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  • 1 week ago
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 2026 के लिए मानसून का पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा है कि इस साल देश में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. इसका मुख्य कारण ‘अल नीनो’ की संभावित स्थिति को माना जा रहा है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है. अल नीनो के चलते भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे कृषि, भूजल स्तर और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ने की आशंका है. दक्षिण-पश्चिम मानसून जून से सितंबर तक रहता है और देश की अधिकांश बारिश इसी दौरान होती है. ऐसे में कम बारिश का सीधा असर खेती और जल संसाधनों पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ सकती हैं.

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Transcript
00:01भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल दीश में सामाने से कम बारिश होने का अनुमाल लगाया है
00:06इसकी वज़े दक्षन पस्चिम मानसून के सीजन के दोरान अल नीनो की स्थिपी बनने की संभावना को माना जा रहा
00:14है
00:15अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायो घटना है जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का पानी असमाने रूप से
00:23गर्म हो जाता है
00:24जिससे दुनिया भर में मौसम के सामाने पैटर्न में बाधा आती है
00:29यह भारत में मानसून की सीजन को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है
00:33क्योंकि इसकी वजह से बारिश की कम होने या सामाने से कम होने की संभावना बढ़ जाती है
00:38Presently, there exists weak La Nina condition and is transitioning to Enso neutral condition over the Equatorial Pacific
00:48So according to the Mission Climate Monsoon Mission Climate Focus system
00:54It suggests the development of El Nino during this southwest monsoon that is 2026 season
01:01If we see the map that is given prediction given by IMD
01:06We can see most of the parts of the country is going to be below normal rainfall
01:12This year because of El Nino
01:14इसके नतीजे काफी गंभीर हो सकते हैं
01:17इसे कई राजियों में क्रिशी, भूजल स्तर और पीने के पानी की उपलब्धता को लेकर चित्ताएं बढ़ सकती है
01:25दक्षन पस्च मानसून जून से सितंबर तक रहता है
01:28ये भारत में हर साल होने वाली बारिश का एक बड़ा हिस्सा होता है
01:32और देश के मौसमी जलवायू चक्र मेंस की मुखे भूमिका होती है
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