एशिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप, असम का माजुली अपनी वैष्णव संस्कृति के केंद्र के रूप में जाना जाता है. इसी संस्कृति के हिस्से के रूप में, माजुली 'मुखौटा बनाने' की अनूठी परंपरा है. GI टैग मिलने के बाद, माजुली की इस कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है. आमतौर पर पुरुषों का क्षेत्र मानी जाने वाली इस कला में जुरी मोनी कलिता लंबे समय से जुड़ी हुई हैं और उन्होंने अपनी एक खास जगह बनाई है. माजुली की इस महिला ने मुखौटा बनाने के उद्योग से जुड़कर खुद को आत्मनिर्भर बनाया है. उनका मानना है कि आधुनिक समय में महिलाएं भी पुरुषों के समान आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं.
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