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22 अप्रैल 2025… पहलगाम की वो काली सुबह, जब आतंक ने 26 बेगुनाह जिंदगियां छीन लीं। उसी दिन नागबल गांव का एक बेटा—आदिल हुसैन शाह—सैकड़ों सैलानियों को बचाते हुए खुद शहीद हो गया। एक साल बाद भी उसके घर का दरवाज़ा वैसा ही है… जहां इंतज़ार अब भी जिंदा है। पत्नी गुलनाज़ की आंखों में सवाल है… पिता के दिल में दर्द और गर्व दोनों… और भाई नौशाद हर दिन उसी रास्ते से गुजरता है, जहां से आदिल आखिरी बार गया था। यह सिर्फ एक कहानी नहीं… इंसानियत की मिसाल है। OneIndia की यह खास रिपोर्ट आदिल और पहलगाम के सभी शहीदों को श्रद्धांजलि है।

April 22, 2025… That dark morning in Pahalgam, when terror claimed 26 innocent lives. On that very day, a son of Nagbal village—Adil Hussain Shah—laid down his life while saving hundreds of tourists. Even a year later, the door to his home remains unchanged… a threshold where waiting still lives on. There are questions in the eyes of his wife, Gulnaz… his father’s heart holds a mix of both pain and pride… and his brother, Naushad, walks every day along the very path Adil took for the last time. This is not merely a story… it is a testament to humanity. This special report by OneIndia serves as a tribute to Adil and all the martyrs of Pahalgam.

#PahalgamAttack #शहीदआदिल #KashmirNews

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Transcript
00:02यह हमला सिरफ निहट्थे परियटकों पर नहीं हुआ है देश के दुस्मनों ने
00:09आतंकियों को चुनवती देने वला नोजवान आदिल वहां महनत मज्जुरी करने गया था
00:17आतंकियों ने उस आदिल को भी मार दिया
00:29कुछ तारिके सिर्फ कलेंडर पर नहीं होती वो दिनों पर लिखी होती है
00:3422 अपरेल 2025 पहलगाम वो तारिक जब एक वादी की खामोशी को आतंक ने चीर दिया था
00:41आज से ठीक एक साल पहले पहलगाम की वादिया खून से रंग गई थी
00:46आतंकियों ने 26 बेगुना जिन्दगिया चीन ली 26 कर बरबाद हो गए
00:5226 कहानिया इस आतंक की गवाँ बनी और उन्हीं में से एक कहानी है आदिल हुसैन शाह की
01:11आदिल हुसैन एक पती एक बेटा एक भाई जिसने अपनी जान देकर सैकडो सैलानियों को बचाया
01:18आज हम उस गाउं में हैं जहां आदिल का घर है नागवली जहां नदी आज भी बहती है बच्चे अभी
01:28भी यहां खेलते हैं लेकिन एक दर्वाजे पर वक्त मानो थम सा गया हो ठहर सा गया हो
01:35यहां पर रुकी हुई हर निगा एकी सवाल पूछती है कि आदिल कहा है
01:52लंगाई पहार की तरहटी में बसा नागवल गाउं देखने में एकदम सामाने लगता है
01:56खेत खलिहान, उचे पहार, पग्डंडियों पर खेलते बच्चे, लहलाहते खेत, सब कुछ एकदम ठीक
02:03लेकिन इसी गाउं में एक घर ऐसा भी है, जहां वक्त ने ऐसी चोट दी है कि यहां पर 22
02:09अपरेल 2025 के बाद कोई खुशी नहीं आई
02:12आदिल हुसेन के घर पर उनकी बीबी गुलनास का दर्द आज भी उतना ही ताजा है, इतना एक साल पहले
02:18था
02:1922 अपरेल की सुबा तक पहलगाम का ये हापत नाड गाउं शायद कुछी लोग जानते थे, लेकिन 22 अपरेल की
02:27दोपैर होते होते हर किसी की जुबान पर हापत नाड का नाम था
02:31ये गाउं राश्ट्रिय और अंतर राश्ट्रिय सुर्खियों में आ गया क्योंकि यहां के एक नवजवान जिसका नाम आदिल एहमद शाह
02:40था और जो एक पोनी वाला था, देश और विदेश से आने वाले सैलानियों को पहलगाम की खूबसूरत वादिया दिखाता
02:47था, उ
03:00जो नरे अक्षरों से लिखा जाएगा और उसे उसकी वीरता के लिए याद किया जाएगा, आदिल इस घर के कलोते
03:07कमाने वाले थे, जो हर सुबा पहलगाम जाते थे, ताकि उनके घर का चूला जल सके, और उस रोज भी
03:14वो अपनी पतनी गुलनास के हाथ की बनाई चाय पी
03:40आदिल काम पर जाने के बाद रोज दो तीन बार अपनी पतनी गुलनास को फोन करते थे, पूछते थे तुम
03:46ठीक हो, वो रोजमर्रा की बाते जो उस वक्त शायद बहुत मामूरी रगती थी, लेकिन आज गुलनास को उनकी सबसे
03:53बड़ी कमी महसूस होती है, गुलनास बता
03:55कि जब आदिल की खबर मिली तो मुझे महसूस हुआ कि आदिल नहीं रहे, उसके बाद क्या हुआ, क्या नहीं
04:02हुआ, मुझे कुछ नहीं पता, बस इतना पता है कि वो हमेशा हमेशा के लिए चले गए
04:35जिस सुबह ये हादसा हुआ, जिस सुबह ये हादसा हुआ,
04:37उस सुबह आदिल के साथ उनके छोटे भाई नौशाद हुसेन भी पहलगाम निकले थे, अपनी टैक्सी लेकर दोनों भाईयों की
04:43यही जिंदगी थी, नौशाद सैलानियों को गारी मिलाते ले जाते थे, आदिल घोले पर बैठा कर उन्हें वादिया दिखा दे
04:50थे, लेक
05:07इसने 22 अपरिल की सुबह को आतंक वादियों से लड़कर कई एक जाने बचा दी, हमारे सथ इस मामले पर
05:15बात करने के लिए है, आदिल के बाई नौशाद, और हम जाना चाहेंगे नौशाद से, कि उस दिन सुबह से
05:23लेकर शाम तक, आपकी जिंदगी कैसे बदल गई हमेश
05:36जाते हैं, तो उस दिन का भी यह है, मैं घर से निकल गए चुका था तो वह भी मेरे
05:41बाद निकले ते घर से, तो सिस्टर ने बोला था कि आज मत जाओ घर से, तो चंदरमाडी के आदे
05:46रस्ते में में पहुंचा तो एक कजन ने कॉल करके बोला कि पहल गाम में ऐसे ऐसे वा
06:06जो है नाम था फिर हमें पता चला आदिल से आखरी बात और आखरी मुलाकात आपकी कब हुई, क्या बात
06:13चीत हुई आप दो बाईयों के बीच में? तो उस टाइम मैंने उनको बोला था कि पहल गाम आना है,
06:18बोला कि हाँ मैं आऊँगा, आप चलो मैं आ रहा हूँ, बस वह
06:20हमारी लास्ट बात हुई थी, नौशाद आपने एक बाई खोया या एक अच्छा दोस्त, आपका जवाब क्या होगा? एक अच्छे
06:28दोस्त भी थे और बाईय का हिसाब देखें तो बाईय भी बहुत अच्छे थे और दोस्त भी अच्छे थे, आज
06:35आपको इस बात का फकर ह
06:36आप उस अदिल के बाई हो जिसने अपनी जान दे दी और कई लोगों की जाने बचा दी है। यही
06:45चीज़ से तो हम जिंदा है, यही चीज़ से हमारे माम, मेरे बाब, माम बाब जो है, उनकी अपने देखी,
06:50खासकर मेरे माँ, उनकी कंडीशन जो है, मतलब बहुत खराब है
06:54लेकिन वो यही सोच के दिन दिन उनका निकल रहा है
06:58मैं आज कल भी एक साल होने को आया
07:00मैं उनको आज भी यही बोलता हूँ
07:01कि आप यह सोचो आदिल सब ने काम जो किया है
07:04वो सोचो
07:05आदिल आपके पास नहीं है
07:07लेकिन यह सोचो की वो करके क्या गया है
07:14अदिल के घर में एक और दर्द है
07:20उनके बूरे अब्बू का
07:22सेयद हैदर शाह जिनकी दवाईयां लेने के लिए
07:24आदिल उस रोज पहल गाम गए थे
07:26आज उसी बेटे के बिना वो अपनी जिन्दकी गुजार रहे है
07:29आदिल के पिता कहते हैं कि वो मेरे दिल का टुकड़ा था
07:33मेरा दिल टूट गया है लेकिन फक्र है उसने 26 जाने को बचाया
07:38यह गम तो है कि जिगर का टुकड़ा है वो जिगर से टूट गया है
07:43लेकिन फक्र इस बात का है कि उसने 26 जाने जो वहाँ पे चली गई
07:49अगर आदिल आपने जजबात आपना ये इनसानियत वहां पर ना दिखाता तो कहीं और हजारों लाशें भी वहां पर हो
07:59जाती लेकिन आदिल पर ये फकर है कि उसने बहुत सारे लोग वहां हजारों लोग थे जो टूरिश्ट के थे
08:06बहुत सारे लोग मजदूर भी वहां पर
08:09जिनकी जानने उसने बचाई और अपनी जान को अपने ताव पे लगा के उनकी जानों को बचाया तो इस पे
08:17बहुत भकर होता है
08:18एक साल बाद नौशाद अभी भी पहलगाम जाते हैं वही रास्ते वही वादियान लेकिन अब आदिल साथ नहीं है
08:26नौसाद कहते हैं कि पहलगाम की लोग पूरी तरह सैलानियों पर निर्भर हैं
08:30इस हाथसे के बाद परेटन पूरी तरह ठप हो गया
08:33सैलानी नहीं आये, पूरे साल लोगों ने बहुत तकलीफ जेली है
08:37बहुत मुश्किलें जेली है
08:39बहुत ही जो है मतलब प्राबल्म हमें फेस करनी पड़ी बहुत मैं कहूंगा कि ये एक मसीबत कहते हैं
08:46मसीबत जो है कश्मीरी में बोलते हैं ये बहुत ही बड़ी प्राबल्म हमें हम फेस कर रहे हैं
08:50हुआ संधल पालका में पैल इंसिट्टाराइए पालका में अख़ा encourage पिश्टार करेंफिके बाल
08:59पहिए इंसिडेंट को निया रही है यहां पहला इसे कबीodelी निय沒有 nic
09:01का पालका में तूरिस्टों नया है यहां पेलगाम마रे के नहीं रहे हैं यह – अही है
09:09यहां के लोगों का जो है इसी पे मतलब टूरिस्ट पे ही ज्यादा डिपेंड है बाकी मतलब कोई वैसा बिजनिस
09:15दंद है वैसा नहीं है कि मतलब यह अपने घर पर चला सके इनका टूरिजम के साथ ही था ज्यादा
09:20तो मतलब बहुत प्रावबिम इनुने फेश किया यह पू
09:39बना कर उसी पहलगाम में हर रोज जाता है वैसे आदिल हुसैन शाह की सहाधत सिर्फ परिवार का दर्द नहीं
09:46है बलकि अपूरे देश के लिए एक याद है कि इनसानियत क्या होती है वन इंडिया उन्हें और पहलगाम के
09:52तमाम शहीदों को नमन करता है
09:55आदिल ने अपनी जान देकर ना सिर्फ इस हापतनार के इस छोटे इलाके को रोशन किया बलकि कश्मीर के इतिहास
10:05में अपनी वीरता और अपने जजबे और जनून का अपनी बहादरी का एक नाम भी रिकॉर्ड किया है जिसे सदियों
10:14तक लोग याद करते रहेंगे
10:16पहल गाम से One India के लिए मैं इजहार अली
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