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दिल्ली के Tis Hazari Court ने एक ऐतिहासिक फैसले में CBI के जॉइंट डायरेक्टर रामनीश गीर और दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड ACP वी.के. पांडेय को 2000 में हुए एक रेड केस में दोषी ठहराया है। यह मामला IRS अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल से जुड़ा है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि 19 अक्टूबर 2000 को उनके पश्चिम विहार स्थित घर में जबरन घुसकर उनके साथ मारपीट की गई थी। अब इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है।


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~ED.276~GR.508~HT.96~

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00:00देश की सबसे बड़ी जाच एजेंसियों में से एक सीबी आई पर अक्सर आरोप लगते हैं कि वह सरकार के
00:05इंफ्लिएंस में आकर एक्शन लेते हैं।
00:07ये आरोप ज्यादातर विपक्षी तरफ से ही लगते हैं फिर चाहे वह किसी भी पार्ट ही का।
00:12ये आरोप आज से नहीं बलकि तब से लग रहे हैं जब से सीबी आई अपने अस्तितों में आई हैं।
00:17साथ ही अगर मामला राजने देखो तो ये आरोप और ज्यादा गहरे हो जाते हैं।
00:22उधारण के लिए हाले मामला पटना का है जहां पर रेप और मडर केस में भी सीबी आई का लापरवाही
00:28भरा रवईया देखने हुए जब वह इस केस में चार्ट शीट पेश करना कोर्ट में भूल गे।
00:34इसके अलावा पीडिता के कपड़ों से मिले सीमन का मिलान भी आरोपियों से कराना भी ज़रूरी नहीं समझाया फिर से
00:40भूल गे।
00:40आरोप फिर लगे कि सीबी आई किसी बड़े चहरे को बचाने की कोशिश कर रही है।
00:45लेकिन अब सीबी आई ही नहीं बलकि उन सभी एजेंसियों को दिमाग में ये बात जरूर रखनी चाहिए कि सक्ता
00:50आती जाती रहती है लेकिन इस देश की कोट परमनेंट।
00:54आप आज जो किसी के दबाओ या फिर किसी के प्रभाओ में कर रहे हैं तो हो सकता है कि
01:00कल के दिन कोट आपको इस मामले में सजा सुना दे।
01:04ऐसा एक मामला आया है दिल्ली की 30,000 कोट से जहां 26 साल बाद ऐसा फैसला दिया है जिससे
01:10मौझूदा वक्त के सभी CBI अधिकारी सक्ते में है और उन्हें इस सबक जरूर लेना चाहिए।
01:17दरसल इस मामले में कोट ने CBI के मौझूदा जोईन डिरेक्टर रमनीश गीर और दिल्ली पुलिस के रेटाइड ACP वी
01:25के पांडे जो की तब CBI में हुआ करते थे दौनों को एक IRS अधिकारी के घर पर रेड डालने
01:32और गिरफतारी के दोरान क्रिमिनल प्रेस पासिंग, मार
01:35पीट और बड सलूकी का दोशी ठेराया है। मामला क्या है वो भी जान लेते हैं। दरसल साल 2000 की
01:42बात है, अक्तुबर के महीने में ततकालीन IRS अधिकारी अशोक कुमार अगरवाल दौरा एक मामला दरुशकर आया गया। जिसमें उन्होंने
01:50आरोप लगाए कि 19 अक्टुबर
01:522000 को CBI और पुलिस की टीम ने पश्चिम विहार इस्तित उनके घर में जबरन घुसकर उनके साथ मार पीट
01:59की। मामला कोट पहुचा और केस में सुनवाई शुरू हुई। अगरवाल 1985 के IRS अधिकारी थे, वे अपने वकील शुभम
02:08असरी के साथ कोट में पेश हुए। इस �
02:10तोरान उन्होंने बताया कि वह 1999 में enforcement directorate यानि की ED के दिल्ली जोन में deputy director थे और
02:18कई high profile मामलों की जाश कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि फेरा उलंगन के मामले में जिस अभिशेक
02:25वर्मा की वो जाश कर रहे थे वह CBI से जाकर मिल गए। अब फेरा क्या है पहले उ
02:40कानून जिसको लिए कर वह जाश कर रहे थे। बकॉल अगरवाल अभिशेक वर्मा ने CBI अधिकारियों के साथ मिलकर उन्हें
02:47जूटे भरष्टा चार केस में फसादिया। इसके बाद मार्च 1999 में उनके घर पर चापे के बाद उनके खिलाफ आई
02:54से अधिक संपत्ती का केस
02:56दर्ज हुआ। इसके एक साल बाद उन्हें दिली से बाहर ट्रांसफर कर सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन सितंबर 2000 में
03:03Central Administrative Tribunal यानि की CAT ने उनके ट्रांसफर पर रोक लगाया। इसके बावजूद CAT के आदेश के एक महीने
03:11से भी कम समय में ऐसा होता है कि एक सुबह करी
03:22है कि इस दोरान एजेंसी के अधिकारियों ने उनके गेट कीपर को पीटा और फिर उनके घर में एंट्री ली।
03:28इस दोरान उनके परिवार को एक कमरे में बंद कर दिया गया और उन्हें बेडरूम से जबरन घसीट कर बाहर
03:35निकाल लगा। जिससे उनके दाहिने हाथ में �
03:38चोटाई इस मामले में तारीखें चलती रही और अब फैसला आया है इस मामले में तीस हजारी कोट के जिडिश्यल
03:45मजिस्ट्रेट शशांक नंदन भट ने दोनों आदिकारियों को दो शीट ठेहराया है यानि की रमणीख, गीर और वीके पांटे इन
03:55दोनों को दो शीट ठ
03:59अठारा अप्रेल को सुनाए इस फैसले में कोट ने साफ कहा कि तलाशी और गिरफतारी के दोरान बिना किसी ठोस
04:07कारण के घर का दर्वाजा तोड़ना मिस्टीफ यानिकी शरारत पूर्ण नुकसान है और अपनी पावर का गलत इस्तमाल करते हुए
04:15किसी की संपत्ती में घु
04:19कोट ने यह भी कहा कि पूरी तलाशी और गिरफतारी की प्रक्रिया कानुन द्वारा दी गई शक्तियों का सीधा सीधा
04:26उलंगन थी और अधिकारी इसके लिए सीधे सीधे जिम्मेदार कोट ने यह भी माना कि 18 अक्टुवर 2000 तक सी
04:34एटी को जवाब देने के बजाए सी बी
04:48के लिए की गई थी कोट ने ये भी कहा कि आरोपियों ने यह थाबित नहीं किया कि घर में
05:06घुसना बेहत जरूरी था
05:08वहीं इंडियन एक्स्प्रेस से बात करते हुए अगरवाल के वकील शुभम असरी ने बताया कि अगरवाल को पहले ही आए
05:14से अधिक संपत्ति वाले केस और CBI के केस दोनों मेंबरी किया जा चुका है।
05:38और मेडल भी ले रहे हैं। खेर अब सभी को सब्सक्राइब का इंतिजार है और देखना होगा कि कोड क्या
05:45सजा देता है। आपके इस मामले में क्या रहा है हमें कॉमेंट में ज़रूर बताएं और देखते रहे हैं वन
05:49इंडिया तौनस्कार।
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