00:06जस्टिस श्वर्ण कांता शर्मा वो नाम जो अब दिल्ली हाईपूर की न्यायक शिर्णी के रूप में पहचान रखता है जिनकी
00:13अदालत में किवल कानूं की दहाड सुनाई देती है
00:16दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अर्विंद केश्विवाल ने उनके परिवार और विचारधारा पर सवार उठा कर उन्हें केश से हटाने की
00:23हर मुम्किन पूशिश की लेकिन जस्टिस शर्मा ने जुगने की बजाय सीनात कान कर केश छोड़ने से इंकार कर दिया
00:30उनके सक्त फैसले ने ना सिर्व किर जिवाल की कानूनी टीम में खलबली मचा दी बलकि ये भी साफ कर
00:36दिया कि न्याएक की कुरसी किसी भी सियासी रसूख या दबाव से बेहद उपर है
00:41जस्टिस शर्मा का 34 साल का न्याएक करियर उनकी सबसे बड़ी ताकत है उन्होंने 1991 में वगालत से शुरुवात की
00:48और 2002 में दिल्ली उचितर न्याएक सेवा का हिसाब भी बनी
00:52वे उस सिस्टम की उपज हैं जहां रोज हजारों लोग अपने इंसाफ की उमीद में आते हैं
00:58निशली अदालतों में सालों तक काम करने की कारण उन्हें अच्छी तर ऐसे पता है कि केस कैसे बनते हैं
01:03पुलिस के चार्ड शीट में कहां छेद होते हैं और गवाहों को कैसे तोड़ा मरूडा जाता है
01:09इसलिए उनकी चवी एक ऐसी जजकी है जो कि भावनाओं की बजाए कि वड़ोस सबूतों और तकनी की तत्यों पर
01:15भरूसा किया करती हैं
01:17केश्रिवाल और जस्टिस शर्मा के बीच कानूनी तकरार की शुरुवात हुई 9 अप्रील से
01:21उस दिन जस्टिस शर्मा की बैंच ने केश्रिवाल की गरफतारी को चुनाती देने वाली याचिका ना सिर्फ खारिज कर दी
01:27बलकि एडी की कारवाई को सही ठहराते हुए बेहुद सक्थ ठट्टे पणया की
01:32यहीं से केश्रिवाल की टीम को एहसास हो गया कि जस्टिस शर्मा की एक कूट में केवल कानून की भाशा
01:38चलती है
01:38जबकि इश्रिवाल ने उन पर पक्षपात का आरूप लगाया और ये आरूप लगाते हुए कि इस से हटने को कहा
01:44तो जस्टिस शर्मा ने इसे न्याय पालिका पर हमला माना और पीछे हटने से साफ इनकार भी कर दिया
01:50अदालत में जस्टिस शर्मा ने बहुत कड़े शब्दों में साफ करने की कोशिश की कि न्याय कभी दवाब में जुकता
01:57नहीं है
01:57उन्होंने सपश्ट किया कि उनके लिए खुद को मामले से लग करना एक आसान रास्ता होता लेकिन उन्होंने अपनी शपत
02:03और न्यायक सुंस्था की गरिमा के लिए कठन रास्ता चुना है
02:06उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि एक न्याय धीश की शपत उनके परिवार के सुदस्या नहीं लेते
02:11केजिवल द्वारा उनके परिवार पर उठाय गए सवालों का जवाब देती हुए
02:15उन्होंने पूछा कि अगर राजनीताओं के बच्चे राजनीती में आ सकते हैं
02:18तो आखिर जज़ूं के बच्चे वगालत क्यों नहीं कर सकते हैं
02:22जस्तिस शर्मा की पहचान एक स्ट्रिक्ट इंटर्प्रेटर के तौर पर है
02:40उन्हें ही कड़ घरे में लाया जाता है
02:42अब जस्तिस ने याद दिलाया कि अब इसी अदालत ने आप और दूसरे कई बड़े नेताओं को जूट दी थी
02:49राहत दी थी
02:49तब किसी ने उनकी निश्पक्षता पर शक नहीं किया था
02:53लेकिन जब अब आपके पक्ष में ये महाल नहीं बन रहा आप फंस से नज़र आ रही हैं
02:57तो आप सीधे तोर पर एक जच की पक्षता निश्पक्षता वाले सवाल शुरू कर देते हैं
03:04जस्टिस शर्मा ने साफ कर दिया कि सोशल मीडिया पर चलने वाले नेरेटिव या किसी निटा के भाशन से अदालतें
03:09प्रभावित नहीं हुआ करती
03:11अब दिल्ली शराब निती मामले में केज्रिवाल की गस्मत का फैसला उसी सक्त अदालत में होगा जिसे वो चुनोती दे
03:17रहे थे
03:17जस्टिस टुरंड कांतर शर्मा ने ये भी साफ किया है ये भी साबित किया है कि वे केवल समविधान के
03:23प्रती जवाब दे हैं
03:25उनके आदेशों में डिजिटल एविडेंस और प्रक्रियात्मक अनुपालन पर इतनी बारी की होती है कि उसे उपरी अधालतों में चुनोती
03:32देना कताई आसान नहीं होता
03:34केजिवाल के लिए एक बड़ा कानूनी संकट है क्योंकि अब उन्हीं उस चच का सामना करना है जो ना तो
03:39किसी के रसूग से डरती है और ना ही किसी के मनगरंथ आरूपों से विचलित होती है
03:44और केजिवाल ने स्तीध्य तोर पर पंगा भी लिया है देखना दिल्चस्प होगा कि अब कितनी मुश्किले आप संयों जग्यान
03:51की अरुविंद केजिवाल की बढ़ चलेंगे
03:54मामले पर हमारी नजर है जैसे कोई अपडेट मिलेगा आप से साजा करेंगे मेरा नाम है मुकुंद आप बने रहिए
03:58वन इंडिया के साथ शुक्रें
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