00:00अब इस पूरे सेट अप में ट्रांसजेंडर के लिए क्या जगा है?
00:04कुछ नहीं?
00:06ट्रांसजेंडर के प्रति हमारा रवईया क्या हम एक सेक्शुली ऑपसेस्ट सोसाइटी क्यों है हर तरीके से?
00:12और यहां बात भारत की नहीं हो रही है या हिंदी भाषागी नहीं हो रही है
00:16वेस्ट इस इक्वली ऑपसेस्ट, उनके तरीके दूसरे हैं आपसेशन के
00:20आपका सेक्स इगोईक होता है, और इसलिए असफल रहता है और इसलिए वाइलेंट होता है
00:26उसमें रेवी हो जाता है उसमें दूसरे के शरीर के साथ छीरफाड भी कर देते हो और उसमें हत्या भी
00:33कर देते हो औस चाबुक मारते हैं
00:49अब इस पूरे सेट अप में ट्रांसजेंडर के लिए क्या जगह है? कुछ नहीं।
00:53वो ना पुरुष के काम का, ना महिला के काम का,
00:56तो उसको पूरे तरीके से एक्स्क्लूड कर दिया, उसका पूरा भाहिशकार है।
01:01यद्यपी एक मनुश्य की तरह देखो,
01:03तो लिंग को छोड़ कर बाकी सब कुछ उसमें किसी भी दूसरे मनुश्य जैसे ही है।
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