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Arvind Kejriwal की जेल वापसी का काउंटडाउन शुरू? जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केस छोड़ने से इनकार कर दिल्ली की राजनीति में सनसनी मचा दी है। जानिए कैसे केजरीवाल का खुद को बचाने वाला दांव उल्टा पड़ गया और अब 'सख्त' अदालत में क्या होगा।

Justice Swarna Kanta Sharma of the Delhi High Court has dismissed the plea filed by Arvind Kejriwal seeking her recusal from the Delhi Liquor Policy case. The court maintained that judicial integrity cannot be compromised by unfounded allegations or political narratives. The judge emphasized her commitment to the Constitution, stating that the judiciary will not bow down to any pressure.


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Transcript
00:06केज रिवाल की जेल वापसी का काउंटडाउन शुरू जस्तिस तुरंड कांता शर्मा ने केज छोड़ने से इंकार कर एक संसनी
00:13मचा दिये
00:14केज रिवाल ने जज की विचार धारा और परिवार पर सवाल उठा कर उन्हें हटाने की तो पूरी कोशिश की
00:19लेकिन दाउं इस पार उल्टा पड़े गया
00:22अब उसी सखता दालत में केज रिवाल की किसमत का फैस्कला होने वाला है क्या केज रिवाल फिर बुरा फसे
00:28हैं चलिए विडियो में जान लेते हैं
00:31दिली आपकारी नीती मामले में अर्विंद केज़िवाल को दिली हाई कूट से कुई रहत नहीं मिली जस्टिस तुरंड कांता शर्मा
00:37ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से साफ इंकार कर दिया है
00:41केज़िवाल और अन्यारोपियों ने यह अचिका धायर कर मांग की कि जस्टिस शर्मा इस केस की सुनवाई ना करें क्योंकि
00:47उन्हें प्रक्षपात के आश्यमगा थी
00:49सुमवार 20 अप्रिल 2026 को इसरजी को खारिस करते हुए अब सीदे तोर पर जजज ने कहा कि न्याय कभी
00:56दवाव में जुकता नहीं है और उनकी निष्ठा के बद सम्विधान के प्रती है
01:01ये फैसल के जिवाल के लिए एक बड़ा कानुवी जटका माना जा रहा है और कहा जा रहा है कि
01:06अपके जिवाल और ज्यादा संकट में गिर गए हैं
01:10जस्स्टिस वरंड कांता शर्मा ने अपने फैसले में बहुत ही कड़े और सपष्ट शब्दों का इस्तिमाल किया
01:15उन्होंने कहा कि जब उन्होंने सादिश को लिखना शुरू किया तब कोट रूम के सननाटे में उन्हें अपनी जिम्मेदारी का
01:21गहरा एहसास भी हुआ था
01:24उन्होंने कहा कि वो किसी भी दवाब में जुखकर न्याय नहीं करेंगी क्योंकि उनकी शपत भारत के सम्विधान के प्रतिया
01:30डूट है
01:30जज ने सपष्ट किया कि उनके लिए खुद को मामली से लग करना एक आसान रास्ता होता लेकिन उन्होंने कठन
01:37रास्ता चुन लिया है
01:38क्योंकि यह मामला केवल उनका नहीं बल्कि पूरी न्याय पालिका की निश्पक्षता और संस्थान की गरिमा का भी है
01:45उन्होंने कहा कि न्याइपालिका की असली ताकत आरूपों के सामने डटकर खड़े रहने और बिना किसी भाई के फैसला लेने
01:51में है
01:52अदालत ने उनके दावों को भी खारिज कर दिया जिन में कहा गया कि उनके द्वारा दिये गए आदिशों को
01:56सुप्रीम पोर्ट रद्द कर देता है
01:59जस्तिश शर्मा ने संजय सिंग, मनेश सूधिया और खुद अरविंद केजरिवाल के मामलों का उधारन देते हुए बताया कि उपरी
02:06अदालत ने उनके आदिशों पर कोई नकरात्मक टपणी नहीं की थी
02:10उन्होंने याद दिलाया कि जब इसी अदालत ने आम आद्मी पार्टी के नेताओं को पहले राहत दी थी तब किसी
02:16ने उनकी निश्पक्षता पर सवाल नहीं उठाये थी
02:19जज ने कहा कि ये दोहरा रवाया नहीं चल सकता फैसला पक्ष में आये तो प्रक्विया सही है और विपक्ष
02:25में तो जज पर कड़े सवाल
02:27किरच्रिवाल ने जस्तिस शर्मा के अधिवक्ता परिशुत के कारिक्रों में जाने पर भी आपत्ती जताई थी
02:32इस पर जज ने जवाब दिया कि ये कारिक्रम विशुद धरूप से कानूनी और सामाजिक थे ना कि राजनेतिक
02:39उन्होंने कहा कि बार और बैंच का रिष्टा केवल कोट रूम तक सीमित नहीं होता और जजजों का युबा वकील
02:44या च्छात्रों से संबाद करना उनके पीशे का हिस्सा है
02:47राजनेतिक नेताओं के सारवजिनिक बैयानों पर कूटा कोई नियंत्रण नहीं होता और किसी नेता के भाशन को जजज की विचारधारा
02:54से जोड़ना केवल कल्पना मात्र है
02:57परिवारवाद और हितों के टकराव के आरूप उपर भी जस्टिश शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया उन्होंने कहा कि एक न्यायधीश
03:02के पद्ध की शबत उनके परिवार के सदस्य नहीं लेते
03:05उन्होंने सवाल किया कि अगर राजनेताओं के बच्चे राजनीती में आ सकते हैं तो जजजों के बच्चे वकालत क्यों नहीं
03:28कर सकते
03:28जस्तिस शर्मा ने केजिवल की अर्जी को एक ऐसी स्थिती बताया जहां याची का करता ने अपने लिए जीत का
03:34रास्ता कूज लिया था
03:36अगर वो हट जाती तो इसे याची का करता की जीत माना जाता और ना हटने पर भी पक्षपात का
03:41आरूप गड़ दिया जाता
03:43जज ने अंत में कहा कि किसी वादी के मनगढंत शक या फिर निराधार आशंकाओं को संतुष्ट करने के लिए
03:49जज अपने जिम्मधारी पता ही नहीं छोड़ेंगे
03:52उन्होंने ये सपष्ट कर दिया कि सुनवाई से हटने का आधार केवल कानूनन होना चाहिए ना कि कि किसी के
03:58द्वारा गड़ा गया कुई नेरेटिव
03:59यह फैसला स्पष्ट करता है कि अदालतीं केवल तक्थियों और साक्षियों पर चलती है ना कि कि किसी भी राजनाटिक
04:06त्रभाव या विर्दवाव में आकर अपनी शपत से पीछे हटने का काम होगा
04:11बैराल मामले को आप कैसे देख रही है जस्टिस को लेकर आपके मन में क्या राय है कि जिवाल के
04:16इस नए जंजट में आप अपनी क्या टिपणी करना चाहते हैं जंजट के लिए क्या लेखना चाहते हैं
04:22comment box आपके लिए है अपनी राय टिपणी सवाल वहां जरूर छोड़ेगा मेरा नाम है मुकुल्द आप बने रहे वन
04:29इंडिया के साथ शुक्राइब
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