00:02यह हमला सिरफ निहट्थे परियटकों पर नहीं हुआ है देश के दुस्मनों ने
00:09आतंकियों को चुनवती देने वला नोजवान आदिल वहां महनत मज्जुरी करने गया था
00:17आतंकियों ने उस आदिल को भी मार दिया
00:29कुछ तारिके सिर्फ कलेंडर पर नहीं होती वो दिनों पर लिखी होती है
00:3422 अपरेल 2025 पहलगाम वो तारिक जब एक वादी की खामोशी को आतंक ने चीर दिया था
00:41आज से ठीक एक साल पहले पहलगाम की वादिया खून से रंग गई थी
00:46आतंकियों ने 26 बेगुना जिन्दगिया चीन ली 26 कर बरबाद हो गए
00:5226 कहानिया इस आतंक की गवाँ बनी और उन्हीं में से एक कहानी है आदिल हुसैन शाह की
01:11आदिल हुसैन एक पती एक बेटा एक भाई जिसने अपनी जान देकर सैकडो सैलानियों को बचाया
01:18आज हम उस गाउं में हैं जहां आदिल का घर है नागवली जहां नदी आज भी बहती है बच्चे अभी
01:28भी यहां खेलते हैं लेकिन एक दर्वाजे पर वक्त मानो थम सा गया हो ठहर सा गया हो
01:35यहां पर रुकी हुई हर निगा एकी सवाल पूछती है कि आदिल कहा है
01:52लंगाई पहार की तरहटी में बसा नागवल गाउं देखने में एकदम सामाने लगता है
01:56खेत खलिहान, उचे पहार, पग्डंडियों पर खेलते बच्चे, लहलाहते खेत, सब कुछ एकदम ठीक
02:03लेकिन इसी गाउं में एक घर ऐसा भी है, जहां वक्त ने ऐसी चोट दी है कि यहां पर 22
02:09अपरेल 2025 के बाद कोई खुशी नहीं आई
02:12आदिल हुसेन के घर पर उनकी बीबी गुलनास का दर्द आज भी उतना ही ताजा है, इतना एक साल पहले
02:18था
02:1922 अपरेल की सुबा तक पहलगाम का ये हापत नाड गाउं शायद कुछी लोग जानते थे, लेकिन 22 अपरेल की
02:27दोपैर होते होते हर किसी की जुबान पर हापत नाड का नाम था
02:31ये गाउं राश्ट्रिय और अंतर राश्ट्रिय सुर्खियों में आ गया क्योंकि यहां के एक नवजवान जिसका नाम आदिल एहमद शाह
02:40था और जो एक पोनी वाला था, देश और विदेश से आने वाले सैलानियों को पहलगाम की खूबसूरत वादिया दिखाता
02:47था, उ
03:00जो नरे अक्षरों से लिखा जाएगा और उसे उसकी वीरता के लिए याद किया जाएगा, आदिल इस घर के कलोते
03:07कमाने वाले थे, जो हर सुबा पहलगाम जाते थे, ताकि उनके घर का चूला जल सके, और उस रोज भी
03:14वो अपनी पतनी गुलनास के हाथ की बनाई चाय पी
03:40आदिल काम पर जाने के बाद रोज दो तीन बार अपनी पतनी गुलनास को फोन करते थे, पूछते थे तुम
03:46ठीक हो, वो रोजमर्रा की बाते जो उस वक्त शायद बहुत मामूरी रगती थी, लेकिन आज गुलनास को उनकी सबसे
03:53बड़ी कमी महसूस होती है, गुलनास बता
03:55कि जब आदिल की खबर मिली तो मुझे महसूस हुआ कि आदिल नहीं रहे, उसके बाद क्या हुआ, क्या नहीं
04:02हुआ, मुझे कुछ नहीं पता, बस इतना पता है कि वो हमेशा हमेशा के लिए चले गए
04:35जिस सुबह ये हादसा हुआ, जिस सुबह ये हादसा हुआ,
04:37उस सुबह आदिल के साथ उनके छोटे भाई नौशाद हुसेन भी पहलगाम निकले थे, अपनी टैक्सी लेकर दोनों भाईयों की
04:43यही जिंदगी थी, नौशाद सैलानियों को गारी मिलाते ले जाते थे, आदिल घोले पर बैठा कर उन्हें वादिया दिखा दे
04:50थे, लेक
05:07इसने 22 अपरिल की सुबह को आतंक वादियों से लड़कर कई एक जाने बचा दी, हमारे सथ इस मामले पर
05:15बात करने के लिए है, आदिल के बाई नौशाद, और हम जाना चाहेंगे नौशाद से, कि उस दिन सुबह से
05:23लेकर शाम तक, आपकी जिंदगी कैसे बदल गई हमेश
05:36जाते हैं, तो उस दिन का भी यह है, मैं घर से निकल गए चुका था तो वह भी मेरे
05:41बाद निकले ते घर से, तो सिस्टर ने बोला था कि आज मत जाओ घर से, तो चंदरमाडी के आदे
05:46रस्ते में में पहुंचा तो एक कजन ने कॉल करके बोला कि पहल गाम में ऐसे ऐसे वा
06:06जो है नाम था फिर हमें पता चला आदिल से आखरी बात और आखरी मुलाकात आपकी कब हुई, क्या बात
06:13चीत हुई आप दो बाईयों के बीच में? तो उस टाइम मैंने उनको बोला था कि पहल गाम आना है,
06:18बोला कि हाँ मैं आऊँगा, आप चलो मैं आ रहा हूँ, बस वह
06:20हमारी लास्ट बात हुई थी, नौशाद आपने एक बाई खोया या एक अच्छा दोस्त, आपका जवाब क्या होगा? एक अच्छे
06:28दोस्त भी थे और बाईय का हिसाब देखें तो बाईय भी बहुत अच्छे थे और दोस्त भी अच्छे थे, आज
06:35आपको इस बात का फकर ह
06:36आप उस अदिल के बाई हो जिसने अपनी जान दे दी और कई लोगों की जाने बचा दी है। यही
06:45चीज़ से तो हम जिंदा है, यही चीज़ से हमारे माम, मेरे बाब, माम बाब जो है, उनकी अपने देखी,
06:50खासकर मेरे माँ, उनकी कंडीशन जो है, मतलब बहुत खराब है
06:54लेकिन वो यही सोच के दिन दिन उनका निकल रहा है
06:58मैं आज कल भी एक साल होने को आया
07:00मैं उनको आज भी यही बोलता हूँ
07:01कि आप यह सोचो आदिल सब ने काम जो किया है
07:04वो सोचो
07:05आदिल आपके पास नहीं है
07:07लेकिन यह सोचो की वो करके क्या गया है
07:14अदिल के घर में एक और दर्द है
07:20उनके बूरे अब्बू का
07:22सेयद हैदर शाह जिनकी दवाईयां लेने के लिए
07:24आदिल उस रोज पहल गाम गए थे
07:26आज उसी बेटे के बिना वो अपनी जिन्दकी गुजार रहे है
07:29आदिल के पिता कहते हैं कि वो मेरे दिल का टुकड़ा था
07:33मेरा दिल टूट गया है लेकिन फक्र है उसने 26 जाने को बचाया
07:38यह गम तो है कि जिगर का टुकड़ा है वो जिगर से टूट गया है
07:43लेकिन फक्र इस बात का है कि उसने 26 जाने जो वहाँ पे चली गई
07:49अगर आदिल आपने जजबात आपना ये इनसानियत वहां पर ना दिखाता तो कहीं और हजारों लाशें भी वहां पर हो
07:59जाती लेकिन आदिल पर ये फकर है कि उसने बहुत सारे लोग वहां हजारों लोग थे जो टूरिश्ट के थे
08:06बहुत सारे लोग मजदूर भी वहां पर
08:09जिनकी जानने उसने बचाई और अपनी जान को अपने ताव पे लगा के उनकी जानों को बचाया तो इस पे
08:17बहुत भकर होता है
08:18एक साल बाद नौशाद अभी भी पहलगाम जाते हैं वही रास्ते वही वादियान लेकिन अब आदिल साथ नहीं है
08:26नौसाद कहते हैं कि पहलगाम की लोग पूरी तरह सैलानियों पर निर्भर हैं
08:30इस हाथसे के बाद परेटन पूरी तरह ठप हो गया
08:33सैलानी नहीं आये, पूरे साल लोगों ने बहुत तकलीफ जेली है
08:37बहुत मुश्किलें जेली है
08:39बहुत ही जो है मतलब प्राबल्म हमें फेस करनी पड़ी बहुत मैं कहूंगा कि ये एक मसीबत कहते हैं
08:46मसीबत जो है कश्मीरी में बोलते हैं ये बहुत ही बड़ी प्राबल्म हमें हम फेस कर रहे हैं
08:50हुआ संधल पालका में पैल इंसिट्टाराइए पालका में अख़ा encourage पिश्टार करेंफिके बाल
08:59पहिए इंसिडेंट को निया रही है यहां पहला इसे कबीodelी निय沒有 nic
09:01का पालका में तूरिस्टों नया है यहां पेलगाम마रे के नहीं रहे हैं यह – अही है
09:09यहां के लोगों का जो है इसी पे मतलब टूरिस्ट पे ही ज्यादा डिपेंड है बाकी मतलब कोई वैसा बिजनिस
09:15दंद है वैसा नहीं है कि मतलब यह अपने घर पर चला सके इनका टूरिजम के साथ ही था ज्यादा
09:20तो मतलब बहुत प्रावबिम इनुने फेश किया यह पू
09:39बना कर उसी पहलगाम में हर रोज जाता है वैसे आदिल हुसैन शाह की सहाधत सिर्फ परिवार का दर्द नहीं
09:46है बलकि अपूरे देश के लिए एक याद है कि इनसानियत क्या होती है वन इंडिया उन्हें और पहलगाम के
09:52तमाम शहीदों को नमन करता है
09:55आदिल ने अपनी जान देकर ना सिर्फ इस हापतनार के इस छोटे इलाके को रोशन किया बलकि कश्मीर के इतिहास
10:05में अपनी वीरता और अपने जजबे और जनून का अपनी बहादरी का एक नाम भी रिकॉर्ड किया है जिसे सदियों
10:14तक लोग याद करते रहेंगे
10:16पहल गाम से One India के लिए मैं इजहार अली
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