00:26।
00:56।
00:59वे श्वेत वस्त्र धारन करती हैं और उनका वाहन है व्रिशब जो धर्म, स्थिर्ता, धैर्य और शक्ति का प्रतीक है।
01:11एक हाथ में त्रिशूल, जो एंकार और अज्ञान का नाश करता है।
01:16दूसरे हाथ में डमरू, जो स्रिश्टी की उर्जा और ब्रहमांडिय चेतना का प्रतीक है।
01:22तीसरा हाथ अभय मुद्रा में, जो भक्तों को भैसे मुक्त करता है।
01:26और चौथा हाथ वर मुद्रा में, जो सभी इच्छाओं को पूर्ण करता है।
01:32उनका शांत और सौम्य स्वरूप यह संदेश देता है।
01:36कि जब मन पूर्ण रूप से शांत हो जाता है।
01:39तभी आत्मा को परम शांती प्राप्त होती है।
01:43मा महागौरी की दिव्यक था, शिव पुराण और देवी भागवत अनुसार।
01:47प्राचीन काल में, मा महागौरी ने पारवती के रूप में हिमाले के घर जन लिया।
01:54बचपन से ही उनका एक ही संकल्प था।
01:58भगवान शिव को पती रूप में प्राप्त करना।
02:01इस संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने अत्यल्प कठोर तपस्या आरंब की।
02:07हजारों वर्षों तक उन्होंने अन्न और जल का त्याक कर दिया।
02:13घने जंगलों में, धू, वर्षा और कठिन परिस्थितियों में अडिक होकर तप करती रही।
02:20इस कठोर तपस्या के कारण।
02:23उनका शरीर काला और कठोर हो गया।
02:26लेकिन उनकी भक्ती, उनकी श्रद्धा, उनका विश्वास कभी दी कमजोर नहीं पड़ा।
02:34उनकी इस सटूर तपस्या से प्रसन होकर भगवान शिफ प्रकट हुए।
02:40उन्होंने मा पारवती को स्वीकार किया।
02:44और गंगा जल से उनका अभिशेक किया।
02:47जैसे ही गंगा का पवित्र जल उनके शरीर को स्पर्श करता है।
02:51उनका स्वरूप अत्यंत गौर, दिव्य और प्रकाश्मय हो जाता है।
02:56तभी से वे कहलाती है।
02:58मा महागौरी
03:00यह केवल बाहरी परिवर्तन नहीं था।
03:04यह आत्मा की पूर्ण शुद्धी का प्रतीक था।
03:07यह दर्शाता है कि
03:09सच्ची भक्ती और तप से।
03:12मनुष्य अपने कर्मों और जीवन को पूरी तरह बदल सकता है।
03:16आध्यात्मिक और योगिक रहस्या।
03:19नवरात्री का आठवा दिन।
03:22साधक के आज्या चक्र को जागरित करता है।
03:25यह वही चक्र है।
03:28जो ज्ञान, अंतरज्ञान और आत्मिक शक्ती का केंद्र है।
03:32जब यह चक्र सक्रिय होता है।
03:35तो व्यक्ति को सही और गलत का ज्यान होता है निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है और जीवन में सपश्टता
03:43आती है मा महागौरी का ध्यान करने से मन शान्त होता है और आत्मा अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानती है
03:53शास्त्र सम्मत पूजा विधी पूर्ण क्रम सु
04:05सबसे पहले पांच से दस मिनिट ध्यान करे मन को शान्त करे फिर दाहीने हात में जल अक्षत और फूल
04:14लेकर संकल पले मैं अपना नाम श्रद्धा और भक्ति से मा महागौरी की पूजा कर रहा रही हूँ त्रिप्या मेरी
04:22मनो कामनाय पूर्ण करे अब मा की प्रतिमा या च
04:26चित्र स्थापित करे गंगाजल छिड़कर स्थान को शुद्ध करे घी का दीपक जलाए दू पर्पित करे इसके बाद पूजन क्रम
04:37करे आसन अर्पन पाध्या अर्ग्या आच्मन गंगाजल से स्नान वस्त्र अर्पन चंदन कुमकुम अक्षत सफेद पुश पर्पित करे
04:543. । दूप और दीप अर्पित करेगी
04:56यह शोडशोपचार, पूजा का पूर्ण और सरल रूप है
05:01भोग और उसका आध्यात्मेकर्द
05:03मां महागौरी को विशेश प्रिया है
05:07खीर, नारियल, दूट से बने पक्वान
05:12हल्वा
05:14यह सभी भोग शुद्धता, सात्विक्ता और पवित्रता का प्रतीक है।
05:19इनका अर्पन मन और आत्मा की शुद्धी का संकेत देता है।
05:24शक्तिशाली मंत्र, पूरी उर्जा के साथ।
05:27उर्जा के समय कम से कम 108 बार इस बीज मंत्र का जाप करें।
05:32ओम देवी महागोर्य नमा, ध्यान मंत्र, श्वेते व्रिशे समारूधा, श्वेताम बर्धरा शुभा, महागोरी शुभम दध्यान महादेव प्रमूद्धा, सार्व भौमिक मंत्र,
05:46या देवी सर्व भूतेशू, शान्ति रूपेन संस्थिता, नमस्तस्या, नमस्तस्या, �
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06:3420.
06:3620.
06:53ुप्रात्री के 8 वे दिन मा महागौरी की सचे मन से आराध ना करें।
06:58उनकी कृपा से आपके जीवन में शांती, पवित्रता और सुख का वास होगा।
07:05यहाँ दिव्य प्रस्तुती चिंतन धारा द्वारा प्रस्तुत की गई है।
07:10जहां हम केवल कथाएं नहीं, बल्कि उनके पीछे छुपे गहरे आध्यात्मेक सत्य को आपके सामने लाते हैं।
07:18जय माता दिन।
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