00:00चाय थोड़ा नशे की चीज होती है, जानते हो ना अडिक्टिव होती है, तो आपको चाय पी नहीं है, नशा
00:06आपको दूद का भी नहीं है, नशा आपको उस चाय की पत्ती का है, तो आप चाय पी होगे, लेकिन
00:11आपने जिद बना लिये कि मैं पत्ती तभी लूँगा भीतर �
00:15जब उसमें दूट डला होगा, अब चाय कोई भारतिय पेपदार तो है भी नहीं, और अंग्रेजों नो जब शुरू करा
00:23था, तो उसमें मिल्क जैसी कोई चीज होती ही नहीं थी, वो तो चाय की पत्ती को लेते थे, उसको
00:29उबालते थे, उससे तासगी आती थी, और हमने उस
00:31क्या करा, हम उसको लेते हैं, पूरी प्रक्लिया से कोजारते हैं, जो टी का मैनुफेक्ट्रिंग, प्रोसेसिंग, प्रोसेसिंग, प्रोसेस होता है,
00:38जन्होंने देखा हो, उसको पत्ती को जला देते हैं, उसमें से भी जो बढ़ियां पत्ती होती है, वो तो एक्सपोर्ट
01:02क्योंकि आपको पत्ती का नशा हो गया है कभी आप देखिएगा भैस को जब खीच के लिए जा रहे होते
01:07हैं काटने के लिए उसकी आखें फटके इतनी बड़ी हो जाती है देशत में उसे सब पता है उसे पता
01:12है और अगर उसका कोई बच्चा और पास में तो देखिए उस ब
01:29अधाभ हैसी के ओ दिखाई देती है क्योंकि उपैदा होते ही कट दिया जाता है उससे आपकी चाय आती है
01:34आपको चाय पीनी भी है जाब तो उसमें डाल लो या तो यही शुरू करतो जैसे अभी है मैं अभी
01:42यह जो पी रहा हूं यह चाय ही है यह काले रंग की नहीं है ब�
01:57अरिल का दूद, सोय का दूद, ओट का दूद, आलमंट का दूद, इस सा बाते हैं और कोई ज़रूरी नहीं
02:05है कि यह भायंस के दूद से महगई हो बिलकुल ऐसा नहीं है मैं मिरी जिंदगी, वो उसकी जिंदगी, मुझे
02:13जीना है मेरी सिन गी, मैं अपने जीने के लिए उ
02:26काओवा लग सकता हूपर आप ये नहीं बोलोगी कि कमजोर है
02:29तो कैसे चल रहा है काम
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