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नवरात्रि के 5वें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो भगवान कार्तिकेय की माता और मोक्ष प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। उनकी कृपा से भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। इस Navratri Special वीडियो में जानिए मां स्कंदमाता की अद्भुत कथा, उनकी शक्ति और आशीर्वाद का रहस्य। वीडियो को अंत तक जरूर देखें और मां का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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Transcript
00:00जब स्रिष्टी में संतुलन बिगडता है, जब अधर्म अपनी सीमा पार कर देता है, तब केवल शक्ती ही नहीं, बलकी
00:08मा का रूप धारण कर दिव्यता स्वयम प्रित्वी पर उतरती है.
00:12नवरात्री के पावन दिनों में, हर दिन मा दुर्गा के एक विशेश स्वरूप की आराधना की जाती है, और पांचवा
00:19दिन समर्पित है, मा सकंदमाता को, जो ममता, शक्ती और संरक्षन का अद्भुच संगम है.
00:26बहुत प्राचीन समय की बात है. एक असुर था, तारकासुर, जिसने कठोर तपस्या कर ब्रहमा जी से वर्दान प्राप्त किया
00:36कि उसका वद केवल भगवान शिव के पुत्रद्वारा ही संभव होगा.
00:39लेकिन उस समय भगवान शिव गहन तपस्या में लीन थे. संसार से विरक्त और विवाह से दूर. इस वर्दान के
00:49कारण तारकासुर अहंकारी हो गया. उसने तीनों लोकों में आतंग फैलाना शुरू कर दिया.
00:54देवता, रिशी और मानव सभी उसके अत्याचार से भैभीत हो गए. तब सभी देवताओं ने मिलकर आदिशक्ती से प्रार्थना की.
01:04और तभी एक दिव्य योजना बनी. माता पार्वती ने कठोर तपस्या आरंब की. वर्षो की साधना. अटूट समर्पन. और अंत
01:15तह �
01:15उनका तप सफल हुआ. भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया. यह केवल एक विवा नहीं
01:23था. बलकि स्रिष्टी के संतुलन को पुना स्थापित करने की शुरुआत थी. समय बीता और एक दिव्य बालक का जन्म
01:32हुआ. भगवान का
01:45यह रूप हमें सिखाता है कि जब शक्ती ममता में बदलती है तो वह केवल स्रिजन ही नहीं करती. बलकि
01:53संसार की रक्षा का संकल्प भी बन जाती है. जैसे जैसे कार्तिके बड़े हुए, उनका तेज और पराक्रम अद्भुत होता
02:02गया. देवताओं ने उन्हें अपनी से
02:04का सेनापती बनाया. और फिर वह क्षन आया. जब धर्म और अधर्म के बीच निरनायक युद्ध हुआ. कार्तिके ने युद्ध
02:13भुमी में तारकासुर का सामना किया. और अंत ता उसका वद कर तीनों लोकों को भैसे मुक्त किया. यह केवल
02:21एक असुर का अंत नहीं था. �
02:23बलकि एंकार पर धर्म की विजय थी. और इस विजय के पीछे जो सबसे बड़ी शक्ती थी. वह थी मास
02:31कंदमाता. मास कंदमाता का स्वरूप अपने आप में एक गहरा संदेश है. गोद में बाल कार्तिके, मम्ता और संरक्षन का
02:40प्रतीक. कमल का आसन, शुद्धता और वै
02:53प्रात्री के पांचवे दिन. उनकी पूजा और साधना का विशेश महत्व है. इस दिन भक्तजन प्राताकाल ब्राम महूर्त में उठकर,
03:02स्नान कर अपने शरीर और मन को पवित्र करते हैं. स्वच और हलके या स्लेटी रंग के वस्त्र धारन करते
03:09हैं. पूजा स्थान को ग
03:23हात जोड़कर शांत मन से मा का ध्यान किया जाता है. हे मा सकंद माता, आप जो अपने भक्तों को
03:30भैसे मुक्त करती हैं. उन्हें सुक, शांती और संरक्षन प्रदान करती हैं. हम आपको नमन करते हैं. मा को कमल
03:39पुश्प अर्पित किया जाता है. साथ ही फल, मिठाई और व
03:53ओम देवी सकंद माताय नमा, इस मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करना अत्यंत फल्दाई माना जाता है।
04:02जाप के दौरान मन को पूर्ण रूप से एकाग्र और शांत रखना चाहिए। जाप के पश्चात, मा से अपने जीवन
04:11में सुख, शांती, संतान सुख और सुरक्षा के ल
04:23अत्यंत आवशक है। भक्तजन सात्विक भोजन ग्रहन करते हैं, लहसुन और प्यास का त्याग करते हैं और अपने विचार, वानी
04:32और कर्म को शुद्ध रखने का प्रयास करते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन
04:39से मास कंदमाता की आराधना करता है�
04:42उसे संतान सुक, मानसिक शांती और जीवन में स्थिरता का आशीरवाद प्राप्त होता है। नवरात्री का पांचवा दिन साधक के
04:51भीतर विशुद चक्र को जागरित करता है। जिससे मन निर्मल होता है। विचार सकारात्मक होते हैं। और आत्मा में दिव्य
04:59शांती का �
05:15
05:31यही सची शक्ती है, तो जब भी जीवन में डर लगे, जब भी लगे कि परिस्थितियां आपके विरुद्ध हैं, तब
05:39मा सकंद माता को स्मरण कीजिए, क्योंकि जहां मा का आशीरवाद होता है, वहां भैटिक नहीं सकता, और जहां ममता
05:48होती है, वहां स्वयन शक्ती जन्म �
05:51देती है, यहां वीडियो चिंतन धारा चैनल द्वारा प्रस्तुत की गई है, जहां हम केवल कथाए नहीं, बलकि उनके पीछे
06:00छुपे गहरे आध्यात्मिक सत्य और ज्ञान को आपके सामने लाते हैं,
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