00:00नेक वक्त ऐसा भी था जब स्मार्टफोन्स नहीं थे तब आपको लगता है जीवन ज्यादा सरल था
00:06या आज जब इतना एक्स्पोजर है तो क्या हम उसके माध्यम से कुछ सीख पा रहे हैं और हम आगे
00:14बढ़े हैं
00:15यह तो पानी है नचा पानी तो घातक नहीं होता और माईक भी आपने आप में घातक नहीं
00:21पर मैं यह पानी उठा गया है यहां पने सर पे डाल दूं मैं पागल हूँ
00:24मैं इस गिलास फोड़ दूँ और जो काच उसमें से निकले उससे अपना मुह काट लूँ गरदन काट लूँ
00:29तो इसमें गलती ना तो इस गिलास की है ना पानी की है मैं माइक लेके यहाँ पर किसी को
00:34फेट दूँ
00:34कुछ करने लग जाऊं आदमी जब गढबढ होता है तो आप उसको जो भी संसाधन जो भी रिसौर्स सुविधा देंगे
00:40वो उसका गढबढ ही इस्तिमाल करेगा
00:43नुक्लियर पावर का इस्तेमाल हो सकता है यह हाँ जो बिजली है इसके लिए भी और नुक्लियर पावर का इस्तेमाल
00:48हो सकता है हिरोशिमा नागासागी के लिए भी
00:57हम जब गढबड हैं, हमारे हाथ में जो भी पावार आता है उसे गढबड ही इस्तेमाल करते हैं
01:01इसलिए अध्यातम जरूरी है, ताकि हम ठीक हो पाएं
01:04हम ठीक नहीं है तो ये सारी तरक्की आत्मगातक है
01:07अगर भीतरी तरक्की नहीं हो रही तो बाहरी तरक्की और जादा नुकसान दे देती है
01:12एक व्यक्ति को किस तरह से रेगुलेटिड रहना चाहिए
01:15देखिए जब मुझे साफ साफ पता चलता है न कि मैं कौन हूँ
01:20दिखाई देने लगता है कहां मैं कमजोर पड़ रहा हूँ
01:24कहां मैं अपना ही नुकसान कर रहा हूँ
01:26और कैसे मैं बहतर हो सकता हूँ
01:28क्या जीवन में ला करके क्या जीवन से हटा करके
01:30तो फिर मैं दूसरों के लिए भी जिम्मेदार हो जाता हूँ अपने आप
01:33वो एक ओड़ी हुई जिम्मेदारी नहीं होती
01:36फिर मेरी हस्ती ही जिम्मेदार बन जाती है
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