैस की आपूर्ति में कमी की वजह से इन चूल्हों की मांग फिर से होने लगी है. दुकानदारों का कहना है कि यह रुझान सभी बाजारों में दिखाई दे रहा है और कोयले की बिक्री में भी तेज़ी आई है.एक तरफ रसोई में बीते दौर के चूल्हों के बीच सरकार का दावा है कि उसने पाइपलाइन से आने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी है. खास तौर पर घरों और आवश्यक सेवाओं के साथ साथ रिफाइनरी में उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके अलावा एलपीजी रिफिल अंतराल को बढ़ाकर मांग का भी प्रबंधन करने की कोशिश की है.

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00:08ुटर्प्रदेश के प्रयागराज के बाजारों में पारंपरिक चूले फिर से नजर आने लगे है
00:13पश्टे मेश्या में चल रही संघर्ष के कारण रसोई गैस की आपूर्ती में कमी की वजह से इन चूलों की
00:19मांग फिर से होने लगी है
00:20दुकानदारों का कहना है यह रुजहान सभी बाजारों में दिखाई दे रहा है और कोईली की विक्री में भी तेजी
00:27आई है
00:43कई परिवार चूले एहतियातन खरीद रहे हैं
00:46उनका साफ कहना है कि अगर मुश्किल वक्त में हम पारंपरिक दौर में लौट जाए तो इसमें दिक्कत क्या है
01:13एक तरफ रसोई में बीते दौर के चूलों के बीच सरकार का दावा है
01:17कि उसने पाइपलाइन से आने वाली प्राकरति गैस की आपूर्ती को प्राथ मिक्ता दी है
01:22खास्तोर पर घरों और आवश्क सेवाओं के साथ साथ रिफाइनरी में उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है
01:28इसके अलावे लपीजी रिफिल अंतराल को बढ़ा कर बान का भी प्रबंधन करने की कोशिश की है
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