00:00अचारी आज जन्जी को किस तरह से उनकी समस्याओं का निराक्रांट करने के तरीके बताएं?
00:04समस्या तो सारी भीतरी होती है
00:06पुरानी जो पीडियां थी उनके उपर दबाओ बाहर से बनता था
00:10उनके उपर समाज, परंपरा, व्यवस्था ये सब हावी रहते थे
00:14जो नई पीड़ी है जन्जी और अब इनके बाद तो और भी पीड़ी आ रही है छोटे बच्चों की
00:20ये ज्यादा आसानी से बाहरी व्यवस्थाओं के खिलाफ और परंपराओं के खिलाफ और समाज, परिवार के खिलाफ विद्रोग कर लेते
00:29हैं
00:30जो की शायद अच्छी बात भी है बाहर से कोई आपके ऊपर कोई बात लादना चाहे काबू में करना चाहे
00:37आपको तो आप उसके अच्छी बात है लेकिन इनकी जो समस्या है वो शायद पिछली प्रीडियों से ज्यादा विकट है
00:44क्योंकि इनका शोशक इनका मालिक अभी �
00:49बीट गए तो बाहर बाहर तो इन्होंने विद्रोह कर दिया पर अपने भीतर जो हंकार बैठा है इनकी पसंद ना
00:56-पसंद बनकर मान्यता बनकर मत ओपीनियन बनकर लाइक्स तिस्लाइक्स पुर्वा ग्रह धार्णा ये सब बनकर ये उसको मैं मानते है
01:07उसके खेलाफ नही
01:11यह तो मेरी सुच्छा है, यह तो मैं ऐसा करूंगा, ऐसा करूंगी।
01:14अपनी पसंद को अपना बोलने से पहले थोड़ा देखा करो, थोड़ा आत्मवलोकन करो, आत्मविचार करो।
01:21वो सब कुछ जिसको तुम अपना बोलते हो, वो सारे विचार जो तुम बाट कर बैठे हुए हो, और कहते
01:29हो कि यह तो मेरे हैं, नीजी हैं, परसनल हैं, क्या तुम्हारी सुच्छा है।
01:35तो इनका किस्ता थोड़ा ज्यादा पिचीदा है।
01:37पहले तो जो आपको काबू में करने आता था, आपका मालिक बनकर, मियंतरक बनकर, तो दिखाई देता था, हाग के
01:44सामने होता था, जो आज की पीड़ी है, इसको बाहरी सुतंतरता खोम मिली हुई है, लेकिन भीतर की गुलामी यह
01:50थावत है, और बाहर का शोषब जब भीत
01:53अधर बैठ जाए, मैं बनकर, हंकार बनकर, तो और ज्यादा घाता को जबता है
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