00:00जब स्रिष्टी में अधर्म अपनी सीमा पार कर जाता है, जब अन्याय और अत्याचार हर दिशा में फैलने लगता है,
00:07तब आदिशक्ती केवल करुणा का रूप नहीं लेती, बलकि धर्म की रक्षा के लिए स्वयन युद्ध का स्वरूप धारन करती
00:14है.
00:15नवरात्री का छठा दिन, समर्पित है मा कात्याईनी को, जो शक्ती, साहस और न्याय की देवी मानी जाती है, बहुत
00:25प्राचीन समय की बात है, जब एक अत्यंत शक्तिशाली असुर, महिशासुर ने कठोर तपस्या कर देवताओं से वर्दान प्राप्त किया,
00:34और उस वर्द
00:44जक्ता का वातावरन फैल गया, तब सभी देवताओं ने मिलकर आदिशक्ति का आवान किया, और उसी क्षन ब्रहमा, विश्नु और
00:53महिश सहित सभी देवताओं के तेज से एक दिव्य प्रकाश उत्पन्न हुआ, उस दिव्य प्रकाश से प्रकट हुई, मा दुरगा,
01:01और �
01:01जब उन्होंने रिशी कात्यायन के यहां जन लिया, तब वे कहलाई, मा कात्यायनी, मा कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और
01:10दिव्य है, चार भुजाओं में अस्त्रशस्त्र धारन किये हुए, सिंग पर सवार, और उनके मुख पर करुना के साथ साथ,
01:19असुरो
01:20के विनाश का अडिक संकल्प दिखाई देता है, जब समय आया, तब मा कात्यायनी और महिशासुर के बीच भयंकर युद्ध
01:28हुआ, यह युद्ध केवल शक्ती का नहीं, बलकि धर्म और अधर्म के बीच निरनायक संघर्ष था, अंत्ता मा कात्यायनी ने
01:37अपने दिव्य �
01:38अस्त्रों से महिशासुर का वद कर दिया, और तीनों लोकों को उसके आतंग से मुक्त किया, यह केवल एक असुर
01:46का अंत नहीं था, बलकि एंकार और अन्याय पर धर्म की विजय थी, नवरात्री के छठे दिन, मा कात्यायनी की
01:55पूजा का विशेश महत्व है, इस दिन भक्
01:59प्रातहकाल उठकर, स्नान कर अपने शरीर और मन को शुद्ध करते हैं, और नाल या पीले रंग के वस्त्र धारन
02:06करते हैं, पूजा स्थान को शुद्ध कर, मा कात्यायनी की प्रतीमा या चित्र स्थापित किया जाता है, और उनके समक्ष
02:15शुद्ध घी का दीपक जलाया ज
02:44।
02:46ओम देवी कात्यायन्य नमा
02:48इस मंत्र का ग्यारा 21 या 108 बार जाप करना अत्यन्त फल्दाई माना जाता है
02:54और मन को पूर्ण रूप से एकाग्र रखना चाहिए
02:58जाप के पश्चार
03:00मा से अपने जीवन में साहस, सफलता और बाधाउं से मुक्ती की प्रार्थना की जाती है
03:06और रंत में मा की आर्ती कर पूजा पूर्ण की जाती है
03:10नवरात्री के इस दिन वरत और नियोमों का पालन करना भी आवशक है
03:15सात्विक भोजन ग्रहन करें
03:17लहसुन और प्यास का त्याग करें
03:19और अपने विचार, वानी और कर्म को शुद्ध रखें
03:23ऐसा माना जाता है कि
03:25जो भक्त इस दिन सच्चे मन से मा कात्याईनी की पूजा करता है
03:29उसे विवाह में आने वाली बाधाउं से मुक्ती मिलती है
03:33और जीवन में सफलता और आत्म विश्वास प्राप्थ होता है
03:38नवरात्री का छठा दिन
03:39साधत के भीतर आग्या चक्र को जागरित करता है
03:43जिससे बुद्धी प्रखर होती है
03:45निर्ने लेने की क्षमता बढ़ती है
03:48और जीवन में सपश्टता आती है
03:50मा कात्याईनी की महिमा का वर्णन
03:53दुर्गा सप्तिष्टी
03:55और देवी भागवत पुरान
03:57जैसे पवित्र ग्रंथों में विस्तार से मिलता है
04:01जहां उन्हें दुष्टों का सहार करने वाली
04:04और भक्तों की रक्षा करने वाली देवी कहा गया है
04:06Maa Katyaayini hume yaa sikhati hai ki
04:10Jeevan me chahe kitnee bhi kathina ya kya na aayin
04:14Hume saahas aur vishwaas ke saath unka sámna karna chahe
04:17Yehi sachi shakti hai
04:19Yehi satcha dharm hai
04:21To jab bhi jeevan me baadhai aayin
04:25Jab bhi lage ki raastah kathin hai
04:27Tab Maa Katyaayini ko smaran keejee
04:30Kyauki jaha maa ka aashirwaad ho ta hai
04:33Vahan asambhav bhi sambhav ho jata hai
04:36Yehaan video, chintan dhara, channel dvara prasthut ki gai hai
04:40Jahaan hum keval kathayin nahi
04:43Balki unke piche chupay ghearay aadhyatmik sathya aur gyan ko aap ke sámne layate hai
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