00:00पेट्रोल डीजल पर 10 रुपए एक्साइज कट
00:09मौजुदा रहत या चुनावी चाल
00:20सरकार के फैसले पर कई सवार
00:22जिहां पश्चिम एसिया में जारी युद्धोर बढ़ते वैस्विक तनाओ के बीच
00:26सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज डूटी 10 रुपए घटाने का बड़ा फैसला लिया है
00:32पहरी नदर मिया फैसला आम लोगों के लिए राहत की खबल लगती है
00:36क्योंकि महेंगे इंधन से परिशान जनता को अब कुछ राहत मिल सकती है
00:41लेकिन जैसे ही इस फैसले को गहराई से देखा जाए तो इसके साथ कई बड़े और असहज सवाल भी सामने
00:48आ जाते है
00:48क्या या राहत लंबे समय तक ठिकेगी या फिर चुनावई मौसम तक सीमित रहेगी
00:53सबसे पहला और सिधा सवाल यही है कि क्या या कटोती अस्थाई या आस्थाई है
00:59क्योंकि इतिहास गवा है कि कई बार चुनावई से पहले कीमतों में राहत दी जाती है
01:04लेकिन बाद में फिर धीरे धीरे बढ़ोत्री हो जाती है
01:07ऐसे में लोगों के मन में अशंका होना स्वाविक है कि क्या या कदम सच में जनता के लिए है
01:12या फिर चुनावई डर्णीत का हिस्सा
01:14दूसरा बड़ा और गंभीर सवाल है कि क्या इस कटोती के लिए युद्धो सप्लाई संकट का इंतजार करना जरूरी था
01:20जब वैसुक बाजार में पहले तेल कीमते नीचे थी तब उपभुकतों को पूरा फायदा क्यों नहीं मिला
01:26उस समय एकसाई ड्यूटी को कम क्यों नहीं किया गया कि सवाल सीधे तोर पर सरकार की नीथी और प्रत्मिक्ताओं
01:34पर उठता है
01:37तीसरा सवाल राज्यों की भूमिका को लेकर है क्या अब राज्य सरकारे भी अपने टेक्स कम करेंगी ताकि आम आदमी
01:43को और रहत मिल सके
01:45क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केंद्र और राज्य दोनों का टेक्स सामिल होता है
01:49अगर राज इटेक्स नहीं खटाते तो क्या या राहत आधी ही रह जाएगी
01:55चोथा और सबसे एहम सवाल क्या भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतें सच में बाजार के हिसाब सते होती है
02:01या फिर इसमें सरकारी हस्तक शेप और चुनावी कलेंडर की भूम का जादा होती है
02:06क्योंकि जब कीमतें बढ़ती हैं तो उसे एक ग्लोबल मार्केट का हवाला देकर सही ठहरा जाता है
02:11लेकिन जब घटती हैं तो उसके टाइमिंग अक्सर चुनाओं के आसपास ही क्यों दिखाई देती है
02:19या पूरा मामला सिर्फ 10 की रुपए की रहत का नहीं है बलकि या पादरिश्टा, नीती और भरोसे का सवाल
02:25है
02:25आम आदमी जानना चाहता है कि उसे जो रहत मिल रही है वह कितनी सची है और कितनी स्थाई है
02:31हलाकि 10 रुपए की जो रहत दी गई है वो तेल कमपनियों को फिलहाल दी गई है
02:36जन तक पर पढ़ने वाला बोज अभी फिलहाल किसी भी तरह से कोई कम होता नजर नहीं आ रहा है
02:42हलाकि इस बात की तसलिक की जा रही है कि आने वाले समय में जब तेल की कीमतें अंतराश्ट्रे बाजार
02:48में बढ़ेंगी
02:49तो उम्मीद की जा रही है कि भारत में उनका असर कम होगा
02:52और यही वज़ा है कि अभी से 10 रुपए की ये रहत दी गई है
02:57वैसे अब नजर सिर्फ कीमतों पर नहीं है बलकि नीतियों पर भी है क्योंकि सवाल सिर्फ पेट्रोल डीजल का नहीं
03:03बलकि उस सिस्टम का है जो तै करता है कि आम आदमी की जेब पर कितना बोज पढ़ेगा
03:09फिल हाक लिए बस इतना ही बाके बेटली बने रही है वन इंडिया हिंदी के साथ
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